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मध्यप्रदेश में 1073 असिस्टेंट प्रोफेसर को बैक डेट में दिया प्रोफेसर का पदनाम

असिस्टेंट प्रोफेसर को वर्ष 2006 से 2009 तक की स्थिति से मिलेगा लाभ

Dainik Bhaskar

Jun 14, 2018, 06:40 AM IST
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भोपाल. उच्च शिक्षा विभाग ने 1073 असिस्टेंट प्रोफेसर को बैक डेट से प्रोफेसर का पदनाम देने के आदेश बुधवार को जारी किए हैं। यह आदेश अलग-अलग चार श्रेणी के असिस्टेंट प्रोफेसर को लेकर किए हैं। इसमें ऐसे प्रोफेसर को एक बार फिर से प्रोफेसर का पदनाम दे दिया गया जो मध्यप्रदेश लोक सेवा पीएससी से सीधी भर्ती के तहत प्रोफेसर नियुक्त हुए हैं। जिन्हें हाल ही में स्थाई किया गया है।

27 अगस्त 2015 को संशोधन किया गया था भर्ती नियम

- वहीं इमरजेंसी व पीएससी से चयनित असिस्टेंट प्रोफेसर के नाम भी शामिल हैं। इनमें बड़ी संख्या में ऐसे असिस्टेंट प्रोफेसर भी है जिन्हें उच्च शिक्षा मंत्री जयभान सिंह पवैया की पहल पर एसोसिएट प्रोफेसर बनाया गया था। ऐसे में एसोसिएट प्रोफेसर बनाने के आदेश निरस्त करने पड़ सकते हैं।

- उच्च शिक्षा विभाग मध्यप्रदेश शैक्षणिक सेवा (महाविद्यालयीन शाखा) भर्ती नियम-1990 में 27 अगस्त 2015 को संशोधन किया गया था। जिनमें यूजीसी रेगुलेशन 2010 के अनुसार बदलाव किया गया था। इन नए नियम के अनुसार असिस्टेंट प्रोफेसर को एसोसिएट प्रोफेसर बनाया था।

- इसके चलते चतुर्थ पे-बेण्ड वेतनमान रुपये 34400-67000+9000 में कार्यरत विषयवार 1606 सहायक प्राध्यापक को इसका लाभ दिया। अब इनमें से कई असिस्टेंट प्रोफेसर को पुराने भर्ती नियम 1990 के अनुसार ही प्रोफेसर बना दिया गया है।

- असिस्टेंट प्रोफेसर्स को प्रोफेसर का पदनाम देने की कार्रवाई को लेकर शासकीय प्रांतीय महाविद्यालयीन प्राध्यापक संघ के प्रांताध्यक्ष प्रो. कैलाश त्यागी व महासचिव प्रो. आनंद शर्मा ने उच्च शिक्षा मंत्री पवैया और एसीएस बीआर नायडू का एक अच्छा निर्णय बताया है।

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