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इंटरव्यू / आशुतोष राणा ने कहा- हम सब पॉलिटिक्स में हैं, सड़क जगी रही तो संसद भी जगी रहेगी



अभिनेता आशुतोष राणा शुक्रवार को भोपाल पहुंचे। अभिनेता आशुतोष राणा शुक्रवार को भोपाल पहुंचे।
उन्होंने भास्कर से खास बातचीत की। उन्होंने भास्कर से खास बातचीत की।
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अभिनेता आशुतोष राणा शुक्रवार को भोपाल पहुंचे।अभिनेता आशुतोष राणा शुक्रवार को भोपाल पहुंचे।
उन्होंने भास्कर से खास बातचीत की।उन्होंने भास्कर से खास बातचीत की।

  • इन दिनों राम राज्य लिख रहा हूं, जिसमें बताया है कि राम वनवास गए तो 14 साल अयोध्या का क्या हुआ 
  • शुक्रवार को शहर एमपीएसडी के सत्र समाप्ति में पहुंचे वरिष्ठ फिल्म कलाकार आशुतोष राणा

Dainik Bhaskar

Jul 13, 2019, 02:03 PM IST

भोपाल. फिल्म अभिनेता आशुतोष राणा शुक्रवार को एमपीएसडी के सत्र समाप्ति में मौजूद थे। उन्होंने कहा- मुझे पहली बार एमपीएसडी से एप्रोच किया गया कि मैं इस सत्र समाप्ति में हिस्सा लेने के लिए आऊं, तो मैं आ गया। स्कूल के निदेशक आलोक चटर्जी ने मुझसे कहा 10 से 13 जुलाई तक सत्र समाप्ति है जहां कई नाटकों की प्रस्तुति होगी। मैं यहां पहली बार आया हूं और पहली बार एमपीएसडी को देख रहा हूं। इस दौरान उन्होंने फिल्मों, पॉलिटिक्स, कविताओं से संबंधित कई सवालों के जवाब दिए...

इन दिनों क्या लिख रहे हैं आशुतोष राणा

  1. मैंने "कलियुग' नाम से कविता लिखी है जो कलि असुर पर है। कलि परम ब्रह्म को चुनौती दे रहा है। इस कविता में उन दोनों का संवाद है। जिसमें परम ब्रह्म परमात्मा के संवाद ऐसे हैं-  तुम बहुत बोले, मैं चुपचाप सब सुनता रहा और तेरे हृदय की वेदना को मन ही मन गुनता रहा, है बहुत सा क्रोध तेरे मन में सबके वास्ते, और चाहता है तू बंद करना सभी के रास्ते...!

  2. वेब सीरीज ने सिनेमा को कैसे बदला है? 

    अभिनेता के तौर पर कहूं तो मुझे कोई अंतर समझ नहीं आता। अभिनय प्रेम की तरह है, इसमें सात्विक भाव नहीं होगा तो दर्शकों के दिल को नहीं छुएगा, चाहे रंगमंच हो या सिनेमा। लेकिन तकनीकी के हिसाब से बात करूं तो यह माध्यमों का विस्तार है। मंच पर उतने ही दर्शक हमें देख सकते हैं जितने सभागार में मौजूद हैं। फिर हम सिनेमा में गए तो उतने ही दर्शक एक ही समय में भोपाल, बरेली, बर्लिन में देख सकते हैं। टीवी के साथ कलाकार खुद दर्शकों के ड्राइंग रूम में प्रवेश कर गए। अब मनोरंजन के लिए भी अलग से समय निकालने की जरूरत नहीं है। ऑफिस जाते वक्त, ट्रैफिक में, रेल के सफर में मोबाइल पर ही सब देख सकते हैं, यह माध्यमों का विस्तार है। 

  3. युवा रंगकर्मी जल्दी मुंबई का रुख कर रहे हैं... 

    क्षमता और इच्छा दो अलग-अलग चीजें हैं। किसी चीज की मेरे अंदर इच्छा है, पर जरूरी नहीं कि उसकी क्षमता भी हो। या किसी काम को करने की क्षमता हो पर इच्छा भी हो यह जरूरी नहीं। हमारी इच्छा और क्षमता के बीच चलने वाला द्वंद्व ही हमारी असफलता या अवसाद का कारण होता है। इसलिए जो काम करना है उसके लिए क्षमता और इच्छा दोनों को हासिल करना होगा। इसके साथ अपनी कला या प्रतिभा दोनों में अभ्यास करते रहना चाहिए। तभी अवसर भी मिलेंगे। जितना अभ्यास करेंगे तो हर जर्रे में अवसर मिलेंगे।

  4. क्या आप पॉलिटिक्स में इंट्रेस्ट रखते हैं? 

    आप, हम, सब हर व्यक्ति पॉलिटिक्स में है। बस अंतर इतना है कि कुछ लोग सड़क पर अलख जगा रहे होते हैं और कुछ संसद में। मैं उन 125 करोड़ भारतीय में से हूं जो सड़क पर खड़ा है। मेरा मानना है कि अगर सड़क जगी रही, तो संसद भी जगी रहेगी। संसद जगी रही तो सड़क जगी रहेगी। हालांकि अभी तो मैं अपने काम में ही लगा रहूंगा। मैं अभी अभिनय में ही काम करते रहना चाहता हूं। अभी मेरा मन नहीं भरा है अभिनय से। तो फिलहाल मैं अपने काम को ही करुंगा, कोई मठ (संस्था) बना के नहीं रहूंगा। 

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