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ईवीएम का रोचक गणित / आधुनिक ईवीएम के दौर में मत पत्र से चुनाव संभव है बशर्ते किसी सीट पर 64 से ज्यादा उम्मीदवार मैदान में उतरें



assembly election 2018
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assembly election 2018

Dainik Bhaskar

Oct 14, 2018, 11:39 AM IST

भोपाल। कांग्रेस समेत कई विपक्षी पार्टियां लंबे समय से अगले लोकसभा चुनाव ईवीएम की जगह मत पत्र से कराने की मांग कर रही हैं। कई बार चुनाव आयोग भी इस पर स्पष्टीकरण दे चुका है कि जब ईवीएम पूरी तरह सुरक्षित है और इस प्रक्रिया में किसी भी तरह की छेड़छाड़ संभव नहीं है फिर भी विपक्षी दल मत पत्र से वोट कराने पर जोर दे रहे हैं। हालांकि मध्यप्रदेश, राजस्थान और छत्तीसगढ़ समेत पांच राज्यों में नवंबर-दिसंबर में होने जा रहे मतदान के लिए आयोग ने आधुनिक ईवीएम मशीनों का इंतजाम किया है। 

 

आयोग भले ही मत पत्र से मतदान की संभावना को नकार दे, पर आयोग की चुनावी प्रक्रिया की नियमावली में एक नियम ऐसा भी है, जो विशेष परिस्थिति में मत पत्र से मतदान की अनुमति देता है। ये परिस्थिति तभी बनती है जब किसी सीट पर उम्मीदवारों की संख्या 64 से अधिक हो। यानी किसी सीट पर यदि 65 प्रत्याशी होते हैं तो आयोग नियमानुसार वहां मत पत्र से मतदान कराएगा।

 

ऐसा इसलिए क्योंकि प्रत्याशियों की अधिक संख्या के आधार पर सिर्फ चार ईवीएम ही एक-दूसरे से कनेक्ट कर उपयोग की जा सकती हैं। हालांकि मप्र निर्वाचन आयोग के सीईओ बीएल कांताराव का कहना है कि 64 से ज्यादा प्रत्याशी होने पर नई तरह की ईवीएम मंगवाकर वोटिंग कराएंगे। 

 

16 से ज्यादा प्रत्याशी होने पर दूसरी यूनिट पहली वाली से जोड़ी जाती है 

- ईवीएम में अधिकतम 3840 वोट डाले जा सकते हैं। वैसे एक पोलिंग बूथ पर वोट डालने वालों की संख्या 1500 से ज्यादा नहीं रहती है। 
-  ईवीएम की एक बैलेटिंग यूनिट में 16 उम्मीदवारों के लिए प्रावधान किया गया है। अगर उम्मीदवार 16 से ज्यादा होते हैं तो दूसरी बैलेटिंग यूनिट को जोड़ा जाता है। अधिकतम चार बैलेटिंग यूनिट जोड़ सकते हैं। यानी कुल 64 उम्मीदवार के लिए ईवीएम काम करेगी। 
- जन प्रतिनिधित्व कानून 1951 की धारा 61 (क) में चुनाव आयोग परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए किसी भी निर्वाचन क्षेत्र में बैलेट पेपर और ईवीएम से चुनाव करा सकता है। 

 

11 से 16 नंबर के बटन काम के नहीं 
ईवीएम की एक बैलेटिंग यूनिट में उम्मीदवारों को लेकर साफ नियम है। यदि किसी विधानसभा में 10 प्रत्याशी है तो 11 से 16 नंबर वाले बटन के काम के नहीं रहेंगे। इन्हें इलेक्ट्राॅनिक्स रूप से बंद कर दिया जाएगा। केवल 10 प्रत्याशी पर स्विच सेट होगा। ऐसे में 11 से 16 तक का कोई भी बटन दबाने पर वोट दर्ज नहीं होगा। 

 

1980 में देश में बनी थी पहली ईवीएम 


1998-99 के लोकसभा चुनाव पहली बार चुनावी पैटर्न बदला था और ईवीएम से वोटिंग हुई थी। 1980 में एमबी हनीफा ने पहली भारतीय ईवीएम बनाई थी। 1989 में चुनाव आयोग ने भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड और इलेक्ट्रॉनिक्स कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लिमिटेड के साथ करार करके चुनावी प्रक्रिया में शामिल किया था।

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