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बडिंग इंजीनियर्स ने अल्कोहल और फाॅग सेंसर वाले कार्ट बनाए

गांधी नगर स्थित निजी यूनिवर्सिटी कैंपस में शुक्रवार से जोश और जुनून का रोमांच शुरू हुआ। जहां बडिंग इंजीनियर्स ने...

Dainik Bhaskar

Sep 11, 2018, 02:12 AM IST
Bhopal - बडिंग इंजीनियर्स ने अल्कोहल और फाॅग सेंसर वाले कार्ट बनाए
गांधी नगर स्थित निजी यूनिवर्सिटी कैंपस में शुक्रवार से जोश और जुनून का रोमांच शुरू हुआ। जहां बडिंग इंजीनियर्स ने अपनी क्रिएटिविटी दिखाते हुए रेसिंग कार्ट्स तैयार की। कोशी मोटर्स की ओर से आयोजित इस गो कार्ट चैंपियनशिप में देश के विभिन्न कॉलेजों की कुल 35 टीमें शामिल हुईं, इसमें भोपाल की 10 कॉलेजों के बडिंग इंजीनियर्स शामिल हुए। चार दिवसीय इस चैंपियनशिप के पहले दिन सोमवार को स्टूडेंट्स ने कार्ट की असेंबिलिंग की और उसे फाइनल टच दिया। रेसिंग चैंपियनशिप के दूसरे दिन मंगलवार को टेक्निकल ब्रेक और स्पीड का इंस्पेक्शन होगा। टेक्निकल राउंड पूरे होने के बाद क्वालीफाई की गई टीम तीसरे दिन स्किट टेस्ट और ऑटोक्रॉस राउंड में जाएगी। चैंपियनशिप के लिए खासतौर पर 1.5 किमी का जिग-जैग ट्रेक तैयार किया गया है।

वेटलॉस पर किया गया फोकस

टीम: वेलोर रेसिंग, भोपाल

ग्रुप मेंबर : 25,

ग्रुप लीडर : मो. नाजिश

स्पेसिफिकेशन : माे. नाजिश ने बताया कि कार्ट में हमने 135 सीसी बाइक इंजन का प्रयोग किया गया है, साथ ही इसमें स्लाइडिंग पियर को लगाया है। स्पीड के दौरान ड्राइवर को किसी प्रकार की समस्या न हो, इसके लिए कार्ट के निर्माण में वेट लॉस पर फोकस किया है। कार्ट में स्लाइडिंग पियर का प्रयोग इसलिए किया गया है, ताकि फोर्स कम लगाना पड़े। कार्ट का वजन 120 किग्रा है। जिसकी लागत 1 लाख 35 हजार रुपए है।

चार डिफरेंट सेंसर्स का उपयोग

टीम : जेईसी रेसर्स, जबलपुर लीडर : उत्सव सोनी

स्पेसिफिकेशन : 135 सीसी इंजन का उपयोग करते हुए कार्ट्स में चार अलग-अलग इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस लगाए गए हैं, इसमें ड्रिंकिंग ड्राइव को रोकने के लिए अल्कोहल सेंसर्स यूज किया गया है। दूसरा सेंसर वाइब्रेशन है, गाड़ी में सस्पेंशन न होने से ड्राइवर को किसी प्रकार की परेशानी न हो, इसके लिए यह सेंसर लगाया गया है। तीसरा सेंसर फॉग से जुड़ा है। जिसमें कार्ट के अागे और पीछे अल्ट्रासोनिक साउंड लगे हुए हैं, रोड पर एक मात्रा से अधिक फॉग होने पर सिग्नल ड्राइवर को मिल जाएगा।

क्या है गो कार्ट

गो कार्ट एक व्हीकल रेसिंग है। इसे फॉर्मूला वन का छोटा रूप भी कहा जाता है। ऑन रोड रेसिंग लवर्स इसके जरिए रेसिंग हॉबी को पूरी कर सकते हैं। इस तरह का डिजाइन आने के बाद अब इसे कार में बूट स्पेस में ही कैरी किया जा सकेगा।

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