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  • Farhan Qureshi of the city won the title of Mr. India Universe -2018
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भोपाल

भोपाल

Danik Bhaskar | Mar 13, 2018, 11:05 AM IST
फरहान कुरैशी को बधाईयां देने व फरहान कुरैशी को बधाईयां देने व

भोपाल. राजधानी भोपाल के फरहान कुरैशी ने गोवा में मिस्टर इंडिया यूनिव -2018 का खिताब जीत लिया। उन्होंने रूबरू मिस्टर इंडिया यूनिवर्स कॉम्पिटीशन में पार्टिसिपेट किया था। इसके साथ ही फरहान मिस्टर इंडिया इंटरनेशनल के लिए चुने गए हैं। अब वह इस प्रतिष्ठित अंतर्राष्ट्रीय स्तर की कॉम्पिटिशन में देश का प्रतिनिधित्व करेंगे। इस खिताब को जीतने के बाद फरहान सोमवार को भोपाल पहुंच गए हैं। जहां उनका दोस्तों और परिवार ने स्वागत किया। फरहान मंगलवार को अपने फैंस से रूबरू हुए।

-भास्कर से खास बातचीत में फरहान ने कहा, "पापा हमेशा से मेरे मॉडलिंग के लिए जाने से नाराज थे, उनकी नाराजी के कारण ही पूरे दो साल मैंने 8 घंटे हमारी चाय की दुकान पर बिताने के बाद जिम, पर्सनालिटी डवलपमेंट और ओवरऑल ग्रोथ पर काम किया। सारी तैयारियां चल रही थीं, लेकिन कहीं न कहीं एक डर था कि, असफलता मिली, तो पापा की नाराजगी और बढ़ जाएगी।"

पापा का फोन आया तो उत्साह दोगुना हो गया

-फरहान कहते हैं, " उसरोज मिस्टर नेशनल के पेजेंट की प्रतियोगिता शुरू होने के महज एक घंटे पहले जब मेरे फोन पर पापा की कॉल आई और उन्होंने हर कदम पर मेरे साथ रहने का हौंसला दिया, तो तैयारियों में जो कसर थी, वो भी पूरी हो गई। मैंने अपने आंसू पोंछे और अब पापा भी मेरे साथ हैं यह सोच रैंप पर जा उतरा। कुछ राउंड्स और फिर पेजेंट्स का ऐलान। मैंने सबसे पहला कॉल पापा को ही लगाया।"

13 साल की उम्र से शॉप पर बैठता था
-फरहान कुरैशी के पिता फरीद कुरैशी की पुराने भोपाल में राजू टी स्टॉल के नाम से मशहूर दुकान है। फरहान अक्सर चाय की दुकान में बैठते थे। फरहान ने कहाकि वह कुछ बड़ा करना चाहते थे, इसलिए उन्होंने मप्र की किसी स्थानीय कॉम्पिटीशन में भाग नहीं लिया। फरहान ने बताया, मैं जब 10वीं क्लास में था, उस वक्त एनुअल फंक्शन में हिस्सा लेने के दौरान से मेरे मन में यह बात थी कि कभी न कभी मॉडलिंग करूंगा। लेकिन, न कभी मौका मिला और न ही मैंने इस ओर ध्यान दिया। 13 साल की उम्र से हर रोज पापा के साथ राजू टी-स्टॉल पर बैठता हूं। हम तीनों भाई वहां 8-8 घंटे बिताते हैं, ताकि पापा की मदद हो सके। इसी दौरान मुझे लगा कि, अभी उम्र है और मुझे कम से कम एक बार अपने उस ड्रीम के लिए प्रयास करना चाहिए। सफलता मिले या न मिले, लेकिन बाद में यह मलाल तो न हो कि कभी ट्राय ही नहीं किया।

दो साल से जमकर तैयारी की
-यही सोचकर मैंने इस पेजेंट के बारे में बहुत कुछ पढ़ा, ढेर सारी इन्फॉर्मेशन जुटाई और फिर अपनी पर्सनालिटी व बॉडी पर काम करना शुरू किया। जब मैंने पेजेंट के बारे में तैयारी शुरू की, उस समय मैं बड़ा चब्बी फिजिक का था, मेरा वजन भी तकरीबन 89 किलो के आस-पास होगा। 8 घंटे शॉप पर बिताने के बाद मैंने 4 से 5 घंटे अपनी ग्रूमिंग में बिताता और दो साल टफ डाइट रूटीन फॉलो करने के बाद मैं इस कॉम्पीटिशन में दाखिल हुआ। यह मेरा पहला अटैम्प्ट था, जिसमें मैं सफल रहा। अब अगली तैयार अगस्त के आस-पास थाईलैंड में होने वाले इंटरनेशनल कॉन्टेस्ट।