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सात साल तलाशा सोशल मीडिया पर तब मिले १९९२ बैच के ६० में से ५८ स्टूडेंट्स

सात साल तलाशा सोशल मीडिया पर तब मिले १९९२ बैच के ६० में से ५८ स्टूडेंट्स

Danik Bhaskar | Dec 22, 2017, 05:09 PM IST

भोपालराजीव गांधी प्रौद्योगिकी विवि (आरजीपीवी) के 1992 बैच के स्टूडेंट्स 25 साल बाद शुक्रवार को एक-दूसरे से पहली बार मिले। साल 2009 से इस बैच के 60 स्टूडेंट्स की तलाश सोशल मीडिया के जरिए शुरू हुई, जो 2017 में खत्म हुई। वजह यह थी कि किसी के पास एक-दूसरे की कोई जानकारी नहीं थी। आरजीपीवी में यह मीट यूआईटी प्रोफेसर रूपम गुप्ता ने काे-आर्डिनेट की।

-इस मौके पर मुख्य अतिथि के रूप में महापौर आलोक शर्मा और विशिष्ट अतिथि सीपी शर्मा, कुलपति डॉ. सुनील गुप्ता और एल्म्नाय एसोसिएशन के अध्यक्ष बीएस यादव मौजूद रहे। इस मौके पर 1992 बैच ने 1993 बैच को मशाल सौंपी।



सीएस ब्रांच में 30 स्टूडेंट्स पर था एक कंप्यूटर
ऑस्ट्रेलिया से आए विवेक शर्मा ने मेमोरी शेयर करते हुए बताया कि 1992 में प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड (पहले व्यापमं) के पास एक बिल्डिंग में कंप्यूटर साइंस और इलेक्ट्रॉनिक्स की क्लासेस लगा करती थीं। उस वक्त यह बीयू के अंडर थी और बीयू यूआईटी कहलाती थी। हम लोग कल्चरल प्रोग्राम करने के लिए छत पर टेंट लगाकर वार्षिकोत्सव मनाते थे। उन्होंने बताया कि उस समय कंप्यूटर साइंस ब्रांच में 30 स्टूडेंट्स पर एक कंप्यूटर था, जब स्टूडेंट्स ने हड़ताल की तब जाकर बाकी के 29 कंप्यूटर आए।

गूगल पर की-वर्ड डालकर सर्च किया दोस्तों को...
इंदौर की रूबी मल्होत्रा(इंटरप्रन्योर)कहती है, मैंने साल 2009 से पुराने बैचमेट्स को तलाशना शुरु किया। सभी सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म देखें। एक दोस्त अन्नपूर्णा के बारे में इतना पता था कि वो छत्तीसगढ़ में कहीं कंप्यूटर सेंटर चलाती है। बस गूगल में उसके नाम के की-वर्ड को डालकर उसकी तलाश शुरू की और वो मिल गई। इसी तरह एक बैचमेट सुनैना अग्रवाल सेंट फ्रांसिस्को में मिली।

चिट्ठी लिखकर चलता था बातों का सिलसिला...
सुशील मल्होत्रा(इंटरप्रन्योर)इंदौर बताते हैं, मेरे साथ पढ़ने वाली रूबी ही मेरी जीवन साथी बनी। मुझे लगता है कि वो मेरे लिए ही इंजीनियरिंग में आईं क्योंकि वो इससे पहले एमबीबीएस में एक साल पढ़ाई कर चुकी थी, लेकिन हॉस्टल की परेशानी के चलते उन्हें मेडिकल फील्ड छोड़ दी और इंजीनियरिंग में आ गईं। शायद हमारा मिलना तय था इसलिए ऐसा हुआ। हम एक दूसरे को चिट्ठी लिखकर बात करते थे और यह बात किसी तो पता नहीं थी कि हम रिलेशनशिप में है।