शुभ योग / बुद्ध पूर्णिमा 18 मई को, इस बार सूर्य-बृहस्पति के आमने-सामने होने से बन रहा समसप्तक राजयोग

Dainik Bhaskar

May 16, 2019, 04:30 PM IST



Buddha purnima 2019
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Buddha purnima 2019

  • बुद्ध महाविहार में मुख्य आयोजन, देश-विदेश के धर्म उपदेशक होंगे शामिल 

भोपाल। बुद्ध पूर्णिमा 18 मई को मनाई जाएगी। इस दिन शुभ कार्यों के स्वामी देव गुरु बृहस्पति व नवग्रहों के राजा सूर्यदेव आमने-सामने रहेंगे। इस कारण सूर्य व गुरु का समसप्तक राजयोग बनेगा, जो कि सभी कार्यों में स्थायित्व के साथ उन्नति प्रगति दायक रहेगा। 


इधर, बुद्ध पूर्णिमा पर शहर भर में कई कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। बुद्ध महाविहार में होने वाले आयोजन में देश से ही नहीं, विदेश से भी धर्म उपदेशक पहुंचेंगे। इसकी तैयारियां पूरी हो गई हैं। इस अवसर पर आध्यात्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किए जाएंगे। 


वैशाख पूर्णिमा 18 मई को पड़ रही है। हिंदू धर्म के अनुयायी इसे सत्य विनायक पूर्णिमा के रुप में भी मनाते हैं। वैशाख पूर्णिमा पर भगवान बुद्ध का अवतार होने पर बौद्ध अनुयायी इसे बुद्ध पूर्णिमा के रूप में मनाते हैं। इस पूर्णिमा पर कई तरह के योग बन रहे हैं, जो शुभ फलदायी और मंगलकारी हैं। ज्योतिषाचार्य पंडित धर्मेंद्र शास्त्री ने बताया कि इस पूर्णिमा पर शुभ कार्यों के स्वामी देव गुरु बृहस्पति व नवग्रहों के राजा सूर्यदेव आमने-सामने रहेंगे। इससे सूर्य व गुरु का समसप्तक राजयोग बन रहा है। यह योग लोगों के जीवन में स्थायित्व के साथ उन्नति प्रगति दायक रहेगा। इस दिन भूमि, भवन, वाहन खरीदना, पदभार ग्रहण करना और नए व्यापार व्यवसाय का शुभारंभ करना बहुत ही अधिक शुभ फलदायी और मंगलकारी होगा। 


धम्मदेशना और नाटक का होगा मंचन : चूना भट्टी स्थित बुद्ध महाविहार के भंते शाक्यपुत्र सागर ने बताया कि बुद्ध पूर्णिमा पर दि बुद्धभूमि धम्मदूत संघ के द्वारा धम्मदेशना आयोजित किया जाएगा। इस अवसर पर श्रीलंका, ताइवान, म्यांमार, वर्धा, पंजाब सहित अन्य जगहों से भंते व भिक्षुसंघ पहुंचेंगे, जो भगवान बुद्ध के बताए मार्गों पर धम्मदेशना देंगे। भगवान बुद्ध के जीवन पर आधारित नाटक का मंचन भी किया जाएगा। कार्यक्रम 17 मई से शुरू होगा और भगवान बुद्ध के प्रकटोत्सव यानी 18 मई को समाप्त होगा। 

 

भगवान लक्ष्मीनारायण व धर्मराज की पूजा : मां चामुंडा दरबार के पंडित रामजीवन दुबे गुरुजी ने बताया कि वैशाख पूर्णिमा पर भगवान लक्ष्मीनारायण के साथ धर्मराज की पूजा करने का विधान है, इसलिए इस व्रत के प्रभाव से अकाल मृत्यु का भय नहीं रहता है। ऐसी मान्यता है कि भगवान श्री कृष्ण के बचपन के साथी सुदामा जब द्वारिका उनके पास मिलने पहुंचे थे, तो भगवान श्री कृष्ण ने उन्हें वैशाख पूर्णिमा यानि सत्य विनायक पूर्णिमा व्रत का विधान बताया। 

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