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लिखकर भूल जाते हैं ये प्रोफेसर, 9 साल बाद ऐसे मिले फैमिली से, गजनी जैसी है कहानी

DainikBhaskar.com | Last Modified - Dec 13, 2017, 04:15 PM IST

पुडुचेरी के रहने वाले प्रोफेसर के वैद्यनाथन को बैतूल लेने पहुंची उनकी फैमिली, प्रशासन ने दिया साथ।
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    परिवार और एनजीओ के सदस्यों के साथ वैद्यनाथन।


    भोपाल।वह कागजों में अभी कुछ लिखेंगे और अगले ही पल भूल जाएंगे। यह कहानी आमिर खान की फिल्म गजनी से मिलती-जुलती लग सकती है। परंतु यह सच्चाई है। बैतूल के वृद्धाश्रम में रह रहे प्रोफेसर वैद्यनाथन, जो एक खास बीमारी की वजह से शार्ट टर्म मेमोरी लास से पीडि़त हैं। वह 9 साल पहले पुडुचेरी से गायब हो गए थे। पेशे से प्रोफेसर हैं और लिखने-पढ़ने का इसी पेशे ने उन्हें फैमिली से मिलाने में मददगार बना। बैतूल जिले से करीब 1457 किमी दूर से आई उनकी पत्नी राजलक्ष्मी और फैमिली उन्हें लेकर घर लौट गई। जब वह जाने लगे तो हर एक की आंखें नम थीं।


    ऐसी है इनकी कहानी
    - एक ऐसी बीमारी जिससे पीड़ित शख्स पल चीजों, बातों को भूल जाता है और पल उसे बाते याद आ जाती हैं। पुडुचेरी निवासी प्रोफेसर के. वैद्यनाथन। वह 5 साल से बैतूल के मातोश्री वृद्धाश्रम में रहते हैं। वह प्रोफेसर वैद्यनाथन बैतूल कैसे पहुंचे। किसी को नहीं पता।

    - सोमवार का दिन प्रोफेसर वैद्यनाथन के लिए खास था, जब बैतूल से 1457 किमी दूर पुडुचेरी से उन्हें घर वापस ले जाने उनकी पत्नी, भाई और पड़ोसी बैतूल पहुंचे। प्रोफेसर का चेहरा खुशी से खिल गया। उनके छोटे भाई के. मुत्तुकुमार स्वामी बताते है कि गत शुक्रवार जबसे उन्हें यह जानकारी मिली है। वे इस खुशी को बयान नहीं कर पा रहे थे।

    2008 में लापता हो गए थे
    -
    पुडुचेरी में टेक्सटाइल टेक्नोलॉजी के लेक्चरर के. वैद्यनाथन लंबे समय से खास रोग से ग्रस्त है। 26 फरवरी 2008 को वे अपने शहर से लापता हो गए। घर वालो ने हर जगह ढूंढा लेकिन तलाश में कामयाबी नहीं मिली। पुलिस की मदद ली। मिसिंग पोर्टल में सूचना दी, अखबारों में इश्तहार दिए। कोई फायदा नहीं हुआ।

    - 2012 में वे बैतूल के एक मंदिर में श्रद्धालु़ओं को मिले तो उन्हें लोग मातोश्री वृद्धाश्रम छोड़ गए। बस तब से बीते पांच सालों में वैद्यनाथन का यही घर बन गया। यहीं उन्हें नया नाम मिला गजनी।

    लिखते-पढ़ते एक दिन लिखा घर का एड्रेस
    - यहां उनका एक शौक उनके काम आ गया। वे डायरी लिखते थे और यहां वे कोरे कागजों पर कुछ इबारतें लिखते रहते थे। उन्होंने कई बार कई पते ठिकाने लिखे जिससे उनके परिजनों को ढूंढने की कोशिश की गई लेकिन कामयाबी नहीं मिली।

    - तलाश के सारे जतन कर चुके आश्रम वालो ने हारकर अपने गजनी के लिए सीएम हेल्प लाइन के शिकायत पोर्टल 181 पर इसकी शिकायत भेज दी। इसका असर यह हुआ कि भोपाल से लेकर बैतूल तक के अफसरों के फोन घनघनाने लगे।

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    पत्नी राज लक्ष्मी के साथ वैद्यनाथन।
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    9 साल बाद परिवार से मिले वैद्यनाथन।
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    परिवार और एनजीओ के सदस्यों के साथ वैद्यनाथन।
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    वैद्यनाथन की पत्नी राज लक्ष्मी।
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    डॉक्टर्स ने किया वैद्यनाथन का चेकअप।
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    वैद्यनाथन पिछले 5 साल से बैतूल के मातोश्री वृद्धाश्रम में रह रहे थे।
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    जिला पंचायत सीईओ शीला दाहिमा।
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Web Title: 9 Years Later, Like The Professor From The Family, Like Ghajini, His Story
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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