--Advertisement--

शिल्पी बोली यह मुंडन का डेमेज कंट्रोल है,

शिल्पी बोली यह मुंडन का डेमेज कंट्रोल है,

Dainik Bhaskar

Jan 22, 2018, 12:31 PM IST
हफ्ता भर पहले भोपाल में चार ले हफ्ता भर पहले भोपाल में चार ले

भोपाल। प्रदेश भर के अध्यापकों ने संविलियन की मांग को लेकर उस वक्त प्रदर्शन उग्र हो गया, जब भोपाल के जंबूरी मैदान सरेआम 4 लेडी टीचर्स ने मुंडन कराया था। इससे पूरे प्रदेश में सनसनी मच गई। इस विरोध प्रदर्शन में हजारों टीचर्स शामिल हुए और मुंडन कराया। सरकार ने इस प्रदर्शन के बाद टीचर्स की संविलियन की मांग को मंजूर करते हुए अध्यापकों को शिक्षक बनाने का फैसला किया है। इससे प्रदेश के 2.84 लाख टीचर्स को फायदा होगा।

-इसके लिए सात साल में अध्यापकों के संगठनों ने 90 छोटे- बड़े आंदोलन किए। इस हिसाब से 84 महीनों में से इन्होंने हर महीने एक आंदोलन किया।

-मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान ने रविवार को सीएम हाउस में हुए अध्यापकों के एक कार्यक्रम में संविलियन की घोषणा की।

1994 की सेवा शर्तों पर ही करेंगे स्वागत

-मुंडन कराकर सुर्खियों में आई आजाद अध्यापक संघ की अध्यक्ष शिल्पी सिवान का कहना है कि यह मुंडन का डेमेज कंट्रोल है। सब कुछ पहले से ही तय कर लिया गया था।

-सीएम की घोषणा का तो स्वागत है, लेकिन 1994 की सेवा शर्तों के साथ अमल नहीं किया तो संविलियन का कोई मतलब नहीं निकलेगा।

-अन्यथा हमारा संघर्ष जारी रहेगा। अभी यह साफ भी नहीं है कि क्या, कैसे होगा।
-अभी प्रदेश भर में ये अध्यापक चार विभागों के अधीन काम कर रहे हैं। इन्हें सरकारी कर्मचारी का दर्जा नहीं है। ये नगरीय, पंचायती निकायों और आदिम जाति कल्याण विभाग के अधीन हैं। -ये विभाग इनकी नियुक्ति करते हैं। स्कूल शिक्षा विभाग इनके लिए नियम बनाता है और अनुदान के तौर पर इनके वेतन की व्यवस्था करता है।

ये संघर्ष की कहानी...

21 दिन की नर्मदा परिक्रमा, 13 दिन जारी रहा था आंदोलन
- सितंबर 2013 में अध्यापकों द्वारा किया गया आंदोलन 13 दिन चला था।

-लालघाटी से निकाली जाने वाली तिरंगा यात्रा के दौरान प्रदर्शनकारियों को गिरफ्तार भी किया गया था।
- दो महीने पहले अध्यापकों ने इन मांगों का लेकर 51 जिलों से 21 दिन की नर्मदा परिक्रमा यात्रा निकाली थी।
- इसी महीने 5 जनवरी से प्रदेश के पांच कोनों से प्रदेश के पूरे 51 जिलों में रथ यात्रा निकाली गई। 13 जनवरी को चार महिला अध्यापकों समेत सौ से ज्यादा अध्यापकों ने मुंडन कराया था।

ये मांगें भी पूरी...
- अनुकंपा नियुक्ति,

बंधन मुक्त तबादला नीति,

गुरुजियों को वरिष्ठता दिनांक से लाभ
23 साल पहले बदली थी व्यवस्था
-1994 में
दिग्विजय सरकार ने सहायक शिक्षक, शिक्षक और लेक्चरर के पद खत्म कर दिए थे। संविधान के अनुच्छेद 73/74 के तहत स्कूल शिक्षा व्यवस्था को पंचायती राज के तहत नगरीय और पंचायत निकायों को सौंप दी थी। इसी व्यवस्था के तहत शिक्षा कर्मी वर्ग- 3 वर्ग-2 और वर्ग-1 के तहत भर्ती की थी।

-2003 में भाजपा सरकार ने 2007 में शिक्षा कर्मी और संविदा शिक्षकों को मिलाकर अध्यापक कैडर बना दिया था। इसमें सहायक अध्यापक, अध्यापक और वरिष्ठ अध्यापक
ये होगा फायदा
- अध्यापक सरकारी कर्मचारी बन जाएंगे
- सरकारी कर्मचारियों को मिलने वाले बीमा, ग्रेच्युटी, मकान भाड़ा भत्ता, यात्रा भत्ता, पेंशन सुविधा मिल सकती है
- चार की जगह अब सिर्फ एक ही विभाग स्कूल शिक्षा का नियंत्रण रहेगा
- सातवां वेतन मिलने लगेगा

X
हफ्ता भर पहले भोपाल में चार लेहफ्ता भर पहले भोपाल में चार ले
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..