भोपाल

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आमिर खान के साथ गुलाम फिल्म की क्लाइमेक्स फाइट की शूटिंग में लग गए थे 11 दिन: शरत सक्सेना

अब फिर से आमिर के साथ ठग्स ऑफ हिन्दोस्तान में नजर आएंगे, गुलाम के लिए मिला बेस्ट विलेन का अवार्ड

Danik Bhaskar

Sep 08, 2018, 07:59 PM IST

भोपाल. ये बात 1997-98 होगी। उन दिनों हम 1997-98 आमिर खान के साथ गुलाम की शूटिंग कर रहे थे। सभी जानते है कि वो मिस्टर परफेक्शनिस्ट हैं। हर काम जब तक पूरी तरह से ठीक से न हो, वो तब तक करते हैं। उनके साथ गुलाम की क्लाइमेक्स फाइट शूट करने में 11 दिन लगे थे। सुबह से शाम तक मुंबई की भीषण गर्मी में शूटिंग करते थे। हर एंगल से शॉट का टेक लिया जाता था और हर टेक के कम से कम पांच रिहर्सल होते थे। तब जाकर वो क्लाइमेक्स फाइट खत्म हुई, जिसे देखकर आपको मजा आता है। गुलाम फिल्म के लिए ही मुझे फिल्म फेयर का बेस्ट विलेन का अवार्ड मिला था। यह कहना है फिल्म सतना में जन्मे अभिनेता शरत सक्सेना का। वह भोपाल एक निजी कार्यक्रम में पहुंचे थे।


पिता बोले, पहले प्रोफेशनल डिग्री करो : जबलपुर में इंजीनियरिंग की पढ़ाई कर रहा था, मेरे पिता हमेशा मेरे साथ खड़े रहे। उन्हें जब पता चला कि मैं फिल्मों में काम करना चाहता हूं। उन्होंने डांटकर कहा, पहले इंजीनियर या डॉक्टर बनिए। आपके पास प्रोफेशनल डिग्री होनी चाहिए। उसके बाद जो करना है कीजिए। मैं पुणे फिल्म इंस्टीट्यूट जाने वाला था, वो कागज फेंक दिया। मुंबई पहुंचा, फोटोग्राफी का शौक था। उस दौरान एक साहब की फोटो क्लिक कर रहा था, उन्होंने पूछा तुम एक्टर बनना चाहते हो। मैंने कहा- हां। बस पहला रोल मिला और हमने नौकरी छोड़ दी। इस तरह से फिल्मों में आना हुआ। फिर मार खाते-खाते यहां तक आ गए।

आर्टिस्ट एसोसिएशन में 10 हजार मेंबर है : पहले हिंदुस्तान की फिल्म इंडस्ट्री बहुत छोटी थी, लेकिन अब बड़ी हो गई है। फिल्म बड़ी बनती है, कलेक्शन ज्यादा होता है। लोगों की आमदनी ज्यादा है और रोजगार ज्यादा है। पहले जहां कुल 500 एक्टर थे। आज सिने आर्टिस्ट एसोसिएशन की मेंबरशिप में 10 हजार से ज्यादा लोग है। इसका नतीजा यह हुआ है कि फिल्में चलती नहीं है।

बोरिंग होते है सीरियस रोल : मैं सीरियस रोल पसंद नहीं करता। सीरियस रोल बहुत बोरिंग होते हैं। वहां आप किसी भी व्यक्ति को एंटरटेन नहीं करते। सिर्फ आप अपना टाइम स्पेंड करते है और इसके अलावा कुछ नहीं होता है।

फिर से आमिर खान के साथ कर रहा हूं फिल्म : एक फिल्म बड़ी पिक्चर है ठग्स ऑफ हिंदुस्तान दीवाली पर रिलीज हो रही है। आमिर खान और अमिताभ बच्चन के साथ काम किया। फिल्म का निर्देशन विजय कृष्ण आचार्य का है। यह पीरियड स्टोरी है हिंदुस्तान के फ्रीडम स्ट्रगल की। इसके साथ ही एक फिल्म किन्नरों पर बेस्ड है जो जल्द रिलीज होगी।

खुबसूरत और गोरा व्यक्ति ही बन सकता है हीरो : शरत कहते हैं कि हमारे देश में एक बड़ी प्रथा है अजीब सी, जो गोरा नहीं होता है वो बदसूरत होता है। अगर आप के बाल घुंघराले है तब भी आप बदसूरत है। खुबसूरत और हीरो बनने के लिए आपको गोरा होना चाहिए, आपके बाल सीधे होना चाहिए, आंखों का कलर यदि ब्लू है तो सोने पर सुहागा है।

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