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बच्चे गांव छोड़ गए, अफसरों ने वजह तो तलाशी नहीं, स्कूल ही बंद करा दिया

बच्चे गांव छोड़ गए, अफसरों ने वजह तो तलाशी नहीं, स्कूल ही बंद करा दिया

Danik Bhaskar | Feb 13, 2018, 12:36 PM IST
गांव में सन्नाटा फैला है। गांव में सन्नाटा फैला है।

भोपाल। एक साल पहले जिस टपरा गांव में बच्चे हंसते-खेलते हुए स्कूल जाते थे, वहां आज सन्नाटा फैला है। गांव में रहने वाले अनुसूचित जाति के 100 लोग अपने परिवार के साथ अब गांव छोड़कर पलायन कर गए हैं। असल में, दबंगों ने उनका जीना हराम कर दिया है। इस खास जाति के लोगों को गांव में नहीं घुसने दिया जा रहा। गांव के रास्ते बंद कर दिए गए हैं। एकमात्र स्कूल में दर्ज 26 बच्चों ने स्कूल आना बंद कर दिया। बच्चों ने स्कूल नहीं आने की जानकारी वहां पदस्थ शिक्षक भी नहीं दे पा रहे।

-अफसरों ने भी वजह जाने बिना शिक्षकों को दूसरे स्कूल में अटैच कर स्कूल में ताला डलवा दिया है।

दबंगों ने गांव का रास्ता बंद कर दिया है...
-टपरा गांव छोड़कर पटपड़ा में रह रहे जुगराज बैरवा के परिवार की महिलाओं रोशन बाई, इंद्र बाई ने बताया कि कोल्हूखेड़ा के दबंगों ने हमें बहुत परेशान किया। गांव का रास्ता बंद कर दिया। हमें हैंडपंप से पानी तक नहीं भरने दिया गया। जब भी कोई महिला कोल्हूखेड़ा पानी भरने जाती तो उसे दबंग गाली-गलौज देते हुए मारपीट कर भगा देते।

-दलितों को गांव के रास्ते से निकलने नहीं दिया और खेतों से निकलने पर उन्हें गालियां दीं। यहां तक की दबंगों ने उनके गांव तक बिजली भी नहीं पहुंचने दी। इसे लेकर दलितों ने विधायक से लेकर प्रशासन से गुहार लगाई, लेकिन कोई सुनवाई नहीं की।

गांव में फैला सन्नाटा, दबंग खरीद रहे घर व खेत
-टपरा गांव में रहने वाले 100 में से अधिकांश परिवार राजस्थान चले गए। शेष 8-10 परिवार गांव से निकलकर दूसरे गांवों के बाहर झोपड़ी डालकर रहने लगे।

-पटपड़ा गांव में बस गए जुगराज बैरवा व रामविलास ने बताया कि-हमारे मकानों पर कब्जा करने की दबंग धमकियां देने लगे।

-आधा-आधा बीघा की जमीनों पर बने कच्चे मकानों को दलितों ने उक्त दबंगों को सस्ते दामों में बेच दिया। हमें गांव में भी नहीं घुसने दिया। अब दलितों के खेतों पर दबंगों की नजर है। जिन्हें कब्जाने की नीयत से वह दलितों को डरा धमका रहे हैं।

हमारी कोई सुनता तो क्यों गांव छोड़ते
-हमने कलेक्टर, विधायक तक से दबंगों की शिकायत की, समाधान ऑनलाइन में में भी मामला चलाया, लेकिन प्रशासन ने कोई मदद नहीं की। नतीजा दबंगों के आतंक के चलते हमें गांव ही छोड़ना पड़ा। -रोशन बाई, पीड़िता

-उन्हें इस बारे में अब तक कोई भी शिकायत नहीं मिली है। यदि ऐसा कोई मामला हुआ है तो तत्काल कार्रवाई की जाएगी और गांव वालों को दोबारा बसाया जाएगा। - पीएल सोलंकी, कलेक्टर, श्योपुर