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आर्थिक तंगी से परेशान, दीवार पर लिखकर उठाया ये स्टेप

आर्थिक तंगी से परेशान, दीवार पर लिखकर उठाया ये स्टेप

Sumit Pandey | Last Modified - Dec 31, 2017, 01:45 PM IST

भोपाल।किसानों का हितैशी होने का दम भरने वाली भाजपा सरकार में बुंदेलखंड के किसानों की आत्महत्या का ग्राफ बढ़ता जा रहा है। टीकमगढ़ में अभी 72 घंटे भी नहीं बीते थे कि दूसरा मामला है सामने आया है। जिसमें कर्ज से दबे किसान हजारी आदिवासी ने मौत को गले लगा लिया। घटना बल्देवगढ़ के बाबा खेरा गांव की है।

- यहां 26 वर्षीय आदिवासी किसान ने आर्थिक तंगी के चलते शनिवार को देर रात 2 बजे घर के पास लगे पेड़ से फांसी ली। मृतक किसान की बाबाखेरा में मेन रोड से लगी 2.5 एकड़ जमीन है, जो उसके पिता मंगला आदिवासी के नाम है।

- घर की आर्थिक तंगी के कारण उसके पिता ने इस जमीन को महज 10 हजार रुपए में करमासन हाट के साहूकार रमेश लोधी के पास गिरबी रख दी थी। इस रकम को एक साल में लौटाने की बात साहूकार ने कही थी। जमीन गिरबी होने के कारण मृतक हजारी इस जमीन पर खेती नहीं कर पा रहा था। जिससे उसकी आर्थिक स्थिति बिगड़ती चली गई।

फैमिली से कोई शिकायत नहीं
- मृतक हजारी आदिवासी ने मरने से पहले अपने घर की दीवाल पर अपने मन की बात लिखी। उसने कोयले से लिखा कि दोनों बेटों को जमीन में हिस्सा देने की बात अपने दोस्तों से कही। सभी को अलविदा कहा और परिवार से कोई शिकायत न होने की बात लिखी। जिन दोस्तों से उसे पैसे लेने थे उनके नाम भी दीवाल पर लिखे। जिनमें डिक्की से 1000 रुपए, नीरज से 500, मनोज से 500, जीवा से 100, राजेश से 500, जालम से 100, अजय से 300, देशराज से 100 रुपया लेने की बात लिखी। वहीं अपने बेटे राकेश से पिता की मर्जी से जीने की बात लिखकर गया।

- लोगों ने बताया कि मृतक किसान की खेती पर साहूकार ने खरीफ की फसल लगाई थी। पानी न होने के कारण इस बार जमीन खाली डली है। वहीं किसान हजारी के पिता मंगला आदिवासी एक साल से बीमार हैं। वह पलंग से उठने में भी असमर्थ हैं। ऐसे में परिवार को चलाने की जिम्मेदारी हजारी पर आ गई थी। मंगला आदिवासी के दो बेटे हैं जो ईंट बनाकर मेहनत मजदूरी करते हैं। मृतक के परिवार में पत्नी, दो लड़के जिनमें एक की उम्र 4 वर्ष और दूसरे की उम्र 2 वर्ष और एक 6 वर्ष की लड़की है।

आर्थिक परेशानियां, जाे बनी सुसाइड कारण
- साहूकार रमेश लोधी का कहना है कि हजारी के पिता मंगला ने 10000 हजार रुपया लेकर अपनी जमीन एक साल के लिए गिरवी रखी थी। जिसपर मैंने एक बार खेती की थी। इस बार पानी न होने के कारण जमीन खली पड़ी है। मृतक किसान हजारी आदिवासी को शासकीय योजनाओं का लाभ भी नहीं मिल रहा था। उसके पिता के नाम से खाद्यान्न पर्ची थी। जिस पर उसे 35 किलो गेहूं और 2 लीटर केरोसिन मिलता था। मृतक ग्राम पंचायत में कई बार अपने परिवार के लिए अलग से खाद्यान्न पर्ची बनाने की मांग कर रहा था, लेकिन उसकी कोई सुध नहीं ली गई। जिससे वह अक्सर परेशान रहता था।

दरवाजा खाेला तो लटका मिला शव
- मृतक हजारी की पत्नी रामकुंवर ने बताया कि उसके पति रात में 12 बजे अपने मकान से बाहर निकले तो मैंने सोचा नित्यकर्म के लिए गए होंगे। काफी समय बाद तक जब वो वापस नहीं आए तो आवाज दी, लेकिन कोई पता नहीं चला। जब दरवाजे खोलने का प्रयास किया तो देखा की बाहर से कुंदी लगी हुई है। सुबह 6 बजे मृतक हजारी की मां जानकीबाई ने दरवाजा खोला। जब वह घर के बाहर आई तो उसके पैरों के तले जमीन खिसक गई। मृतक के बड़े भाई बाली की सूचना पर मौके पर पहुंची पुलिस ने मर्ग कायम कर लिया है।

फांसी लगाने से पहले ये लिखा

-किसान ने दीवार पर लिखा कि अपने दिल का हाल दीवार पर लिखा के भाइयों मेरे मित्रों मेरे परिवार में जा रहा हूं, मेरे परिवार का ख्याल रखना और मेरे दोस्त जितने भी पैसे लिए हुए हैं। मेरे परिवार को दे जाना। और मेरे हिस्से की जमीन मेरे बच्चों के नाम करवा देना। परिवार पर कोई दिक्कत आए तो गांव वाले उस समस्या को दूर कर देना। घटना बल्देवगढ़ टीकमगढ़ रास्ते बाबा खेरा में घर के बाहर आंगन में फांसी लगा ली।

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