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ब्लड कैंसर पर अमेरिका में किया रिसर्च, अब इस वजह से भटक रही हैं गांवों में

ब्लड कैंसर पर अमेरिका में किया रिसर्च, अब इस वजह से भटक रही हैं गांवों में

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 04:57 PM IST
नरसिंहपुर में सैनेटरी पैड बना नरसिंहपुर में सैनेटरी पैड बना

भोपाल। अक्षय कुमार की फिल्म पैडमैन कुछ ही दिनों में रिलीज होने वाली है। आपने सुना होगा कि ये फिल्म पैडमैन के नाम से मशहूर अरुणाचलम मुरुगनांथम के जीवन पर आधारित है। लेकिन हम आपको एमपी की पैड वूमेन के बारे में बताने जा रहे हैं...। जिसने उन महिलाओं को जागरूक करने की ठानी है, जिन महिलाओं ने पैड के बारे में सुना ही नहीं है। हम बात कर रहे हैं माया विश्वकर्मा की, जो अमेरिका से लौटकर नरसिंहपुर के एक छोटे से गांव में उन्होंने सैनेटरी पैड बनाने की फैक्ट्री डाली है और महिलाओं के माध्यम से सैनेटरी पैड भी बनाने शुरू की है। मकसद एक ही है पीरियड्स और इससे जुड़ी अन्य समस्याओं के प्रति ग्रामीण महिलाओं को जागरूक करना।

कौन हैं पैड वूमन माया...
-माया यूनिवर्सिटी ऑफ कैलिफोर्निया, सैन फ्रांसिस्को में ब्लड कैंसर पर शोध कार्य किया है। इसके बाद जब वह भारत लौटीं तो उन्होंने आप पार्टी ज्वाइन कर ली और नरसिंहपुर पहुंचकर काम करना शुरू किया। बधवार -स्वराज मुमकिन है किताब लिखी। पार्टी में ज्यादा दिन नहीं रहीं। दो साल पहले इन्हें महिलाओं से मिलते हुए ये महसूस हुआ कि ग्रामीण महिलाएं काफी परेशानी से गुजर रही हैं। माया विश्वकर्मा ने इसके बारे में पूरी रिसर्च की करना शुरू कर दिया। अब वह पूरी तरह से इसी काम जुट हुई हैं।

-अमेरिका के दोस्तों से चर्चा की और सैनेटरी नैपकीन बनाने का फैसला किया।
-इसके लिए वह अरुणाचलम मुरुगनांथम से मिलने तमिलनाडु गईं।
-उनसे मिलने के बाद उन्हें लगा कि इस काम से समाज की सेवा की जा सकती है।

गांव-गांव फैला रही हैं जारूकता का उजाला
-माया विश्वकर्मा गांवों में जाकर महिलाओं के समूहों से मिल रही हैं। उन्हें पीरियड्स के बारे में बता रही हैं, उसके नुकसान और समस्याओं के बारे में बता रही हैं।

-माया कहती हैं, महिलाओं से उनकी समस्याएं जानते हैं, इसके बाद धीरे-धीरे पीरियड्स और दूसरी समस्याओं पर बात करती हूं।

-जिस तरह से पीरियड्स और बच्चेदारी की समस्याएं आ रही हैं, उसके पीछे साफ-सफाई ही है। हमने तय किया है कि ग्रामीण महिलाओं और ट्राइवल क्षेत्र की महिलाओं को ही सैनेटरी पैड के साथ ही जागरूक करना है।
फैक्ट्री में काम शुरू, बनने लगे पैड
-माया विश्वकर्मा कहती हैं, हमने इस काम को सुकर्मा फाउंडेशन के जरिए शुरू किया है। इसके लिए हमने महिलाओं की एक टीम बनाई है।

-फैक्ट्री में वह काम कर रही हैं और पैड बनने शुरू हो गए हैं। वह कहती हैं, शहरों में तो महिलाओं जागरूक होती हैँ, लेकिन गांवों में नहीं।

-इसके लिए हम एक कैंपेन शुरू करने जा रहे हैं, जिससे ग्रामीण और आदिवासी महिलाओं को जागरूक किया जाएगा।