भास्कर खास / महिलाओं द्वारा पुरुषाें की प्रताड़ना के मामले में भाेपाल तीसरे नंबर पर

प्रतीकात्मक फोटो। प्रतीकात्मक फोटो।
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प्रतीकात्मक फोटो।प्रतीकात्मक फोटो।

  • भाेपाल की भाई वेलफेयर साेसाइटी, इंदाैर की पाैरुष संस्था, राष्ट्रीय पुरुष आयाेग समन्वय समिति ने जारी किए आंकड़े
  • जेंडर बायस्ड कानून के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्थाओं ने देश में पुरुष आयाेग बनाने के लिए मुहिम छेड़ी

Dainik Bhaskar

Feb 15, 2020, 07:19 AM IST

भाेपाल ( वंदना श्राेती ) . महिलाओं की प्रताड़ना के मामले की सुनवाई के लिए महिला आयाेग, महिला थाना बने है। अब महिलाअाें द्वारा प्रताड़ित किए जाने के खिलाफ अावाज उठने लगी है। महिलाअाें द्वारा प्रताड़ित किए जाने के संबंध में भाेपाल मप्र में तीसरे नंबर पर है। पहले नंबर पर इंदाैर और दूसरे पर जबलपुर है। 


यह खुलासा किया है पुरुष अधिकाराें के लिए लड़ाई लड़ने वाली संस्थाओं ने। इनका कहना है कि दहेज के खिलाफ सख्त कानून बना है लेकिन इसमें दहेज लेने वालाें के खिलाफ ताे प्रकरण दर्ज हाेता है लेकिन देने वालाें के खिलाफ नहीं। जेंडर बायस्ड कानून के खिलाफ आवाज उठाने वाली संस्थाओं ने देश में पुरुष आयाेग बनाने के लिए मुहिम छेड़ी है। उनका कहना है जिस दिन पुरुष आयाेग बन जाएगा, उस दिन से ही अदालताें में दर्ज प्रकरणाें की संख्या घटकर एक तिहाई हाे जाएगी।

पुरुष अधिकाराें की लड़ाई लड़ने वाली भाेपाल की भाई वेलफेयर साेसाइटी और इंदाैर की पीपुल अगेंस्ट अनइक्वल रूल्स यूज्ड रूल्स यूज्ड टू शेल्टर हैरासमेंट (पाैरुष संस्था), राष्ट्रीय पुरुष आयाेग समन्वय समिति के सदस्याें का कहना है कि हम चाहे जितने हाइटेक हाे जाए लेकिन अभी भी दहेज की गिरफ्त से हम बाहर नहीं हाे पाएं है। देश में जाे भी कानून बनाए गए हैं वे केवल पत्नी और बहू के लिए है। इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है कि केवल मप्र में एक साल में 1.62 लाख प्रकरण दहेज प्रताड़ना के दर्ज हुए हैं। वहीं भाेपाल में 1518 मामले दहेज प्रताड़ना के दर्ज किए गए है। उसमें सबसे ज्यादा महिलाअाें के द्वारा प्रताड़ित हाेने वाले की पुरुषाें की अायु 21 से 40 वर्ष के बीच है। 

सवाल... दहेज लेने वालों के खिलाफ तो दर्ज  होते हैं केस, जबकि देने वालों पर नहीं होती कोई कार्रवाई

देश में जेंडर बायस्ड कानून

देश में जेंडर बायस्ड कानून बना है, जाे संविधान के माैलिक अधिकाराें के समानता के अधिकाराें का उल्लंघन है। महिलाअाें के लिए बनाए गए कानून में पत्नी अाैर बहू काे ही महिला माना गया है। सास, ननद, देवरानी, जेठानी आदि काे महिला ही नहीं माना गया। जब पत्नी अपनी शिकायत लेकर किसी भी फाेरम में जाती है ताे उसकी शिकायत तुरंत दर्ज हाेती है। जबकि अन्य रिश्ताें की महिलाअाें काे ताे महिला ही नहीं माना गया है।  अशाेक दशोरा, अध्यक्ष, पाैरुष संस्था
यहां किया जा सकता है संपर्क

अगर कोई ऐसे ही प्रताड़ित पुरुषों में शामिल है, तो वह पाैरूष संस्था के मोबाइल नंबर -9425400999 या पुरुष आयाेग समन्वय समिति की हेल्प लाइन नंबर और 18001216958 संस्था के टोल फ्री नंबर-08882498498 पर संपर्क कर सकता है।
 

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