भोपाल / हर साल प्रॉपर्टी की कीमतों में बढ़ोतरी का असर, घटती रजिस्ट्रियों की संख्या, कम होती जा रही आय

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Jan 20, 2019, 12:04 PM IST

भोपाल। प्रॉपर्टी की कीमतों में हर साल हो रही बढ़ोतरी के चलते लगातार रजिस्ट्रियों की संख्या घटती जा रही है। इसका असर पंजीयन विभाग की आय पर भी दिखाई दे रहा है। बावजूद इसके अफसर गाइडलाइन में जमीनों की कीमतों को बढ़ाने पर अड़े हैं। इधर, नई कलेक्टर गाइडलाइन में प्रॉपर्टी कीमतें न बढ़ाई जाए। 


इसको लेकर पिछले दिनों जिला स्तरीय मू्ल्य विरोध समिति के सदस्य अपना विरोध पंजीयन विभाग के अफसरों के सामने दर्ज करा चुके हैं। वहीं, आम लोगों मांग है कि प्रॉपर्टी की कीमतों को सरकार को घटाना चाहिए। ताकि आम आदमी को मकान खरीदने में आसानी हो। रियल एस्टेट सेक्टर के विशेषज्ञों का मानना है कि प्रापर्टी के रेट कम करने से रजिस्ट्री से होने वाली 200 करोड़ की आमदनी दोगुनी हो सकती है। इसके लिए प्रापर्टी के रेट को वर्ष-2009-10 पर लाना पड़ेगा। 


इससे प्रापर्टी के बाजार में बूम आने के साथ रेडी-टू-पजेशन वाले करीब पांच हजार फ्लैट और एक हजार मकान बिकना शुरू हो जाएंगे। वर्ष-2010-11 से प्रापर्टी के बाजार में करीब तीन गुना तक बढ़ोतरी दर्ज की गई थी। यह बढ़ोतरी सिर्फ स्टांप ड्यूटी चुकाने में की गई है, जबकि प्रापर्टी के बाजार में आज भी तीन साल पुराने रेट के प्रापर्टी सेल की जा रही हैं। कई प्रापर्टी ऐसी हैं, जो गाइडलाइन के रेट से भी कम में बेचने के लिए लोग तैयार हैं। लेकिन गाइडलाइन में कीमत ज्यादा होने की वजह से प्रॉपर्टी बेचने में अड़चन आ रही है।

 
चेन्नई, गुड़गांव में प्रॉपर्टी कीमतें कम हुई हैं यहां पर घटाई जाए: क्रेडाई के प्रवक्ता मनोज मीक का कहना है कि जिस तरह से चेन्नई, गुड़गांव में प्रॉपर्टी कीमतें कम की गई हैं। यहां पर प्रॉपर्टी की कीमतों को घटाना चाहिए। ताकि आम आदमी आसानी से प्रॉपर्टी की खरीद-फरोख्त कर सके। गाइडलाइन तय करने से समय आज की दरों को तीन साल पहले के रेट्स पर लाना चाहिए, जिससे रियल स्टेट सेक्टर में उठाव आ सकता है।
 

8 साल पुराने रेट पर लाना होगा : रियल एस्टेट कारोबारियों ने बताया कि शहर में प्रापर्टी की गाइडलाइन को यदि 2009-10 के रेट पर लाते हैं तो प्रापर्टी का बाजार मूल्य 8 साल पुराने रेट में आ आएगा। जिससे प्रापर्टी खरीदने वाले प्लॉट, मकान, जमीन और फ्लैट में निवेश करना शुरू कर देंगे। प्रापर्टी की रजिस्ट्री बढ़ने से सरकार को दोगुनी आमदनी हो जाएगी। जबकि वर्तमान में कम रजिस्ट्री होने की वजह से यह आमदनी पिछले तीन सालों से नहीं बढ़ रही है। 

 
प्रापर्टी के बाजार में तीन साल से मंदी: नोटबंदी, जीएसटी और इनकम टैक्स की गाइडलाइन की वजह से प्रापर्टी के बाजार मूल्य में कमी आई है। साथ ही आयकर के नियमों के चलते भले ही जमीन की कीमत कम हो, लेकिन कलेक्टर गाइडलाइन की कीमत को आय मानने की वजह से लोग कम निवेश कर रहे हैं। जिससे प्रापर्टी के बाजार में पिछले तीन सालों से मंदी छाई हुई है। बिल्डर शहर में कहीं भी नए प्रोजेक्ट लाने से कतरा रहे हैं। इधर प्लॉट के साथ फ्लैट का कारोबार भी ठप्पा सा हो गया है।

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