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८० के दशक में फिल्मों में सिर्फ ३ किरदार होते थे

८० के दशक में फिल्मों में सिर्फ ३ किरदार होते थे

Danik Bhaskar | Dec 19, 2017, 08:45 PM IST
प्रेम चोपड़ा फिल्म में एक रेप प्रेम चोपड़ा फिल्म में एक रेप

भोपाल। 80 के दशक में फिल्मों में सिर्फ 3 किरदार होते थे। हीरो, हीरोइन और विलेन। कद-काठी और शक्ल से तो मैं ठीकठाक ही था, लेकिन मुझे हीरो का रोल कभी किसी ने ऑफर नहीं किया। आप यूं समझ लें कि, रंजीत, प्रेम चोपड़ा और अमरीश पुरी जैसे कलाकारों को फिल्म में कास्ट ही रेप सीन के डिमांड को देखते हुए किया जाता था। 3-4 फिल्मों के बाद मेरी छबि ही विलेन वाली बन गई, जिसे मैं भी एन्जॉय करने लगा था। यह कहना है बॉलीवुड के विलेन प्रेम चोपड़ा का।


रेप सीन के लिए ही कास्ट किया जाता था हमें
मध्य प्रदेश की पर्यटन नगरी खजुराहो में चल रहे तीसरे अंतर्राष्ट्रीय फिल्म महोत्सव में मंगलवार को बॉलीवुड के विलेन प्रेम चोपड़ा शामिल हुए। इस मौके पर मीडिया से चर्चा के दौरान उन्होंने कहा कि, 80 के दशक में रिलीज होने वाली ज्यादातर फिल्मों में स्टोरी को इंट्रेस्टिंग बनाने के लिए रेप सीन डाला जाता था। आपको ये जानकर और भी हैरानी होगी कि, ज्यादातर फिल्मों में रंजीत, प्रेम चोपड़ा और अमरीश पुरी जैसे विलेन को फिल्म में कास्ट ही रेप सीन के डिमांड को देखते हुए किया जाता था।


समाज के बारे में सोचना बंद कर दिया
मैं घर से सिर्फ बॉलीवुड में काम करने की इच्छा लेकर ही आया था। खुश हूं कि, लोगों ने मुझे विलेन के तौर पर बड़ी ही आसानी से एक्सेप्ट कर लिया। एक-दो रेप सीन के बाद तो मैंने ये सोचना ही बंद कर दिया था कि, समाज और लोग मेरे बारे में क्या सोच रहे होंगे।


फिल्मों में सिर्फ तीन कैरेक्टर ही होते थे

प्रेम चोपड़ा ने कहा कि, पहले फिल्मों में सिर्फ तीन कैरेक्टर ही होते थे इनमें हीरो, हीरोइन और विलेन ही लीड रोल में होते थे। हीरो मैं बन नहीं पाया तो किस्मत ने मुझे विलेन बना दिया। मैं खुश हूं कि उस दौर में फिल्मों को हिट कराने में विलेन की भूमिका भी बड़ी महत्वपूर्ण हुआ करती थी और लोग आपके डायलॉग सालों-साल याद रखते थे।