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शहरवासियों की मौत पर जश्न क्यों? रन फार रन एनजीओ तो वन्य प्राणी अधिनियम के उल्लंघन का दोषी भी है

शहरवासियों की मौत पर जश्न क्यों? रन फार रन एनजीओ तो वन्य प्राणी अधिनियम के उल्लंघन का दोषी भी है

Danik Bhaskar | Dec 01, 2017, 08:58 PM IST
रन फार रन का विरोध करते लोग। रन फार रन का विरोध करते लोग।

भोपाल। रन फार रन द्वारा रविवार को आयोजित कार्यक्रम को लेकर शहर में विरोध शुरू हो गया है। ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया, छत्रपति ब्रिगेड, समेत कई संगठनों और स्कूल- कॉलेज के स्टूडेंट्स ने इसके विरोध में शुक्रवार को बोर्ड आफिस चौराहे पर प्रदर्शन किया।

-ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल इंडिया के सदस्य और आरटीआई एक्टिविस्ट अजय दुबे के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन के दौरान प्रदर्शनकारियों ने जमकर नारेबाजी की। हाथों में तख्तियां और बैनर लेकर प्रदर्शनकारियों ने एनजीओ रन फार रन के खिलाफ कार्रवाई की मांग भी की। प्रदर्शन में राशिद खान, अंकित दुबे अन्य कार्यकर्ता व स्टूडेंट्स शामिल हुए। दुबे का कहना है कि 3 दिसंबर को भोपाल गैस कांड दुनिया की सबसे बड़ी रासायनिक त्रासदी है। इसमें कई शहरवासियों की अकाल मौत हो गई थी। इसकी बरसी पर रन फार रन जश्न मनाना चाहता है।


दुबे ने रन फार रन को लेकर यह तर्क भी दिए
एनजीओ रन भोपाल रन ने 2016 में वन विहार के अंदर घुसकर रैली निकाली थी। इस एनजीओ को केंद्रीय जू प्राधिकरण ने वन्य प्राणी सरंक्षण अधिनियम 1972 एवं जू रुल्स 2010 के तहत दोषी करार दिया था।


- 2015 में यह संगठन बना। सरकार ने अब तक इस पर कानूनी कार्रवाई नहीं की। तत्कालीन कलेक्टर निशांत वरवडे इसके अध्यक्ष थे। नगर निगम ने दिया समर्थन दिया।
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- प्रकृति के साथ सामंजस्य सीएम हाउस वाले गेट से घुसे थे
- पंपलेट छपवाई गई है, इसमें इनके आयोजन में रॉक बैंड, जुंबा, डीजे का भी जिक्र है।
- युवाओं का कोई संगठन करे तो बात समझ में आती है। भारतीय प्रशासनिक सेवा का कोई अधिकारी यह करे ताे इसे क्या कहा जाए।
- इस एनजीओ के लोग गैस प्रभावित एक गिलास पानी तक नहीं पी सकते।