भोपाल

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20 करोड़ का कर्ज ले फरार शख्स को उस मकान पर भी लोन दिया, जिसे वो 15 साल पहले बेच चुका है

शरद निगम और मीनू निगम ने फर्म वार्डरोब के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक की न्यू मार्केट ब्रांच से 36 लाख रुपए का लोन लिया था।

Danik Bhaskar

Apr 17, 2018, 02:11 AM IST

भोपाल. गुलमोहर का मकान नं. जी 1/13। इस तीन मंजिला मकान का मालिक है शरद निगम। जो बीते चार साल से गायब है, क्योंकि बैंक, ज्वेलर, फाइनेंसर शायद ही शहर में कोई ऐसी सरकारी या गैर सरकारी संस्था हो, जिसे इस शख्स ने ठगा न हो। मतलब फर्जी कागजों पर करोड़ों का लोन। अब लेनदार बंद मकान के चक्कर काट रहे हैं। कमाल की बात तो यह है कि शरद ने गुलमोहर स्थित जिस मकान को मार्डगेज कर लोन लिया था, वह उसके दो फ्लोर तीन अलग-अलग लोगों को 15 साल पहले ही बेच चुका है।

ज्वेलर्स के लिए वसूली करने वाले मकान की दीवार फांदकर घर के भीतर दाखिल होने की कोशिश करते हैं तो बैंक के वसूली एजेंट कार उठाने आते हैं। इस घर में बकाया वसूली के लिए रोज ही कोई बैंक या फिर कोई सरकारी विभाग का बंदा कुर्की या वसूली का नोटिस लेकर पहुंचता है। मकान के बाहर दर्जनों नोटिस चस्पा हैं। पड़ोसी परेशान हैं, क्योंकि लगभग रोज ही कोई न कोई लेनदार उनके घर दस्तक देता है। पूंछने के लिए कि शरद निगम कहां हैं? जवाब देते-देते अब ये लोग तंग आ चुके हैं।

जानिए... बैंकों और फाइनेंस कंपनियों को ठगने वाले को

कपड़े का कारोबारी शरद निगम की शहरभर में अलग-अलग नामों से आठ से ज्यादा कपड़ों की दुकानें थीं। व्यवसाय बढ़ाने के लिए शरद ने गुलमोहर स्थित घर को मार्डगेज कर दो-अलग-अलग बैंक और फाइनेंस कंपनी से करोड़ों रुपए का लोन लिया। लोन नहीं चुकाया तो बैंक और फाइनेंस कंपनी घर के मालिकाना हक को लेकर आमने-सामने आ गए हैं। शरद ने स्टॉक और दुकानों के नाम से भी बैंकों से काफी सारा लोन ले रखा है, जो करीब 20 करोड़ रुपए होता है। कुछ बैंकों ने तो शरद की प्रॉपर्टी अटैच करके वसूली की, लेकिन वह लोन की राशि को देखते हुए नाकाफी थी। इसलिए कुछ फाइनेंस कंपनियों ने वसूली के लिए कोर्ट की शरण ली। बैंकों ने अपनी बकाया की वसूली के लिए शरद के सारे प्रकरण डेट रिकवरी ट्रिब्यूनल (डीआरटी) में दे रखे हैं। भास्कर की पड़ताल में सामने आया कि लोन देने से पहले नियत प्रक्रिया का कड़ाई से पालन करने वाले बैंकों और वित्तीय कंपनियों ने शरद को लोन देने में इतनी उदारता दिखाई कि सारे नियमों-शर्तों को ही ताक पर रख दिया।

ठगी की दास्तां... पीएनबी, इलाहाबाद बैंक, बैंक ऑफ बड़ौदा आईसीआईसीआई बैंक सबको ठगा

1- शरद निगम और मीनू निगम ने फर्म वार्डरोब के नाम पर पंजाब नेशनल बैंक की न्यू मार्केट ब्रांच से 36 लाख रुपए का लोन लिया था।
2- बैंक ऑफ बड़ौदा की एमपी नगर स्थित ब्रांच से फर्म एपेरल सॉल्यूशन और ड्रेस सेंस के नाम पर 1.87 करोड़ और 1.52 करोड़ रुपए का लोन लिया था। एक प्रॉपर्टी गुलमोहर कॉलोनी स्थित घर जी 1/13 बैंक के पास बंधक है, लेकिन उसका मैग्मा फाइनेंस से विवाद चल रहा है, क्योंकि शरद ने इसी मकान को मार्डगेज कर मैग्मा फाइनेंस से भी 20 अप्रैल 2014 को 1.25 करोड़ का लोन लिया था। इतना ही नहीं इस तीन मंजिला मंजिला के दो फ्लोर शरद 3- नरेंद्र कुमार खरे को 1999 में, अलका श्रीवास्तव को 2004 में और नीता ठाकुर को 2005 में बेच चुका है।
4- इलाहाबाद बैंक (जहांगीराबाद) का ब्याज सहित कुल कर्ज 85 लाख रुपए है। कलेक्टर ने शरद की सुरेंद्र लेंडमार्क होशंगाबाद रोड के 3400 वर्गफीट के प्लॉट की कुर्की कराई थी।
5- बजाज फाइनेंस से एपेरल सॉल्यूशन के नाम से 15.30 लाख रुपए का कंज्यूमर लोन बकाया है।
6- आईसीआईसीआई बैंक से 4.49 लाख रुपए का लोन 2012 से बकाया है। कर्नाटका बैंक से शरद की पत्नी मीनू निगम के नाम 7.96 लाख रुपए का कार लोन बकाया है, जो ब्याज के साथ 10 लाख रुपए हो चुका है।
7- राज्य कर विभाग के सर्किल-5 में फर्म ड्रेस सेंस और एपेरल सॉल्यूशन परा 80 लाख रुपए का वैट बाकी है। शरद की गुलमोहर स्थित प्रॉपर्टी में विभाग कुर्की का नोटिस दे चुका है।

इन मामलों में फरार

1. चेक बाउंस के मामले में शरद 2015 से फरार है। शरद ने मनीष जैन को 5-5 लाख के दो चेक दिए, जो बाउंस हो गए।
2. न्यूनतम वेतन भुगतान के मामले में भी शरद 2012 से फरार चल रहा है।
3. मैग्मा फाइनेंस की शिकायत पर चल रहे मामले में शरद 2014 से फरार है।
4. बजाज फाइनेंस के कंज्यूमर लोन के मामले में वह 2015 से फरार है।
5. आईसीआईसीआई बैंक के लोन मामले में भी वह 2012 से फरार है।

लड़ रहा लीजिंग का केस -वसूली के पांच से अधिक मामलों में फरार चल रहा शरद निगम न्यू मार्केट स्थित एक दुकान का नियमित किराया दे रहा है, बल्कि लीजिंग विवाद में वकील के माध्यम से स्वयं को कोर्ट में रिप्रेजेंट कर रहा है।

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