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पीछे से बांध दिए थे हाथ, तीन घंटे तक करते रहे रेप

पीछे से बांध दिए थे हाथ, तीन घंटे तक करते रहे रेप

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 01:24 PM IST
आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलि आरोपियों को कोर्ट ले जाती पुलि

भोपाल। पीएससी की तैयारी कर रही छात्रा से गैंगरेप के बहुचर्चित मामले में विशेष न्यायाधीश सविता दुबे शनिवार को फैसला सुनाएंगी। इस केस के सभी चार आरोपी कोर्ट पहुंच चुके हैं। इन्हें कोर्ट की बैरक रखा गया है।

- इसके साथ ही पीडि़ता भी कोर्ट में कड़ी सुरक्षा के बीच मौजूद है। शनिवार को केस के 53 दिन पूरे हो गए हैं। इस पर जल्द ही फैसला आ सकता है।

- मामले की गंभीरता और आरोपियों पर लगाई गई धाराओं को देखते हुए सरकारी वकील रीना वर्मा और पीएन सिंह ने कोर्ट से उम्रकैद की अपील की है।

- आरोपियों ने 31 अक्टूबर की शाम को विदिशा निवासी छात्रा के साथ हबीबगंज रेलवे ट्रैक के पास पुलिया के नीचे गैंगरेप और लूटपाट की घटना को अंजाम दिया था।


100 मीटर पर आरपीएफ थाना, वहीं चला 3 घंटे रेप
31 अक्टूबर की रात गैंगरेप का शिकार हुई पीड़िता ने बेहोश होने तक चारों आरोपियों से संघर्ष किया था। बदमाशों ने उसके हाथ बांध दिए थे। इसके बावजूद 19 साल की लड़की ने
हिम्मत नहीं हारी और दरिंदों से लड़ती रही। पीड़िता ने शुक्रवार को पुलिस के सामने आपबीती बयां की। जहां चारों आरोपी गैंगरेप को अंजाम दे रहे थे, उस घटनास्थल से रेलवे पुलिस थाने की दूरी महज 100 मीटर की थी। इस दूरी को तय करने में दो मिनट से भी कम का समय लगता है। सवाल ये है कि दरिंदे तीन घंटे तक स्टूडेंट के साथ गैंगरेप करते रहे और थाने की पुलिस को भनक नहीं लग सकी।


पुलिस की सीमा विवाद में उलझी रही विक्टिम

- पिता ने बताया, "मंगलवार (31 अक्टूबर) रात बेटी का अनजान नंबर से फोन आया। उसकी आवाज भी नहीं निकल रही थी। उसने बताया मैं हबीबगंज आरपीएफ ऑफिस में हूं।
पहुंचा तो बेटी सहमी हुई खड़ी हुई थी। उसकी हालत देख उसे घर ले आया।"
- "लड़खड़ाते शब्दों में उसने घटना के बारे में बताया। बेटी को दिलासा दी और बुधवार सुबह साढ़े ९ बजे बजे उसे पत्नी के साथ लेकर एमपी नगर पुलिस स्टेशन पहुंचे। ड्यूटी पर
तैनात एसआई आरएम टेकाम मिले। हमारी पूरी बात भी नहीं सुनी और हबीबगंज थाने जाने को कह दिया। बेटी और पत्नी को लेकर हबीबगंज थाने पहुंचा।"
- "हमारी बात सुनते ही हबीबगंज टीआई हमारे साथ दोपहर करीब साढ़े 11 बजे घटनास्थल पर आ गए। उन्होंने जीआरपी हबीबगंज को फोन किया, लेकिन वहां से कोई भी स्टाफ
आने को तैयार नहीं था। इसी बीच हमने ही दो आरोपियों को पकड़कर पुलिस के हवाले कर दिया।"
- "काफी देर बाद जीआरपी का एक एसआई वहां आया। वह भी कुछ सुनने को तैयार नहीं था। उसके काफी देर बाद टीआई जीआरपी हबीबगंज मोहित सक्सेना आए। उनके बीच सीमा
को लेकर विवाद चलता रहा। कोई भी इसे अपने क्षेत्र में मानने को तैयार नहीं था।"
- "बाद में हबीबगंज टीआई के मामला दर्ज करने की बात कहने पर रात साढ़े 7 बजे जीआरपी हबीबगंज ने हमारी शिकायत पर अज्ञात चार आरोपियों पर मामला दर्ज किया।"
- "हम अपने आप से तो लड़ ही रहे हैं, लेकिन सिस्टम ने हमें तोड़ कर रख दिया। 11 घंटे तक हमें सीमा विवाद में उलझाए रखा।"
- "अब बस हमें बेटी का ख्याल रखना है। उसका इलाज चल रहा है। दो दिन बाद वह कुछ ठीक से बोल पा रही है। उसने बस इतना कहा- पापा उन्हें सजा मिलनी चाहिए।"

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