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मूकबधिर युवतियों से ज्यादती मामले में उज्जैन की अधीक्षिका बोलीं- मुझे न जांच मिली और न ही मैंने कोई क्लीन चिट दी

ना तो उन्हें कभी संबंधित हॉस्टल की जांच के निर्देश मिले ना ही उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की।

Dainik Bhaskar

Aug 12, 2018, 01:47 PM IST
bhopal news

भोपाल। भोपाल में मूक बधिर युवतियों के साथ ज्यादती व दुष्कर्म प्रकरण को लेकर उज्जैन के मालनवासा स्थिति शासकीय दृष्टि एवं बधितार्थ उच्चतर मावि की अधीक्षिका संध्या शर्मा ने सफाई दी कि उनका नाम इस मामले में बेवजह या गलत फहमी में चलते जोड़ा जा रहा है। ना तो उन्हें कभी संबंधित हॉस्टल की जांच के निर्देश मिले ना ही उन्होंने कोई रिपोर्ट प्रस्तुत की। इधर इन तमाम परिस्थितियों के बीच शनिवार को पुलिस-प्रशासन की टीम ने मालनवासा स्कूल में निरीक्षण कर युवतियों-स्टॉफ से पूछताछ की।

गौरतलब है कि भोपाल के अवधपुरी के कृतार्थ हॉस्टल के संचालक अश्वनी शर्मा पर मूकबधिर चार छात्राओ ने दुष्कर्म व ज्यादती के आरोप लगाए हैं। आईजी जयदीप प्रसाद ने बयान दिया है कि करीब छह महीने पूर्व सामाजिक न्याय विभाग की संध्या शर्मा से इस हॉस्टल में असामान्य गतिविधियां को लेकर शिकायत हुई थी, लेकिन उन्होंने आरोप की पुष्टि ना होने का हवाला देते हुए जांच खत्म कर दी थी।

उज्जैन में पदस्थ संध्या शर्मा से इस तरह क्लीन चीट देने पर पूछताछ की जाएगी। इधर जब इस मामले में संध्या शर्मा से चर्चा की गई तो उन्होंने कहा किया कि ना तो उन्होंने ऐसी कोई शिकायत की। ना ही उन्हें कोई जांच सौंपी गई, ना ही उन्होंने क्लीन चीट की रिपोर्ट प्रस्तुत की। वे स्वयं हैरत में हैं कि उनका नाम इस मामले से कैसे जोड़ा रहा है। वे मानती हैं कि गलत फहमी के चलते या फिर बेवजह उनका माना घटनाक्रम से जोड़ा गया हैं।

वे वरिष्ठों के माध्यम से मामले में अपना पक्ष रखेंगी। इधर सहायक अधीक्षक भू अभिलेख प्रीति चौहान, महिला थाना टीआई सुनीता कटारेे आदि ने शनिवार को मालनवासा के स्कूल में निरीक्षण के दौरान छात्राओं व स्टॉफ से बातें की। व्यवस्थाओं के बारे में जाना। अफसरों का दल रविवार को भी जिले के कुछ स्कूल व हॉस्टलों की जांच करेगा।

चार में से एक छात्रा उज्जैन में रहकर गई
वर्ष 2012 से यहां पदस्थ अधीक्षिका शर्मा ने यह जरूर बताया कि जिन चार छात्राओं को लेकर बाते हो रही हैं उनमें से एक उनके मालनवासा के हॉस्टल में रहकर गई हैं। एक योजना के तहत छात्राओ को आईटीआई का प्रशिक्षण दिया जाना था तो वर्ष 2016 में 10-12 छात्राओ को टीसी दिया था। इन्हीं में वह छात्रा शामिल थीं। लेकिन भोपाल जाने के बाद उनकी सुरक्षा की जवाबदारी वहां के प्रबंधन को निभाना चाहिए थी।

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