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ग्राउंड रिपोर्ट / 25 साल पहले रेल नक्शे से गायब था छिंदवाड़ा, आज यहां पैसेंजर से लेकर सुपर फास्ट ट्रेनें



assembly election 2018, kamalnath
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  • प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष के संसदीय क्षेत्र की तस्वीर बदली
  • नागपुर, इलाहाबाद, गोरखपुर के रूट पर काम जारी

Dainik Bhaskar

Oct 12, 2018, 12:23 PM IST

छिंदवाड़ा। किसी भी संसदीय क्षेत्र के जनप्रतिनिधि के सत्ताधारी पार्टी में होने से उस क्षेत्र के विकास की इबारत नहीं लिखी जा सकती। इसके लिए जरूरी है- विकास के प्रति समग्र सोच के साथ-साथ दूर दृष्टि वाला नजरिया। 

 

बात को समझना हो तो छिंदवाड़ा जिले में रेल सुविधाओं के मामले में जीरो से लेकर दूरस्थ आदिवासी इलाके पातालकोट के आखिरी गांव कारेआम-0 का माइलस्टोन सैट करने तक की विकास गाथा से गुजरना होगा। दो दशक पहले छिंदवाड़ा रेल के नक्शे से गायब था। यूपीए सरकार के शासन में देश भर में 36 मॉडल स्टेशन स्वीकृत हुए थे। उनमें में 4 छिंडवाड़ा जिले में बने। ये हैं- छिंडवाड़ा, परासिया, आमला और पांढुर्णा। नैनपुर लाइन पूरी होते ही पूर्वी और उत्तर भारत के लिए नया रेल कॉरिडोर तैयार हो जाएगा। रेल सुविधाओं के मामले में यह विकास पिछले 25 सालों में हुआ है। 

 

पैसेंजर से सुपर फास्ट तक : आजादी के समय से ही चलने वाली नैरो गेज पैसेंजर ट्रेन नागपुर से जबलपुर तक जाने में 14 घंटे लेती थी। लगभग आधी सदी तक इस संसदीय क्षेत्र का यही हाल था। परासिया तक ब्रॉड गेज लाइन थी, वहां से भोपाल-इंदौर आदि के लिए फास्ट पैसेंजर थी। 1996 के अंत में ब्रॉड गेज छिंदवाड़ा तो पहुंच गई, लेकिन अब लड़ाई है इसे बड़े शहरों से जोड़ने की है। 

 

kamlnath

तब और अब : 30 किमी का सफर करने में लग गए 50 साल 

छिंदवाड़ा से 30 किमी दूर परासिया में रेल पटरियां 1947 के पहले ही बिछ चुकी थीं, लेकिन छिंदवाड़ा तक का महज 30 किमी का सफर पूरा करने में इसे करीब 50 साल लग गए। हालांकि, छिंडवाड़ा नैरोगेज के रास्ते नागपुर और जबलपुर से जुड़ा हुआ था, लेकिन नागपुर के रास्ते जबलपुर जाने में 14 से 15 घंटे तक लग जाते थे। वर्तमान में ब्रॅाड गेज लाइन नागपुर-इटारसी-भोपाल या फिर पिपरिया के रास्ते जबलपुर होकर जाती है।

 

ऐसे शुरू हुआ सफर: 1980 में सासंद बनने के बाद कमलनाथ ने परासिया से छिंडवाड़ा के रास्ते नागपुर ब्राॅड गेज लाइन के लिए कवायद शुरू की। परियोजना की लागत 1500 करोड़ रुपए से ज्यादा थी। जब भी इस परियोजना का मामला रेल मंत्रालय पहुंचता था, बड़े बजट का हवाला देकर इसे मना कर दिया जाता था। क्षेत्रीय सांसद कमलनाथ ने उस परियोजना को दो हिस्सों में तोड़ा। छिंदवाड़ा से परासिया को फेज-1 तथा छिंदवाड़ा से नागपुर को फेज-2 नाम देकर नए सिरे से कोशिश की। उनकी यह रणनीति काम आई और फेज-1 के लिए बजट स्वीकृत हुआ। 1995-96 छिंडवाड़ा से परासिया के बीच 30 किमी लाइन का काम 7 महीने के रिकॉर्ड समय में पूरा हुआ। 

अभी नागपुर से इलाहाबाद-गोरखपुर-बनारस जाने के लिए इटारसी या भोपाल के रास्ते होकर जाना पड़ता है। छिंडवाड़ा में चल रहा प्रोजेक्ट पूरा होने का बाद यह दूरी 150 किमी कम हो जाएगी। 

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