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रियल एस्टेट / गाइडलाइन में प्रॉपर्टी के दाम 20% घटाने के बाद 24 नई लोकेशन पर अचानक तय किए रेट

After reducing the property prices by 20% in the guideline, suddenly the rates were fixed at 24 new locations
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After reducing the property prices by 20% in the guideline, suddenly the rates were fixed at 24 new locations

  • जानकार बोले-पंजीयकों के दबाव में केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने शामिल किए नए इलाके
  • सोमवार से लागू कर दी गई है संशोधित गाइडलाइन

Dainik Bhaskar

Dec 03, 2019, 07:35 AM IST

भोपाल . वर्ष 2019-20 के लिए जारी की गई कलेक्टर गाइडलाइन में तो राज्य सरकार ने जमीन के दाम 20 फीसदी घटा दिए थे, लेकिन अब अचानक केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने शहर की 24 लोकेशन पर प्रॉपर्टी के नए रेट लागू कर दिए हैं। संशोधित गाइडलाइन सोमवार से लागू भी कर दी गई है। आनन-फानन में यह कार्रवाई क्यों की गई, इसे लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं। जानकारों का कहना है कि ज्यादा राजस्व जुटाने के लिए जिला पंजीयकों के दबाव में यह कदम उठाया गया है।


 दरअसल इस साल कलेक्टर गाइडलाइन में पंजीयन विभाग के अफसरों ने शहर की 92 लोकेशन के लिए सर्वे किया था। पहले तो अफसरों ने करीब 200 कॉलोनियों में 33% तक दाम बढ़ाने का प्रस्ताव जिला मूल्यांकन समिति की बैठक में पेश कर दिया लेकिन जनप्रतिनिधियों के दबाव में प्रस्ताव लौटा दिया गया था। इसके बाद जून में सरकार ने रियल एस्टेट सेक्टर और लोगों को राहत देने के लिए प्रॉपर्टी के दाम 20 फीसदी घटाने का फैसला लिया था।

प्रमुख लोकेशन जहां पहली बार तय किए प्रॉपर्टी के दाम(रु/वर्ग मी. में)
 

सागर बंगलो, गोंदरमऊ    20,000
ए न्यू बैरक 13    22,000
कृष्णापुरम कॉलोनी,बड़वई वार्ड-75    10,000
नागेश्वर नगर, वार्ड 75    7,500
छोला कोरल कासा    20,000
कुशवाह कॉलोनी    7,500
बिग्रेडियर कॉलोनी    7,500
शांति नगर    7,500
पीजीएच इंटरनेशनल    20,000
रासलाखेड़ी की अन्य कॉलोनियां    18,000

केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने पहले वापस लौटा दिया था नई कॉलोनियों को गाइडलाइन में जोड़ने का प्रस्ताव

इसके बाद केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड ने वर्तमान प्रॉपर्टी की कीमतों में 20 फीसदी दाम घटाने के आदेश जारी किए थे। साथ ही सभी जिला पंजीयकों द्वारा नई कॉलोनियों को जोड़ने के प्रस्ताव को वापस लौटा दिया था। लेकिन पिछले दिनों भोपाल समेत प्रदेश के 12 जिलों के जिला पंजीयकों से नई कॉलोनियों को गाइडलाइन में शामिल करने के प्रस्ताव दोबारा मंगाए गए और मंत्री की अनुशंसा के बाद इसे केंद्रीय मूल्यांकन बोर्ड की बैठक में रखा गया। यहां से इसे मंजूरी देकर लागू कराने के आदेश भी जारी कर दिए गए। 

इस घोषणा पर अमल नहीं

हर तीन साल में तय हाेनी थी कलेक्टर गाइडलाइन, लेेकिन अब तक फैसला नहीं
हर साल एक अप्रैल से नई गाइडलाइन लागू होती है, लेकिन शासन स्तर पर अभी तक यह तय नहीं हो पाया है कि कलेक्टर गाइडलाइन तीन साल के लिए बनेगी या फिर हर साल प्रॉपर्टी की कीमतें तय की जाएंगी। सरकार ने वचन पत्र में कहा था कि प्रॉपर्टी की कीमतें तीन साल के लिए तय होंगी। लेकिन अभी तक इसको लेकर कोई स्पष्ट आदेश जारी नहीं हुए हैं। इसी का नतीजा है कि पंजीयन विभाग के अफसर विसंगति के नाम पर गाइडलाइन में कीमतें बढ़ा देते हैं। इसके चलते शहर के चुनिंदा क्षेत्र में प्रॉपर्टी खरीदना महंगी होती जा रही है।

पहले रह गई कॉलोनियों को गाइडलाइन में जोड़ा : सिर्फ उन कॉलोनियों को गाइडलाइन में जोड़ा गया है, जो पहले रह गई थी। कहीं पर भी प्रॉपर्टी के दाम नहीं बढ़ाए गए हैं। - मनु श्रीवास्तव, प्रमुख सचिव, वाणिज्यिक कर विभाग

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