मध्यप्रदेश / भोपाल लाया गया शहीद का तिरंगे में लिपटा पार्थिव शरीर; हजारों लोगों ने लगाए अमर रहे के नारे

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  • दो दिन पहले छत्तीसगढ़ के कांकेर में हुए नक्सली हमले में शहीद हो गए थे भोपाल के हरीशचंद्र पॉल 

Apr 06, 2019, 02:44 PM IST

भोपाल. छत्तीसगढ़ में नक्सली हमले में शहीद हुए भोपाल के हवलदार हरीशचंद्र पाल का अंतिम संस्कार पूरे राजकीय सम्मान के साथ कर दिया गया। उन्हें मुखाग्नि उनकी 10 साल की मासूम बेटी ने दी। हजारों लोगों ने नम आंखों से उन्हें अंतिम विदाई दी। इसके पहले शनिवार को उनका पार्थिव शरीर अमरकंटक एक्सप्रेस से भोपाल लाया गया। 

 

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स्टेशन अगवानी करने पहुंचे शहीद के छोटे भाई चंद्रपाल ने जैसे ही तिरंगे में लिपटे भाई का शव देखा फफक पड़ा। कहा मुझे अपने भाई पर गर्व है। रोते हुए चंद्रपाल को भाजपा के वरिष्ठ नेता बाबूलाल गौर ने ढांढ़स बंधाया।बता दें कि आखिरी बार शहीद हरीश चंद्र की अपने छोटे भाई चंद्रपाल से मोबाइल पर बात हुई थी। जब उसने मां के इलाज को लेकर भाई से चर्चा की थी। शहीद को श्रद्धांजलि देने के लिए भोपाल स्टेशन पर बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। लोग लगातार शहीद हरीश चंद्र अमर रहे के नारे लगाते रहे। 

 

अंतिम संस्कार में पहुंचे मंत्री पीसी शर्मा 
शहीद हरीशचंद्र पाल का पूरे राजकीय सम्मान से अंतिम संस्कार किया गया। इस दौरान भारत माता की जय और शहीद पाल अमर रहे के जयकारों से गूंज गया। उनका अंतिम संस्कार सुभाष नगर विश्राम घाट पर किया गया। जनसंपर्क मंत्री पीसी शर्मा ने शहीद पाल को श्रद्धासुमन अर्पित किया। 

 

धमतरी में नक्सली हमले में हो गए थे शहीद 
छत्तीसगढ़ के धमतरी के सल्लभाटा के जंगल मे नक्सलियों के हमले में श्री पाल शहीद हो गए थे। इसके पहले उनका पार्थिव शरीर उनके निवास लाया गया, जहां उन्हें मप्र सशस्त्र बल द्वारा उन्हें सलामी दी गई। राजकीय सम्मान के साथ अंत्येष्टि हुई। इस मौके पर पुलिस महानिदेशक वीके सिंह, आईजी, जयदीप प्रसाद, सीआरपीएफ के आईजी प्रमोद कुमार पांडे और कलेक्टर डॉ सुदामा खाड़े विश्रामघाट पर मौजूद रहे। इसके पहले शहीद पाल के निवास पर पहुंचकर पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, सांसद आलोक संजर, विधायक कृष्णा गौर आदि ने श्रद्धाजंलि दी।

 

भाई से कहा था मां का इलाज कराते रहना 
दो दिन पहले हलवदार हरीश चंद्र छत्तीसगढ़ के धमतरी में नक्सली हमले में शहीद हो गए थे। उन्होंने आखिरी बार जब घर फोन किया तो छोटे भाई से बातचीत हुई थी। इसमें उसने कहा था कि मां के इलाज में पैसों की कोई कमी नहीं आनी चाहिए। तुम पैसे भेज देना, मैं तुमको भेजता रहूंगा। दोनों भाई मां की आर्थिक मदद करते थे, जबकि सबसे बड़े भाई मां के साथ रहकर उनकी देखभाल करते हैं। मां को पिछले साल लकवा लगा था। हरीश चंद्र का शव शनिवार की सुबह अमरकंटक एक्सप्रेस से भोपाल लाया जाएगा।

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