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अपराध / 32 साल से जमें अधिकारी के पास आती थी शिकायतें; हर बार दी जाती थी क्लीनचिट



bhopal, mook vadhir rape case
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bhopal, mook vadhir rape case
  • सामाजिक न्याय विभाग के सहायक डायरेक्टर की भूमिका संदिग्ध
  • पुलिस का दावा जल्द हो सकती हैं कुछ और गिरफ्तारियां

Dainik Bhaskar

Sep 17, 2018, 09:40 AM IST

भोपाल। सांई विकलांग व अनाथ सेवा आश्रम एवं प्रशिक्षण छात्रावास बैरागढ़ के मामले में खुलासे होना शुरू हो गए हैं। यहां जितने मामले दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य के हुए हैं, सभी की शिकायत पीड़ित छात्र-छात्राओं ने सामाजिक न्याय विभाग से की थी। लेकिन हर बार छात्रावास संचालक को क्लीनचिट दे दी गई।

 

 

सामाजिक न्याय विभाग में सहायक डायरेक्टर अरुण जोशी के पास शिकायतें भेजी जाती थी। अरुण जोशी कागजी कार्रवाई पूरी करने के बाद जांच खत्म कर देता था। ये अफसर यहां 32 सालों से जमा हुआ है। इसका एक बार भी कहीं ट्रांसफर नहीं हुआ। यह संस्था 1995 से सामाजिक न्याय विभाग के पास रजिस्टर्ड है, लेकिन 2003 से यहां छात्र-छात्राएं रह रहे हैं।

 

आश्रम में आते थे संदिग्ध लोग

 
मूक बधिर छात्राओं के साथ दैहिक शोषण का मामले में चार लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है। जांच के दौरान पुलिस को पता चला कि हॉस्टल में मूक बधिर बच्चों के साथ बदसलूकी होती थी। पुलिस अफसरों का कहना है कि जल्द ही और गिरफ्तारियां की जा सकती हैं। मूक-बधिर बच्चों के साथ दुष्कर्म और अप्राकृतिक कृत्य की शिकायत के बाद वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों ने पूरे आश्रम का निरीक्षण किया। अधिकारियों ने आश्रम की केयर टेकर मीता मिश्रा से सघन पूछताछ की। पुलिस को पता चला था कि आश्रम में कई संदिग्ध लोग आते हैं। आश्रम में शाम 5 बजे के बाद किसी को प्रवेश करने नहीं दिया जाता था। लेकिन, कुछ लोगों का यहां 24 घंटे आना जाना था। पुलिस अब ऐसे लोगों की पहचान करने में जुटी है जो अकसर यहां आते थे।
 
सहायक डायरेक्टर के पास आती थीं शिकायतें

 

विभाग से जुड़े सूत्रों का कहना है कि सामाजिक न्याय विभाग संचालनालय में शिकायत देखने वाले सहायक डायरेक्टर अरुण जोशी 1986 में दैनिक वेतन भोगी भर्ती हुए। नियमित होकर असिस्टेंट डायरेक्टर बन गए। अरुण जोशी ही विभाग द्वारा संचालित आश्रम और हॉस्टलों से आने वाली शिकायतें देखते हैं। बताया जा रहा है कि अवधपुरी, होशंगाबाद और बैरागढ़ के हॉस्टलों में हो रहे मामलों की भी शिकायतें विभाग में कई बार आईं थीं। कभी फोन, कभी वाट्सएप कॉलिंग तो कभी किसी ने मौखिक रूप से शिकायत दर्ज कराई। 

 

एक महीने पहले हुआ था निरीक्षण

 

अवधपुरी मामला सामने आने के बाद हॉस्टल का निरीक्षण कराया। उस समय जांच टीम ने यहां सबकुछ ठीक होने की रिपोर्ट दी थी। शुक्रवार को मामला सामने आने के बाद प्रमुख सचिव ने पांच सदस्यीय टीम बनाकर हॉस्टल की जांच कराई। महिला अधिकारियों की टीम हॉस्टल में पहुंची तो छात्राएं रोने लगी। इसके बाद हॉस्टल संचालक पर मामला दर्ज कराया गया। 

 

दो ज्वाइंट डायरेक्टर को नोटिस, तीसरे के निलंबन का प्रस्ताव

 

आश्रम एवं छात्रावास की हर महीने सामाजिक न्याय विभाग के अफसरों द्वारा जांच की जाती थी। एक साल में 8 मर्तबा जांच की गई, लेकिन यौन शोषण का कोई मामला सामने नहीं आया। इसी महीने 1 सितंबर को भी हॉस्टल का निरीक्षण किया था। तब भी किसी स्टूडेंट ने कोई शिकायत नहीं की। ठीक 13 दिन बाद मूक-बधिर छात्राओं से रेप और छेड़खानी का आरोप संस्था प्रमुख पर लगने से हॉस्टल के निरीक्षणों की जांच रिपोर्ट पर सवाल उठने लगे हैं।

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