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चीफ मैनेजर की बैंक जॉब छोड़कर खेती कर रहा है ये शख्स, कमा रहा है २२ लाख सालाना

चीफ मैनेजर की बैंक जॉब छोड़कर खेती कर रहा है ये शख्स, कमा रहा है २२ लाख सालाना

Danik Bhaskar | Jan 19, 2018, 08:09 PM IST
प्रतीक शर्मा ने कुछ साल पहले ह प्रतीक शर्मा ने कुछ साल पहले ह

भोपाल। कुछ साल पहले जब प्रतीक शर्मा ने मुंबई में बैंक की शानदार नौकरी छोड़कर खेती करने का फैसला किया तो उन्हें भी नहीं सोचा होगा कि खेती के उनके बिजनेस मॉडल को भारतीय प्रबंध संस्थान कोलकाता का सपोर्ट मिल जाएगा। परंतु ये सच है, प्रतीक शर्मा के खेती के बिजनेस मॉडल को आईआईएम-सी ने चुना है।

-"ग्रीन एंड ग्रेन्स" नाम के इस बिजनेस मॉडल के तहत प्रतीक शर्मा ने 25 किसानों को जोड़ा है।

- इसमें यह सब्जियां, फल और अनाज की खेती करते हैं। इसके बाद इसे बाजार तक पहुंचाया।

- पहले ही साल में प्रतीक और उनकी कम्युनिटी ने 22 लाख रुपए का टर्नओवर किया है।

एक साल पहले छोड़ी जॉब

-मुंबई में कोटक महिंद्रा बैंक में चीफ मैनेजर की शानदार और सुरक्षित नौकरी को नवंबर 2017 में छोड़ दिया। इसके बाद भोपाल लौटे प्रतीक शर्मा और उनकी पत्नी प्रतीक्षा शर्मा ने खेती करने का रास्ता चुना। उन्होंने खेती का बिजनेस मॉडल बनाया और इसे एक स्टार्टअप के रूप में शुरू किया।

-पिछले साल प्रतीक ने आईआईएम कोलकाता में अपने स्टार्टअप, खेती का बिजनेस मॉडल का प्रेजेंटेशन दिया था। आईआईएम कोलकाता ने उनके स्टार्टअप को अपने वैल्युएबल इन्क्यूबेशन प्रोग्राम इन्वेंट के लिए चुना है।

हर कोई छोड़ रहा है गांव ...

प्रतीक शर्मा कहते हैं कि अपने गांव 20 साल बाद लौटा तो देखा कि हर कोई गांव से जा रहा है, लेकिन लौटकर कोई नहीं आता है। जहां एक तरफ शहर लगातार विकास कर रहे हैं, वहीं गांव वैसे ही हैं, जैसे 20 साल पहले थे।

सीधे बाजार तक पहुंचाया माल

- प्रतीक कहते हैं कि उन्होंने फैसला किया कि हम यहीं पर खेती करेंगे। खेती को आर्गेनिेक तरीके से करने का फैसला किया। इसमें स्थानीय खाद मिलाई गई।

-बिना किसी बिचौलिए के हमारा सामान सीधे बाजार में पहुंच रहा है। जितना पहले कमा लेते थे, खेती में उसका दोगुना कमा रहे हैं किसान।

आईआईएम को पसंद आया मॉडल

-प्रतीक शर्मा के फार्मिंग स्टार्टअप को इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट, कोलकाता को तीन साल के बिजनेस मॉडल को सपोर्ट किया है। आईआईएम ने माना है कि प्रतीक का खेती का ये मॉडल व्यापार और नवाचार पर आधारित लाभ वाला है। ये निवेशकों से अधिक धन जुटाने में सक्षम है।

इसलिए चुना गया IIM प्रोजेक्ट

-असल में, यह कार्यक्रम भारत सरकार, आईआईएम-सी और डीएफआईडी फाउंडेशन, यूके की संयुक्त पहल है। इस मॉडल में न केवल बीज की पूंजी प्राप्त करेंगे, 20 साल के अनुभव के साथ पूर्व छात्रों को भी जोड़कर काम करेंगे।

आईआईएम के सपोर्ट से ये फायदा

बीज धन: 18-24 महीनों के समय में 25 लाख तक का समर्थन।
समर्पित परामर्श: परामर्शदाता पूल में आईआईएम-सी के पूर्व छात्र, संकाय, उद्यमियों और निवेशकों को विभिन्न डोमेन में विशेषज्ञता प्राप्त होगी।
प्लग-एंड-प्ले कार्यक्षेत्र: कंप्यूटर, इंटरनेट, मुद्रण और कॉन्फ्रेंसिंग सुविधा के साथ।
समर्थन सेवाएं: तरजीही और निचले दर पर सक्षम सेवा प्रदाताओं द्वारा प्रदान किए गए कानूनी, सचिवालय, इन्फोटेक आधारभूत समर्थन।

ताकि आने वाली पीढ़ी चुन सके खेती
-कृषि और उसके संबंधित क्षेत्रों में भारत में ग्रामीण आबादी में 70 फीसदी से ज्यादा आबादी खेती पर निर्भर है, लेकिन लोग तेजी से खेती छोड़ रहे हैं। हम ऐसा मॉडल बना रहे हैं, जिससे आने वाली पीढ़ी खेती को आराम से चुन सके।- प्रतीक शर्मा, उद्यमी