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ष्टरू की ड्रीम योजना में फर्जीवाड़ा, पास कर दिए ६.२ करोड़ के १८ लोन

ष्टरू की ड्रीम योजना में फर्जीवाड़ा, पास कर दिए ६.२ करोड़ के १८ लोन

Sumit Pandey | Last Modified - Dec 03, 2017, 06:51 PM IST

भोपाल।प्रधानमंत्री एम्प्लायमेंट जेनरेशन प्रोग्राम और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत लोन देने में 6.20 करोड़ रुपए का घोटाला सामने आया है। बैंक ने सीनियर मैनेजर ने फर्म संचालकों को षडयंत्र पूर्वक 4 महीने के अंदर 18 लोन स्वीकृत किए। इस मामले में सीबीआई ने बैंक के सीनियर ब्रांच मैनेजर और तीन फर्मों के संचालक समेत अन्य के खिलाफ एफआईआर दर्ज की है।

पीएनबी के सीनियर मैनेजर की धांधली

जानकारी के मुताबिक पंजाब नेशनल बैंक (पीएनबी) की आष्टा शाखा के सीनियर मैनेजर एमपी करारी ने पद का दुरुपयोग करते हुए आष्टा के मनोज परमार, मनोज परमार की पत्नी नेहा परमार और हितेंद्र पंवार को 6.20 करोड़ के 18 लोन स्वीकृत किए। लोन फर्जी दस्तावेजों पर लिए गए थे। यह लोन मार्च 2016 से जुलाई 2016 के बीच किए गए थे। इन लोगों ने लोन का पैसा 14 खातों में पहुंचाया। इसमें प्रधानमंत्री एम्प्लायमेंट जेनरेशन प्रोग्राम और मुख्यमंत्री युवा उद्यमी योजना के तहत भी लोन दिए गए थे। लोन में अनुदान राशि का भी लाभ लिया गया था।

डेयरी व कपड़ा फैक्ट्री लगाने के नाम पर दिया लोन

सीनियर मैनेजर ने इन तीनों आरोपियों की मदद से डेयरी लगाने, मार्बल स्टील, गाड़ी का सर्विस सेंटर, रेडिमेड कपड़े की फैक्टरी लगाने के नाम पर टर्म लोन और केश क्रेडिट के नाम पर 6.20 करोड़ रुपए दे दिए। इस मामले में सीबीआई ने इंदौर के कनाडिया रोड पर रहने वाले तत्कालीन सीनियर बैंक मैनेजर एमपी करारी के अलावा आष्टा में मनोज परमार, नेहा परमार के साथ हितेंद्र पंवार के घर छापा डाला। छापे में सौ से अधिक दस्तावेज मिले हैं।

सीबीआई ने ऐसे पकड़ा फर्जीवाड़ा
ग्वालियर के लक्ष्मीबाई नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ फिजिकल एजुकेशन (एलएनआईपीई) के यूडीसी ने संस्था के खाते से एक ही दिन में 19 ट्रांजेक्शन में 25 लाख रुपए हड़पने का मामला भी सामने आया है। बाद में अवैध तरीके से 32 लाख रुपए जमा कर दिए। सीबीआई ने इस मामले में बैंक के डिप्टी मैनेजर और कालेज के क्लर्क के खिलाफ धोखाधड़ी का मामला दर्ज किया है। ग्वालियर के एलएनआईपीई के यूडीसी इंद्र प्रकाश गर्ग ने एसबीआई के डिप्टी मैनेजर दीपक बाली के साथ मिलकर एक ही दिन में कॉलेज के खाते से 25 लाख रुपए से ज्यादा निकाल लिए थे। यह ट्रांजेक्शन नेट बैंकिंग के जरिए किए गए थे। आरोपियों ने 25 लाख 38 हजार 870 रुपए निकाले थे। जब यह बात कॉलेज को पता चली तो गर्ग को नोटिस दिया गया। नोटिस के बाद उन्होंने 32 लाख 12 हजार 503 रुपए कॉलेज के खाते में जमा कर दिए। यह राशि अवैध रूप से जमा की गई थी। सीबीआई ने जांच में पाया कि गर्ग कॉलेज के खाते की इंटरनेट बैकिंग का उपयोग करने के लिए पात्र ही नहीं थे। सीबीआई ने गर्ग और बाली के खिलाफ प्रकरण दर्ज कर लिया है।

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