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भोपाल

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Danik Bhaskar | Dec 16, 2017, 05:50 PM IST
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भोपाल। सरोद की अनूठी लयकारी व धुनों से लोगों का दिल जीतने वाले उस्ताद अमजद अली खान ने मध्यप्रदेश की धरती पर फिर कभी सरोद नहीं बजाने का फैसला किया है। इसके लिए उन्होंने मुख्यमंत्री शिवराज को पत्र भी लिखकर नाराजगी जताई है। उस्ताद अमजद अली खां ने पत्र में प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा उपेक्षा किए जाने का आरोप लगाया है।


- उस्ताद प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा तानसेन समारोह में प्रस्तुति के लिए नहीं बुलाए जाने से नाराज हैं। उन्होंने सीएम को पत्र लिखकर इसकी जानकारी दी।
- आगामी 22 दिसंबर से 26 दिसंबर तक ग्वालियर में तानसेन समारोह होना है। इस आयोजन में प्रदेश के संस्कृति विभाग द्वारा संगीत व कला जगत की प्रमुख हस्तियों को प्रस्तुतियां देने के लिए आमंत्रित किया जाता है।
- संस्कृति विभाग ने दुनियाभर में मशहूर सरोदवादक उस्ताद अमजद अली खान इस कार्यक्रम का न्यौता नहीं दिया है। जिससे वे नाराज हो गये हैं। इस संबंध में उन्होंने सीएम शिवराज को पत्र लिखकर संस्कृति विभाग द्वारा उन्हें उपेक्षित किए जाने के आरोप लगाए हैं। साथ ही अब कभी मध्यप्रदेश में सरोद ना बजाने की बात कही है।


सेनिया बंगश घराने की छठी पीढ़ी है उस्ताद
अमजद अली खां का जन्म ग्वालियर में 9 अक्टूबर 1945 को हुआ था। ग्वालियर में संगीत के 'सेनिया बंगश' घराने की छठी पीढ़ी में जन्म लेने वाले अमजद अली खां को संगीत विरासत में प्राप्त हुआ था। इनके पिता उस्ताद हाफिज अली खां ग्वालियर राज-दरबार में प्रतिष्ठित संगीतज्ञ थे। इस घराने के संगीतज्ञों ने ही ईरान के लोक वाद्य रबाब को भारतीय संगीत के अनुकूल परिवर्धित कर सरोद नामकरण किया।
- मात्र बारह वर्ष की आयु में एकल सरोद-वादन का पहला सार्वजनिक प्रदर्शन किया था। एक छोटे से बालक की सरोद पर अनूठी लयकारी और तंत्रकारी सुन कर दिग्गज संगीतज्ञ दंग रह गए।


पद्मश्री और पद्म विभूषण से सम्मानित
युवावस्था में ही उस्ताद अमजद अली खां ने सरोद-वादन में अंतर्राष्ट्रीय ख्याति प्राप्त कर ली थी। 1971 में उन्होंने द्वितीय एशियाई अंतर्राष्ट्रीय संगीत-सम्मेलन में भाग लेकर रोस्टम पुरस्कार प्राप्त किया था। यह सम्मेलन यूनेस्को की ओर से पेरिस में आयोजित किया गया था, जिसमें उन्होंने आकाशवाणी के प्रतिनिधि के रूप में भाग लिया था। अमजद अली ने यह पुरस्कार मात्र 26 वर्ष की आयु में प्राप्त किया था।

22 से शुरू हो रहा है तानसेन समारोह
भारतीय शास्त्रीय संगीत के क्षेत्र में देश का सर्वाधिक प्रतिष्ठित महोत्सव तानसेन समारोह ग्वालियर में 22 से 26 दिसम्बर तक आयोजित होगा। इस साल के तानसेन समारोह की चार संगीत सभाओं में स्थानीय कलाकारों की एक-एक प्रस्तुति होगी। यह समारोह भारतीय संगीत की अनादि परंपरा के श्रेष्ठ कला मनीषी संगीत सम्राट तानसेन को श्रद्धांजलि व स्वरांजलि देने के लिये पिछले 93 साल से आयोजित हो रहा है।


2016: समारोह की शुरुआत ही उस्ताद के वादन से
- मध्य प्रदेश संस्कृति विभाग के इस गौरवपूर्ण समारोह के पिछले साल उस्ताद अमजद अली खान के वादन से ही उत्सव की शुरुआत हुई थी। उस्ताद ने इसके बाद अक्टूबर में भोपाल में हुए हृदय दृश्यम कार्यक्रम में प्रस्त़ति देने भोपाल आए थे। तानसेन उत्सव में नियम है कि एक बार कोई कलाकार प्रस्तुति दे देता है तो फिर उसे पांच साल तक प्रस्तुति देने का मौका नहीं मिलता है। हाल में, उस्ताद अमजद अली खान बाबा महाकाल के दर्शन करने उज्जैन गए थे।