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विक्टिम ने कहा था, वर्दी पहनने लायक नहीं है पुलिस

विक्टिम ने कहा था, वर्दी पहनने लायक नहीं है पुलिस

Dainik Bhaskar

Dec 23, 2017, 03:21 PM IST
Victim had said that the uniform is not worth wearing the police

भोपाल। भले ही फास्ट ट्रैक कोर्ट ने भोपाल गैंगरेप को रेयर ऑफ द रेयर क्राइम मानते हुए चारों आरोपियों को नेचुरल डेथ तक की सजा सुनाई हो। इस मामले में सबसे बड़ी लापरवाही पुलिस और सिस्टम की सामने आई थी। विक्टिम ने यहां तक कह दिया था कि पुलिस तो वर्दी पहनने लायक नहीं है। विक्टिम के इस बयान और आरोप के बाद सरकार ने ताबड़तोड़ कार्रवाई करते हुए छह पुलिस अफसरों पर कार्रवाई की गई थी।

विक्टिम ने लगाए थे ये आरोप

- राजधानी के हबीबगंज इलाके में हुए गैंगरेप की विक्टिम ने भोपाल पुलिस के काम करने के तरीके पर कई सवाल खड़े किए हैं। लड़की ने कहा है कि हादसे के दिन एसआरपी अनिता मालवीय महिला होते हुए भी मजे लेती रहीं। वह मेरी कहानी सुनकर हंसती रहीं। तो न्याय की उम्मीद कहां रह जाती है। पोस्ट पर तो छोड़ो पुलिस की वर्दी पहनने लायक तक नहीं हैं। लड़की ने कहा कि मैं पुलिस वालों की बेटी हूं और मेरे साथ इस तरह का व्यवहार किया जाता तो सामान्य लोगों के साथ किस तरह का सुलूक पुलिस करती होगी, यह आप खुद समझ सकते हैं। इस मामले सरकार एक आईजी, एक एसपी जीआरपी, तीन टीआई और दो एसआई पर कार्रवाई कर चुकी है।

माता-पिता ने साथ दिया

- मेरी इस लड़ाई में मेरे माता-पिता हर दम मेरे साथ हैं। उन्होंने मुझे संभाला और आरोपियों के खिलाफ लड़ने की हिम्मत दी। उन दरिंदों के साथ रहम नहीं होना चाहिए। मैं गिड़गिड़ा रही थी। वे हंस रहे थे। उन सभी को बीच चौराहे पर फांसी दे देनी चाहिए। मेरी एक ही अपील है कि इस तरह की वारदात के बाद परिजनों को पीड़िता का साथ देते हुए आवाज उठाना चाहिए।

सवाल ने कर दिया था तंग

- विक्टिम ने कहा था कि सवालों के जवाब देते-देते थक गया हूं। उन्होंने अपनी हिम्मत और ताकत माता-पिता को बताया था। उनके पिता पहले दिन बाइक में लेकर चार थानों के चक्कर लगाते रहे थे। पुलिस ने बयान के लिए दिनभर थाने में बिठाकर रखा। तीसरे दिन मेडिकल और चौथे दिन मुझे सोनोग्राफी के लिए बुलाया गया।

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Victim had said that the uniform is not worth wearing the police
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