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बेटा बन बेटियों ने निभाया फर्ज, पिता को दी मुखाग्नि

बेटा बन बेटियों ने निभाया फर्ज, पिता को दी मुखाग्नि

Sumit Pandey | Last Modified - Jan 18, 2018, 12:22 PM IST

भोपाल।शमशान पर उस समय लोगों के आंसू छलक पड़े, जब एक बेटी ने श्मशान में रूढ़ीवादी परंपराओं के बंधन को तोड़ते हुए अपने पिता का अंतिम संस्कार किया। उसने बेटा बनकर हर फर्ज को पूरा किया, जिसकी हर किसी ने तारीफ की। अंतिम संस्कार में वह रोती रही, पापा को याद करती रही, लेकिन बेटे की कमी को हर तरह से पूरा किया।
-अंतिम संस्कार में पहुंचे लोगों ने कहा कि एक पिता के लिए अंतिम विदाई इससे अच्छी और क्या हो सकती है, जब पुरानी परंपरा को तोड़ते हुए बेटियों ने बेटे का फर्ज निभाया।

-मृतक राधेश्याम सोहानी 70 वर्ष भेल के पूर्व कर्मचारी थे। उनकी 4 बेटियां है। कोई बेटा नहीं था। -राधेश्याम की मृत्यु के बाद उनकी चारो बेटियों ने हिन्दू रीति-रिवाज के साथ अंतिम संस्कार के सारे फर्ज पूरे किए।

चार बहनें, बेटे की तरह की गई परवरिश

-सुनीता का कहना है कि उसके पिता ने उनको बेटों की तरह पाला है, वो चार बहनें ही हैं, उनका कोई भाई नहीं है, उसके पिता ने कभी चारो बहनों में किसी प्रकार का भेद-भाव नहीं किया, सभी को अच्छी शिक्षा दी। सभी बहनों का अच्छे घरों में विवाह किया।

बेटियां क्यों नहीं...

-उन्होंने कहा कि आज जमाना बदल गया है, पुरानी कुरीतियां रही हैं कि दाह संस्कार का काम केवल बेटे ही कर सकते हैं। लेकिन अब ऐसा नहीं है, जमाना बदल रहा है।

-जो काम बेटे कर सकते हैं, उस काम को बेटियां भी कर सकती हैं। आज महिलाओं का जमाना है, महिलाएं हर क्षेत्र में आगे बढ़ रही हैं।

-हमने अपने पिता का अंतिम संस्कार किया है और हम वह सभी कार्य करेंगे, जो एक बेटे को करनी चाहिए।

-भेल के पूर्व कर्मचारी राधेश्याम भोपाल के लवकुश नगर में रहते थे, जिनका भोपाल के ही कस्तूरबा अस्पताल में इलाज के दौरान निधन हो गया।

-इसके बाद सभी रिश्तेदारों ने एक राय होकर बेटी को ही अंतिम संस्कार के लिए आगे किया और उसे ढांढ़स बंधाया।

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