Hindi News »Madhya Pradesh »Bhopal »News» They Used To Take Bribe Instead Of Manipulating Constable Streams

जान से मारने की FIR को बदलते थे मारपीट में, फिर मांगते थे रिश्वत, ऐसे खुली पोल

सागर जिले में लोकायुक्त ने 6 हजार की रिश्वत लेते रंगे हाथों हवलदार और सिपाही को गिरफ्तार किया।

DainikBhaskar.com | Last Modified - Jan 02, 2018, 01:43 PM IST

  • जान से मारने की FIR को बदलते थे मारपीट में, फिर मांगते थे रिश्वत, ऐसे खुली पोल
    +2और स्लाइड देखें
    सागर जिले में दो पुलिसवालों को रिश्वत लेते रंगे हाथों पकड़ा गया है।

    भोपाल। सागर जिले में लोकायुक्त पुलिस संगठन के स्थानीय अमले ने सुरखी थाने की बिलहरा चौकी में पदस्थ एक हवलदार और सिपाही को रिश्वत लेते रंगे हाथों गिरफ्तार किया है। आरोप है कि हवलदार हाकिम सिंह, सुरखी थाने में दर्ज एक मामले के फरियादी अमोल सिंह केवट से उसके पक्ष में केस मजबूत करने की एवज में 30 हजार रुपए की रिश्वत मांग रहा था।


    दो किस्तों में ले चुका था 20 हजार
    - हवलदार हाकिम इस मामले में अमोल सिंह ने दो किस्तों में 15 और 5 हजार ले चुका था। तीसरी किस्त के रूप में उसने 10 हजार रुपए मांगे तो परेशान अमाेल सिंह ने अपने भानजे हल्के भाई केवट के जरिए लोकायुक्त पुलिस से शिकायत कर दी। सोमवार दोपहर को जैसे ही हल्के भाई ने हाकिम और साथी सिपाही अखिलेश निवारे को रिश्वत के 6 हजार रुपए सौंपे तो एक ढाबे से लोकायुक्त पुलिस ने उसे रंगे हाथों गिरफ्तार कर लिया।


    काम नहीं आई चालाकी
    - रिश्वत के लेन-देन के लिए सुरखी थाना तय किया गया था लेकिन हाकिम ने होशियारी दिखाते हुए शिकायतकर्ता से यहां रकम नहीं ली। वह उसे अपने साथ बाइक पर बैठाकर सुरखी रोड स्थित सिद्धि विनायक ढाबे पर ले गया। हाकिम ने चालाकी दिखाते हुए साथ आए सिपाही अखिलेश निवारे को यह रकम लेकर तत्काल वहां से पुलिस थाने के लिए रवाना कर दिया। लोकायुक्त के अमले ने उसके इस प्रपंच को भांपते हुए तुरंत एक टीम सिपाही के पीछे लगा दी, दूसरी टीम ने हाकिम सिंह को दबोच लिया।

    ऐसे करता था एफआईआर में हेरफेर
    इस मामले ने हवलदार की कार्यप्रणाली की पोल खोल दी है। सूूत्रों के अनुसार हवलदार हाकिम सिंह गंभीर मामलों में भी जानबूझकर साधारण धाराओं के केस दर्ज करता था। इसके बाद वह मेडिकल रिपोर्ट, बयान आदि के नाम धाराएं बढ़ाने की बात करता था। इस तरह से उसने एफआईआर को वसूली का धंधा बना लिया था। अमोल सिंह के बेटे कैलाश के मामले में भी उसने यही चालाकी दिखाई। दरअसल 7 दिसंबर को जब आराेपी विनोद चढ़ार ने कैलाश के हाथ पर कुल्हाड़ी से सीधा वार किया था। जिससे उसकी भुजा की हड्डी के दो टुकड़े होकर पूरा हाथ एक तरफ लटक गया था। नियमानुसार पुलिस को इस मामले में 326 या 307 का केस तत्काल ही दर्ज करना था लेकिन रिश्वतखोरी की लत के चलते करीब एक महीने से पुलिस फरियादी से केवल वसूली कर रही थी। लेकिन इस दफा हवलदार की यह धंधेबाजी धरी रह गई।


    थाने में डांस कराने पर हवलदार हुआ था अटैच
    रिश्वतखोरी का आरोपी आरोपी हवलदार अनुशासनहीनता करने पर लाइन अटैच हुआ था। जानकारी के अनुसार उसने 6-8 महीने पहले थाने में अपनी पदस्थापना के दौरान परिसर में ही डीजे पर राई डांस कराया था। एसपी ने उसे इस मामले में लाइन अटैच कर दिया था।

  • जान से मारने की FIR को बदलते थे मारपीट में, फिर मांगते थे रिश्वत, ऐसे खुली पोल
    +2और स्लाइड देखें
    जैकेट पहने हवलदार हाकिमसिंह और बाजू में खड़ा सिपाही अखिलेश निवारे।
  • जान से मारने की FIR को बदलते थे मारपीट में, फिर मांगते थे रिश्वत, ऐसे खुली पोल
    +2और स्लाइड देखें
    दोनों एफआईआर में हेरफेर के बदले में लेते थे रिश्वत।
आगे की स्लाइड्स देखने के लिए क्लिक करें
दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए News in Hindi, Breaking News सबसे पहले दैनिक भास्कर पर |

More From News

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×