मध्य प्रदेश / रो पड़े सरताज सिंह, कहा- घुट-घुटकर मरने वालों में से नहीं, लडूंगा तो मैदान में, मरूंगा तो मैदान में



कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे सरताज सिंह। कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे सरताज सिंह।
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कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे सरताज सिंह।कांग्रेस में शामिल होने के बाद कार्यकर्ताओं के बीच पहुंचे सरताज सिंह।

Dainik Bhaskar

Nov 08, 2018, 04:27 PM IST

होशंगाबाद.   भाजपा से टिकट नहीं मिलने से नाराज वरिष्ठ नेता सरताज सिंह गुरुवार को कांग्रेस में शामिल हो गए। उनके इस फैसले के कुछ देर बात ही कांग्रेस ने अपनी पांचवीं सूची में उन्हें होशंगाबाद सीट से टिकट देने का ऐलान किया। इससे पहले वे अपने क्षेत्र सिवनी-मालवा पहुंचे और समर्थकों से मिले। इस दौरान सरताज भावुक हो गए। 78 साल के सरताज ने कहा- "मैं घर में बैठकर घुट-घुटकर मरने वालों में से नहीं हूं। लडूंगा तो मैदान में, मरूंगा तो मैदान-ए-जंग में।" भाजपा अब तक 224 उम्मीदवारों का नाम तय कर चुकी है। 

 

 

 

 

पार्टी छोड़ने की खबरों के बीच सरताज ने नामांकन पत्र खरीद लिया था। यह खबर भी आई कि कांग्रेस ने नामांकन पत्र दाखिल करने के लिए होशंगाबाद में उनका बैंक खाता भी खुलवा दिया है। इस दौरान वे लगातार कांग्रेस के बड़े नेताओं के संपर्क में रहे। भाजपा की तीसरी सूची में भी सिवनी-मालवा सीट को होल्ड किया गया। होशंगाबाद सीट पर अब उनका मुकाबला भाजपा प्रत्याशी और विधानसभा अध्‍यक्ष सीताशरण शर्मा से होगा।

 

कौन हैं सरताज सिंह :  सरताज का जन्म 26 मई 1940 को उज्जैन जिले के बड़नगर में हुआ। उन्होंने दिल्ली विश्वविद्यालय से 1960 में स्नातक किया। 1962 में हरिविष्णु कामथ के सम्पर्क में आए और राजनीति में सक्रिय हुए। 1970 के इटारसी नगर पालिका चुनाव में एल्डरमेन चुने गए। 1971 में 6 माह तक नगर पालिका के कार्यकारी अध्यक्ष रहे। 1975 में नगर पालिका अध्यक्ष चुने गए।

sartaj singh


कांग्रेस के बड़े नेताओं को हराया:  सरताज ने लोकसभा की होशंगाबाद सीट से लगातार तीन (1989, 1991 और 1996) बार कांग्रेस के रामेश्वर नीखरा को हराया। 1998 के लोकसभा चुनाव में वे अर्जुन सिंह को भी हराने में कामयाब रहे।। वे अटल बिहारी वाजपेयी की 13 दिन की सरकार में कैबिनेट मंत्री भी रहे। उन्होंने 2008 विधानसभा चुनाव में सिवनी मालवा सीट पर हजारी लाल रघुवंशी को हराया। 2013 में फिर इसी सीट से चुनाव जीता और मंत्री बने। सरताज सिंह मध्य प्रदेश सरकार में पीडब्ल्यूडी मंत्री थे, लेकिन बढ़ती उम्र का हवाला देकर उन्हें पद से हटा दिया गया था।

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