Hindi News »Madhya Pradesh News »Bhopal News» Alim Bajami Article On The Vyapam Scam

भोपाल अपडेट

भोपाल अपडेट

Sushma Barange | Last Modified - Nov 27, 2017, 05:47 PM IST

भोपाल। व्यावसायिक परीक्षा मंडल यानी व्यापमं। काम प्रवेश एवं भर्ती के लिए चयन परीक्षाएं आयोजित करना, लेकिन अब इसकी पहचान महाघोटाला संस्थान। हुजूर, ये इल्जाम नहीं है। ही इरादा बदनाम करने का है। एसटीएफ और सीबीआई की रिपोर्ट ने व्यापमं की हकीकत को उजागर कर दिया। यहां की कारगुजारियों को सुनकर योग्यता रखने वाले युवाओं में आक्रोश है। महाघोटाले ने हजारों काबिल नौजवानों के सपनों को भ्रष्टाचार की आग में जला दिया। उन गरीब छात्रों का क्या दोष, जिन्होंने अच्छे कॅरियर की खातिर दिन-रात मेहनत करके अपनी जिंदगी को संवारने के लिए खुशियां कुर्बान कर दी थीं। ऐसे युवाओं के मां-बाप के ख्वाब भी टूटे। हुजूर, ये सिर्फ महाघोटाला नहीं, राष्ट्रद्रोह है। हम तो इसे यही संज्ञा देंगे। राष्ट्रद्रोह इसलिए कि योजनाबद्ध तरीके से अपात्रों का चयन हुआ। योग्यता को दरकिनार किया गया। प्रदेश को काबिल स्टूडेंट और अफसर, कर्मचारी मिलने से रोका गया। व्यापमं का मुखिया मुख्य सचिव के समकक्ष आईएएस अफसर होता है। इसके बाद भी यहां प्रवेश एवं चयन परीक्षा के नाम पर घोटाला-दर-घोटाला हुआ। उन्हें कानों-कान खबर नहीं हुई। आश्चर्य है कि छोटी-बड़ी बातों पर मोर्चा खोलने वाले जनप्रतिनिधियों तक भी इसकी खबर नहीं पहुंची।


-अंदरखाने की मानें तो गड़बड़झाला का सिलसिला एक दशक पुराना है। वर्ष 2009 तक आते-आते इसने बुलेट ट्रेन की स्पीड पकड़ ली। व्यापमं की कारगुजारियों का पता तो 2013 में पीएमटी परीक्षा को लेकर इंदौर में 20 फर्जी परीक्षार्थी पकड़े जाने से लगा। निजी मेडिकल कॉलेज संचालकों, चिकित्सा शिक्षा विभाग के अफसरों, राजनेताओं, नौकरशाहों, व्यापमं अफसरों, रैकेटियर, दलालों आदि के नाम उजागर होने लगे। अब भले ही सब मुंह छिपाए घूम रहे हों, लेकिन सवाल बरकरार है, इसका जिम्मेदार कौन...? यह भी जान लीजिए अकेले 2012 की पीएमटी की सीटों में बंदरबांट का अनुमानित आंकड़ा 2000 करोड़ रुपए है। अगर वर्ष 2009 से 2013 तक का हिसाब लगाएं तो यह आंकड़ा 10 हजार करोड़ तक पहुंचता है। सिर्फ पीएमटी नहीं बल्कि कुछ अन्य प्रवेश एवं चयन परीक्षाओं में भी ये घोटाला हुआ है। इनमें से कुछ चयन परीक्षाओं की जांच चल रही है। कई आरोपी जेल गए तो कुछ जमानत पर बाहर गए और कुछ फरार हैं तो कुछ के खिलाफ अभी अभियोजन की कार्रवाई होना है। इस सबके चलते अदालत से इंसाफ उम्मीद बरकरार है।


प्रसंगवश-
ये भी जान लीजिए व्यापमं का गठन 1970 में पूर्व चिकित्सीय परीक्षा बोर्ड के रूप में हुआ था। इसके 11 साल बाद इंजीनियरिंग मंडल का गठन हुआ। इसके कुछ दिनों बाद दोनों को मिलाकर मप्र व्यावसायिक परीक्षा मंडल का नाम दे दिया गया। ये संस्थान राज्य शासन का एक स्व-वित्त पोषित संस्थान है। दाग छुपाने के लिए अब व्यापमं कोे अंग्रेजी में ही प्रोफेशनल एग्जामिनेशन बोर्ड यानी पीईबी कहा जाने लगा है।

गुजारिश

व्यापमं महा घोटाले को लेकर अवाम के दिल में भरोसा कायम करने के लिए सरकार को चाहिए एक स्पेशल कोर्ट का गठन कर मामले की रोजाना सुनवाई हो। ताकि तारीख पे तारीख लगने पर कानून की लचर गलियों का फायदा आरोपी उठा पाएं। इस प्रसंग पर दुष्यंत का एक शेर याद रहा है...

इस सिरे से उस सिरे तक सब शरीके जुर्म हैं, आदमी या तो जमानत पर रिहा है या फरार।

मैं बेपनाह अंधेरों को सुबह कैसे कहूं, मैं इन नजारों का अंधा तमाशबीन नहीं।- अलीम बजमी

दैनिक भास्कर पर Hindi News पढ़िए और रखिये अपने आप को अप-टू-डेट | अब पाइए Bhopal News in Hindi सबसे पहले दैनिक भास्कर पर | Hindi Samachar अपने मोबाइल पर पढ़ने के लिए डाउनलोड करें Hindi News App, या फिर 2G नेटवर्क के लिए हमारा Dainik Bhaskar Lite App.
Web Title: un kabil Naojvaanon ka dos kyaa, jinhonne behtr keriyr ke liye din-raat mehnt ki thi
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

More From Bhopal

    Trending

    Live Hindi News

    0

    कुछ ख़बरें रच देती हैं इतिहास। ऐसी खबरों को सबसे पहले जानने के लिए
    Allow पर क्लिक करें।

    ×