--Advertisement--

प्राइवेट स्कूलों को बायोमेट्रिक सिस्टम से फीस देने वाला पहला राज्य बना मप्र

प्राइवेट स्कूलों को बायोमेट्रिक सिस्टम से फीस देने वाला पहला राज्य बना मप्र

Dainik Bhaskar

Dec 09, 2017, 08:23 PM IST
demo pic demo pic
भोपाल। प्रदेश में शिक्षा का अधिकार कानून यानी आरटीई के अंतर्गत प्राइवेट स्कूलों में पढ़ने वाले वाले बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति अब आधार नंबर से लिंक करते हुए बायोमेट्रिक सत्यापन से की जाएगी। स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा समस्त जिला कलेक्टरों को इस संबंध में निर्देश जारी करने के साथ ही इस व्यवस्था को लागू करने वाला पहला राज्य मप्र बन गया है। इस सिस्टम के लागू होते ही प्राइवेट स्कूल संचालक फीस न मिलने जैसे आरोप नहीं लगा सकेंगे।

-गौरतलब है कि आरटीई के प्राइवेट स्कूलों की पहली प्रवेशित कक्षा में न्यूनतम 25 प्रतिशत सीटों पर वंचित एवं कमजोर वर्ग समूह के बच्चों को निःशुल्क प्रवेश प्रदान किया जाता है। जिसकी फीस की प्रतिपूर्ति राज्य शासन द्वारा की जाती है। राज्य शिक्षा केंद्र के प्रवक्ता अमिताभ अनुरागी ने बताया कि फीस प्रतिपूर्ति की प्रक्रिया को पूर्ण रूप से पारदर्शी बनाने के उद्देश्य से प्रदेश में इस प्रावधान के अंतर्गत अध्ययनरत सभी बच्चों के आधार नंबर प्रक्रिया से लिंक करते हुए बायोमेट्रिक मशीन द्वारा सत्यापन प्रारंभ किया गया है। यह सत्यापन बच्चों की अंगुली अथवा अंगूठे के निशान से किया जाएगा। आधार सत्यापित होने पर ही सत्यापित बच्चों की फीस प्रतिपूर्ति का क्लेम संबंधित स्कूल द्वारा प्राप्त किया जा सकेगा।

पोर्टल शुरू किया गया
राज्य शिक्षा केन्द्र द्वारा इस प्रक्रिया के संचालन हेतु पोर्टल प्रारंभ कर दिया गया है। जितने बच्चों का आधार सत्यापन होगा, उतने बच्चों का फीस प्रतिपूर्ति का क्लेम स्कूल द्वारा डिजिटल हस्ताक्षर से लाॅक कर आँनलाइन भेजा जा सकेगा। यह व्यवस्था लागू होने से अब किसी भी प्राइवेट स्कूल को नोडल अधिकारी अथवा किसी अन्य कार्यालय में जाकर फीस का क्लेम जमा करने की आवश्यकता नहीं होगी। स्कूल द्वारा डिजीटली लाॅक किया गया क्लेम नोडल अधिकारी, बीआरसी तथा जिला परियोजना समन्वयक को पोर्टल पर आँनलाइन ही सत्यापन के लिए प्रदर्शित होगा, जिसके आधार पर सत्यापन की कार्यवाही की जाएगी। सत्यापन के बाद प्रतिपूर्ति राशि आँनलाइन ही स्कूल के खाते मे सीधे जमा होगी।


हेल्प डेस्क भी शुरू
आधार सत्यापन से बच्चे का स्वतः ही भौतिक सत्यापन हो जाएगा, जिससे बच्चों की पहचान आसान होगी। इस प्रक्रिया से वास्तविक बच्चों की फीस की प्रतिपूर्ति ही प्राइवेट स्कूलों को निर्धारित समय से तथा पारदर्शी तरीके से हो सकेगी। आँनलाइन प्रक्रिया मे किसी भी प्रकार की तकनीकी सहायता हेतु बीआरसी तथा डीपीसी कार्यालय में हेल्प डेस्क की स्थापना भी की गई है।
X
demo picdemo pic
Bhaskar Whatsapp

Recommended

Click to listen..