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  • Pt. Rajan Sajan Mishra said in Bharat Bhavan Sangeet Puja, prayers and prayers ... you too join this musical journey

स्थापना दिवस समारोह / भारत भवन में पं. राजन-साजन मिश्र ने कहा- संगीत पूजा, इबादत और प्रार्थना... आप भी इस संगीत यात्रा में शामिल हों

भारत भवन की 38वीं वर्षगांठ के मौके पर पद्म भूषण पंडित राजन-साजन मिश्र की प्रस्तुति हुई। भारत भवन की 38वीं वर्षगांठ के मौके पर पद्म भूषण पंडित राजन-साजन मिश्र की प्रस्तुति हुई।
पंडित मिश्र ने कहा कि वह रमाकांत गुंदेचा को मिस कर रहे हैं। पंडित मिश्र ने कहा कि वह रमाकांत गुंदेचा को मिस कर रहे हैं।
इस मौके पर उन्होंने अलग-अलग राग में बंदिशें सुनाईं। इस मौके पर उन्होंने अलग-अलग राग में बंदिशें सुनाईं।
प्रख्यात लेखक मंजूर एहतेशाम भी उन्हें पंडित राजन-साजन मिश्र को सुनने पहुंचे। प्रख्यात लेखक मंजूर एहतेशाम भी उन्हें पंडित राजन-साजन मिश्र को सुनने पहुंचे।
एडीजी अनुराधा शंकर (ग्रीन स्वेटर में) भी मौजूद रहीं। एडीजी अनुराधा शंकर (ग्रीन स्वेटर में) भी मौजूद रहीं।
गुंदेचा बंधुओं में उमाकांत गुंदेचा भी भारत भवन पहुंचे। गुंदेचा बंधुओं में उमाकांत गुंदेचा भी भारत भवन पहुंचे।
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भारत भवन की 38वीं वर्षगांठ के मौके पर पद्म भूषण पंडित राजन-साजन मिश्र की प्रस्तुति हुई।भारत भवन की 38वीं वर्षगांठ के मौके पर पद्म भूषण पंडित राजन-साजन मिश्र की प्रस्तुति हुई।
पंडित मिश्र ने कहा कि वह रमाकांत गुंदेचा को मिस कर रहे हैं।पंडित मिश्र ने कहा कि वह रमाकांत गुंदेचा को मिस कर रहे हैं।
इस मौके पर उन्होंने अलग-अलग राग में बंदिशें सुनाईं।इस मौके पर उन्होंने अलग-अलग राग में बंदिशें सुनाईं।
प्रख्यात लेखक मंजूर एहतेशाम भी उन्हें पंडित राजन-साजन मिश्र को सुनने पहुंचे।प्रख्यात लेखक मंजूर एहतेशाम भी उन्हें पंडित राजन-साजन मिश्र को सुनने पहुंचे।
एडीजी अनुराधा शंकर (ग्रीन स्वेटर में) भी मौजूद रहीं।एडीजी अनुराधा शंकर (ग्रीन स्वेटर में) भी मौजूद रहीं।
गुंदेचा बंधुओं में उमाकांत गुंदेचा भी भारत भवन पहुंचे।गुंदेचा बंधुओं में उमाकांत गुंदेचा भी भारत भवन पहुंचे।

  • बहुकला केंद्र भारत भवन अपनी स्थापना की 38वीं वर्षगांठ मना रहा है
  • इस अवसर पर दस दिनी सांस्कृतिक कार्यक्रमों का आयोजन किया जा रहा है

Dainik Bhaskar

Feb 14, 2020, 01:21 PM IST

भोपाल. 13 फरवरी 1982 को अस्तित्व में आया बहुकला केंद्र भारत भवन अपनी स्थापना से ही नित नए आयाम गढ़ता चला आ रहा है। इसी क्रम में स्थापना के 38वें वर्ष में इसके हिस्से में एक और नया आयाम गुरुवार काे यहां आयाेजित पहली इंटरनेशनल स्कल्पचर आर्ट एग्जीबिशन से जुड़ा। प्रदर्शनी का शुभारंभ संस्कृति मंत्री डॉ. विजय लक्ष्मी साधौ ने किया।

रमाकांत जी को मिस कर रहे
स्थापना दिवस समारोह की अगली कड़ी में बनारस घराने के पं. राजन-साजन मिश्र का गायन हुआ। मंच पर जैसे ही दोनों गायक हाथ जोड़े पहुंचे संगीत प्रेमियों ने तालियों से उनका स्वागत किया। मिश्र बंधुओं ने भी चेहरे पर हल्की मुस्कान से सभी का आभार व्यक्त किया। इसके बाद मंच प कुछ देर तक माइक टेस्टिंग का दौर चला। सभागार में ध्रुपद गायक उमाकांत और अखिलेश गुंदेचा को देखकर बड़े ही नम शब्दों में कहा- आज हम रमाकांत जी को बहुत मिस कर रहे हैं।

राग पद्धति बहुत प्राचीन, ये वेदों के जमाने से 

उन्होंने अपनी प्रस्तुति की रूपरेखा को संगीत प्रेमियों के साथ साझा करते हुए कहा- यह 10 दिन का आयोजन है। इसलिए इसकी शुरुआत हम प्राचीन राग- रागश्री से कर रहे हैं। श्री से मतलब भगवान विष्णु से है, जहां हम आराधना से इसकी शुरुआत करेंगे। राग पद्धति बहुत प्राचीन है। यह वेदो के जमाने से शुरू है। पंडित मिश्र ने कहा- संगीत पूजा, इबादत और प्रार्थना है, हम चाहते हैं कि आप भी इस संगीत की यात्रा में शामिल हों...। इसके बाद उन्होंने रागश्री में पहली रचना झपताल में 10 मात्रा की बंदिश पेश की। इसके बोल थे- प्रभु के चरण कमल निश्दिन सुमिरे…। इसके बाद एक ताल में बंदिश अब मोरी बाही कहो दीनानाथ… को सुनाया तो माहौल में आध्यात्मिक माधुर्य और आनंद का संचार हुआ।

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