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भोज ने लिखा था यंत्र अध्याय

भोज ने लिखा था यंत्र अध्याय

Dainik Bhaskar

Dec 22, 2017, 07:26 PM IST
International seminar on the architecture of rajabhoj

भोपाल। राजा भोज ने अष्टांग को आठ हिस्सों में बांटा था। उसमें प्रमुख वास्तु पुरुष मंडल एक भाग है, वहीं दूसरा भाग टाउन प्लानिंग है। यानी 11वीं शताब्दी में उन्होंने वैदिक रीति-नीति के हिसाब से भोपाल की टाउन प्लानिंग की थी। टाउन प्लानिंग के एक ग्रंथ में पुरानिवेश एक अध्याय है, जिसमें बताया गया है कि तब राजा भोज की प्लानिंग एक स्मार्ट टाउन की ही थी। यह कहना है पुणे के संस्कृत स्कॉलर डॉ. प्रभाकर आप्टे का। वे शुक्रवार को प्रशासन अकादमी में शुरू हुई राजा भोज की स्थापत्य कला पर आयोजित अंतरराष्ट्रीय संगोष्ठी में बतौर मुख्य वक्ता बोल रहे थे।


-भोज की लिखी किताब समरांगण सूत्रधार का अनुवाद कर चुके डॉ. प्रभाकर आप्टे ने बताया कि भोपाल 12 दरवाजों के साथ एक चारदीवारी से घिरा था। वह चौकोर डिजाइन आज भी लगभग वैसी ही है, जैसा भोज की प्लानिंग में थी। गौरतलब है कि 5 साल पहले उन्होंने इंदिरा गांधी राष्ट्रीय कला केंद्र को समरांगण सूत्रधार अनुवाद कर सौंपी थी, लेकिन अभी तक किताब प्रकाशित नहीं हो सकी है। संगोष्ठी में राजा भोज पर रिसर्च कर रहे स्कॉलर, आर्किटेक्ट स्टूडेंट्स सहित कई प्रमुख वक्ता उपस्थित थे।

भोज ने लिखा था यंत्र अध्याय

डॉ. प्रभाकर कहते हैं कि राजा भोज ने एक हजार साल पहले यंत्र अध्याय लिखा था। इसमें उस समय किस तरह से तकनीक के माध्यम से मनोरंजन किया जाता था, इसका उल्लेख है। इसमें उन्होंने मैकेनिक को यंत्र विद्या, रोबोटिक्स को रोबो की संज्ञा दी थी। संगोष्ठी में उपस्थित महापौर आलोक शर्मा ने कहा राजा भोज के वैदिक नगर की खोज होनी चाहिए। भोजपाल को कैसे भोपाल कर दिया, इसे हम फिर से भोजपाल करेंगे। सैटेलाइट चित्रों से ऐसी जानकारी मिली है कि बड़ी झील में हमीदिया अस्पताल के पीछे वाले हिस्से में पानी के अंदर कोई पुराना शहर है, इस पर भी रिसर्च होनी चाहिए।

एनिमेशन से बताया भोज के बारे में
संगोष्ठी के दूसरे सत्र में चेन्नई के एनिमेशन एक्सपर्ट डीके हरि ने राजा भोज की स्थापत्य कला के बारे में एनिमेशन के माध्यम से कई महत्वपूर्ण जानकारी दी। उन्होंने बताया कि
- मरक्यूरी की मदद से भाप से उड़ने वाला छोटा विमान बनाया था।
- एलिवेटर के माध्यम से राजा का पलंग हर घंटे एक फ्लोर ऊपर जाता था, यानी राजा रात्रि में ग्राउंड फ्लोर पर सोते थे और सुबह सूर्य की पहली किरण आने तक वे एलिवेटर के माध्यम से पांचवें फ्लोर पर आ जाते थे।
- महल के गेट पर रोबो द्वारपाल हुआ करते थे।
- राजा का जुलूस रोबो निकालते थे।

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