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ईसा पूर्व ५०० साल पूराने हैं ये स्तूप, सांची जैसा ही है इनका स्वरूप

ईसा पूर्व ५०० साल पूराने हैं ये स्तूप, सांची जैसा ही है इनका स्वरूप

Danik Bhaskar | Jan 24, 2018, 12:33 PM IST
ड्रोन से ली गई मोहक फोटो। ड्रोन से ली गई मोहक फोटो।

भोपाल। जिला मुख्यालय विदिशा से 22 किलोमीटर की दूरी पर सलामतपुर के पास सतधारा नामक स्थान में सांची जैसे ही 28 हेक्टेयर क्षेत्र में छोटे-बड़े 30 स्तूपों की श्रृंखला फैली हुई है। यहां सतधारा नदी बहती है। इसके अलावा यहां पर 2 बौद्ध विहार भी हैं। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (एएसआई) से मिली जानकारी के मुताबिक यहां बौद्ध हीनयान संप्रदाय के स्मारक तथा पुरावशेष 28 हेक्टेयर में फैले हुए हैं। इनकी देखरेख की जिम्मेदारी भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग के पास है। लेकिन देखरेख के अभाव में प्राचीन धरोहर नष्ट हो रही है।

-इनमें एक मुख्य और 29 अन्य स्तूप हैं। मुख्य स्तूप सांची के स्तूप से भी बड़ा नजर आता है।

-मुख्य स्तूप का निर्माण सम्राट अशोक के काल ईसा पूर्व तीसरी शताब्दी का माना जाता है।
-इसके 400 साल बाद इसका ऊपरी भाग पत्थरों से मढ़ा गया जो अब क्षतिग्रस्त हो गया है।
-खुदाई में मिट्टी के पात्रों के टुकड़े भी मिले हैं। इन्हें भी 200 से 500 वर्ष ईसा पूर्व माना गया है।
-यहां बौद्ध शैलचित्र भी मिले हैं, जो काफी आकर्षक हैं।

इन स्तूपों के बारे में और जानिए...
-22 किमी दूर सलामतपुर स्थित है यह क्षेत्र
-28 हेक्टेयर क्षेत्र में फैले हुए हैं पुरा अवशेष
-30 स्तूप मौजूद हैं इस क्षेत्र में इनमें एक सबसे बड़ा
-02 विहार भी मौजूद हैं स्तूप के साथ-साथ
-200 से 500 वर्ष ईसा पूर्व माना जा रहा है इन स्तूपों को