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भोपाल

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Danik Bhaskar | Jan 22, 2018, 09:58 AM IST
एमपी के पूर्व राज्यपाल रामनरे एमपी के पूर्व राज्यपाल रामनरे

भोपाल। ये कोई आम लेडी नहीं है, लेकिन कुछ नया करने की चाहत में सब कुछ त्याग दिया। राजसी ठाटबाट, मुुंबई में ग्लैमरस लाइफ और लग्जरी गाड़ियों का शौक भी उन्हें नहीं रोक पाया। ये सब छोड़कर रोज चार से पांच गांव की खाक छान रही हैं। मकसद सिर्फ एक है, टीकमगढ़ को शराब मुक्त बनाना। इसमें उन्हें काफी हद तक सफलता भी मिल रही है। हम बात कर रहे हैं 27 वर्षीय रोशनी यादव की। वे मध्यप्रदेश के पूर्व राज्यपाल एवं उत्तरप्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री रहे स्वर्गीय रामनरेश यादव की पौत्रवधू हैं।

ग्लैमर की दुनिया भी नहीं रोक सकी...

-भोपाल से इंजीनियरिंग की डिग्री करने के बाद लखनऊ में सिद्धांत यादव से विवाह किया, इसके पहले मुंबई जाकर फिल्मों व सीरियल्स में काम किया।

-मगर ऐशो आराम की जिंदगी उन्हें ज्यादा दिन तक रास नहीं आई और अपने मायके पृथ्वीपुर आकर समाजसेवा में जुट गईं।

-यहां भी उनके सामने चुनौतियां कम नहीं थीं। काफी मंथन के बाद शराबबंदी अभियान की शुरुआत की।

5 हजार लोग कर चुके हैं शराब का त्याग

-करीब पांच साल पहले स्कूलों में जाकर बच्चों एवं उनके अभिभावकों को शराब से होने वाले नफा नुकसान के बारे में बताया।

-अब वे गांव-गांव जाकर महिलाओं और पुरुषों को शराबबंदी का संकल्प दिला रही हैं। रोशनी की यह मुहिम धीरे-धीरे रंग ला रही है।

-अब तक तकरीबन पांच हजार लोग शराब से तौबा कर चुके हैं।

परिवारों को बर्बाद कर रहा है नशा

रोशनी यादव कहती हैं, उनका कहना है कि शराब ना सिर्फ सेहत के लिए घातक है, बल्कि घर के घर उजड़ जाते हैं। पृथ्वीपुर क्षेत्र में ऐसे कई घरों को बर्बाद होने से बचा दिया है।

-खिस्टौन गांव की रामदुलारी का कहना है कि दीदी के कारण समाज को नई दिशा मिल रही है। गांव में शराबखोरी की घटनाओं में कमी आई है।

-टैनीपुरा के उत्तम की कहानी बिल्कुल अलग है। एक समय था जब शाम होते ही जाम छलकाते थे। इसके बिना जीवन अधूरा रहता था।

-दिनभर की मजदूरी के बाद जो पैसा मिलता, वह शराब में बर्बाद कर देते थे। पत्नी के कहने पर रोशनी ने उत्तम को ऐसा पाठ पढ़ाया कि उसी दिन से शराब छोड़ दी। अब खुशहाल जिंदगी जी रहा है।

बिहार जैसे प्रदेश में शराबबंदी है तो एमपी में क्यों नहीं
-रोशनी का तर्क है कि शिवराज सरकार को मप्र में शराबबंदी करना चाहिए। बिहार और गुजरात जैसे राज्यों में शराबबंदी लागू हो सकती है तो मप्र में क्योंं नहीं। माना कि शराब से करोड़ों रुपए का राजस्व प्राप्त होता है, लेकिन लाखों परिवार भी उजड़ रहे हैं।