मप्र / हिंदी विवि से आए हो, थीसिस अंग्रेजी में नहीं चलेगी, हिंदी में लिखकर लाओ



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Dainik Bhaskar

Jul 14, 2019, 01:48 PM IST

भोपाल। बरकतउल्ला यूनिवर्सिटी में अटल बिहारी वाजपेयी हिंदी विवि से ट्रांसफर होकर आए पीएचडी के शोधार्थियों के सामने भाषा की परेशानी सामने आ रही है। दरअसल, साइंस स्ट्रीम के कुछ शोधार्थी ने अपनी थीसिस अंग्रेजी में लिखी है, लेकिन बीयू ने अंग्रेजी में लिखी थीसिस को यह कहकर शोधार्थियों को लौटा दिया है कि थीसिस हिंदी में लिखकर लाओ।

 

 दरअसल, हिंदी विवि से ट्रांसफर होकर आए शोधार्थी यह मान रहे थे कि उन पर भी बीयू का आर्डिनेंस लागू होगा और डिग्री भी बीयू की ही मिलेगी, क्योंकि बीयू अंग्रेजी में भी थीसिस लिखने की स्वतंत्रता देता है। इधर, बीयू के अधिकारियों का कहना है कि इन शोधार्थियों का हिंदी विवि के पीएचडी अध्यादेश के अनुसार रजिस्ट्रेशन हुआ है। 

 

इसके अनुसार इन्हें पीएचडी हिंदी में ही करना है। वहीं इनकी डिपार्टमेंटल रिसर्च कमेटी (डीआर) भी हिंदी में हुई है। इसके अलावा इन्होंने सिनोप्सिस भी हिंदी में जमा की थी, इसलिए थीसिस भी हिंदी में मांगी गई है। इसके चलते जिन शोधार्थियों ने अंग्रेजी में थीसिस लिखी है, उन्हें दोबारा से हिंदी में लिखनी पड़ रही है। वहीं, इनके पीएचडी गाइड भी बीयू के अधिकारियों द्वारा दिए गए निर्देशों का पालन करने को कह दिया है। 

 

2016 में हुआ था ट्रांसफर करने का निर्णय 
यूनिवर्सिटी ग्रांट कमिशन (यूजीसी) के अनुसार कोई भी यूनिवर्सिटी तभी पीएचडी करा सकती है, जब उसके पास अपनी रेगुलर फैकल्टी हो, लेकिन हिंदी विवि ने रेगुलर फैकल्टी नहीं होने के बाद भी विभिन्न कोर्स में पीएचडी में एडमिशन ले लिए। विवाद होने पर 2016 में राज्यपाल की अध्यक्षता वाली समन्वय समिति में हिंदी विवि में रजिस्टर्ड शोधार्थियों को अलग-अलग यूनिवर्सिटी में ट्रांसफर कराने की सहमति बनी। इसके चलते बीयू में करीब 100 शोधार्थी आए। 

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