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ई वे-बिल से बचने बनाए जा रहे 50 हजार से कम के बिल, क्या है व्यवस्था

राज्य सरकार ने जिलों के बीच की परिवहन व्यवस्था में इस फैसले को ज्यों का त्यों लागू कर दिया।

Dainik Bhaskar

May 02, 2018, 02:13 AM IST
Bills less than 50 thousand made to avoid e bill

भोपाल. अब मध्यप्रदेश में दो जिलों के बीच वस्तुओं के परिवहन पर ई वे-बिल लागू किया जा चुका है, लेकिन व्यवस्था को एकदम से क्रेश होने से बचाने के लिए जीएसटी काउंसिल ने 50 हजार रुपए से कम के माल का परिवहन करने वाले ट्रांसपोर्ट्स को इसके दायरे से बाहर रखा है।

राज्य सरकार ने जिलों के बीच की परिवहन व्यवस्था में इस फैसले को ज्यों का त्यों लागू कर दिया। अब व्यापारी ई वे-बिल से बचने के लिए बड़े माल की भी टुकड़ों में बिलिंग कर रहे हैं। यानी वे 1.2 लाख के बिल एक साथ बनाने के बजाय 40-40 हजार के तीन बिल बना रहे हैं। राज्य कर विभाग अभी यह तय नहीं कर पा रहा है कि इस तरह के मामलों में कैसे कार्रवाई करें। विशेषज्ञ कहते हैं कि इस सीमा के चलते ई वे-बिल व्यवस्था के अच्छे नतीजे प्रभावित हो रहे हैं, हालांकि यह यह राहत अस्थाई है।


पता चल जाए फिर भी कार्रवाई नहीं कर सकता विभाग: कई विभाग को यह पता है कि एक ही व्यापारी ने अलग-अलग इनवाइस जनरेट कर माल भेज रहा है। बिल न लेना पड़े इसलिए उसने छोटे-छोटे बिल बनवाए हैं, लेकिन मौजूदा नियमों के तहत वे कोई कार्रवाई नहीं कर सकते, क्योंकि उन्हीं इनवाइस पर ई वे-बिल की जरूरत है, जिसका टैक्स समेत मूल्य 50 हजार या फिर इससे ज्यादा होगा।

क्या है व्यवस्था

ई वे-बिल कानून के तहत अगर एक ट्रांसपोर्टर अलग-अलग व्यापारियों का माल एक साथ लाता है और उसकी संयुक्त लागत 50 हजार रुपए से ज्यादा की होती है तो पहले इसके लिए ट्रांसपोर्ट्स को खुद ई वे-बिल जनरेट करना था। फरवरी में ई वे-बिल लागू होने के बाद ज्यादातर ट्रांसपोर्ट्स यह बिल जनरेट नहीं कर सके। नतीजतन यह व्यवस्था क्रेश हो गई थी। इसलिए इस बार सरकार ने 50 हजार रुपए तक का माल भेजने वाले व्यापारी के लिए ई वे-बिल की अनिवार्यता नहीं रखी।

ट्रांसपोर्टर नहीं भर रहे फॉर्म बी
फॉर्म-ए जहां व्यापारियों को भरना है, वहीं फॉर्म-बी ट्रांसपोर्टर को। फॉर्म बी में वह वाहन क्रमांक और कंसाइनमेंट की जानकारी होती है। ऐसे में फॉर्म-बी न होने से माल के पकड़े जाने की स्थिति में व्यापारी को परेशानी उठानी पड़ सकती है। अगर प्राइवेट बस से माल ला रहे हैं तो व्यापारी की जिम्मेदारी होगी कि वह ई वे-बिल ले। पकड़े जाने की स्थिति में बस संचालक से कोई बिल नहीं मांगा जाएगा।

टैक्स विशेषज्ञ मुकुल शर्मा ने बताया कि शहर में ज्यादातर व्यापारी मिक्स माल बुलाते हैं। यानी वे एक ही तरह का माल न बुलाकर कई तरह के माल एक साथ बुलाते हैं। ऐसे में उनके पास अलग-अलग इनवाइस जनरेट करने का विकल्प है। वे इसका उपयोग कर रहे हैं।

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