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भोपाल न्यूज

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Dainik Bhaskar

Nov 28, 2017, 06:42 PM IST
बछड़े को दुलारते सीएम शिवराज। बछड़े को दुलारते सीएम शिवराज।

भोपाल। बतौर मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान 29 नवंबर 2017 को अपने 12 साल पूरे कर रहे हैं। इस खास मौके पर dainikbhaskar.com आपको बता रहा है, उनके 'पांव-पांव वाले भैया' से सीएम बनने तक की कहानी।

ऐसे मिला था सांसद बनने मौका...
ये बात 1991 की है जब तत्कालीन सांसद अटल बिहारी बाजपेई ने विदिशा लोकसभा सीट से त्यागपत्र दे दिया था। उनके बाद शिवराज सिंह चौहान यहां से लोकसभा का उपचुनाव लड़े और जीते भी। इस दौरान वे शहरी स्वर्णकार कॉलोनी में छोटा-सा मकान किराए पर लेकर रहने लगे थे। लेकिन, सांसद बनने के बाद उनके निवास पर लोगों का आना-जाना बढ़ने लगा और वह मकान छोटा पड़ने लगा। इसके बाद उन्होंने विदिशा के शेरपुरा स्थित दो मंजिला भवन किराए पर ले लिया था, जहां से वे राजनैतिक और पारिवारिक कार्यक्रम करवाते थे।

इसलिए लोगों ने नाम दिया-पांव-पांव वाले भैया

शिवराज ने खुद को हमेशा किसान का बेटा माना है। जब शिवराज पहली बार सांसद बने उस समय केन्द्र में कांग्रेस की सरकार थी। संसदीय क्षेत्र में अपनी पहचान बनाए रखने और लोगों को जोड़ने के लिए वे लगातार दौरे करते रहे। इस दौरान कई बार उन्होंने विभिन्न मुद्दों पर पूरे संसदीय क्षेत्र की पदयात्राएं भी की। यही कारण है कि वे पूरे विदिशा संसदीय क्षेत्र में 'पांव-पांव वाले भैया' के नाम से पहचाने जाने लगे।

सरल स्वभाव से जीता दिल

-शिवराज सिंह चौहान 29 नवम्बर, 2005 को पहली बार मध्य प्रदेश के मुख्यमंत्री बने। देशज शब्दों और अपने सरल व्यवहार के साथ शिवराज ने मुख्यमंत्री पद की शपथ लेते ही प्रदेश की हालत सुधारने पर सबसे ज्यादा ध्यान दिया। सड़क, बिजली, पानी की हालत उस समय सबसे ज्यादा खराब थी। शिवराज ने सत्ता में आते ही सबसे पहले इन्हें सुधारा जिससे जनता का विश्वास उन पर बढ़ा। इसी विश्वास के आधार पर शिवराज ने दूसरी बार साल 2008 में भोपाल के जंबूरी मैदान में सीएम पद की शपथ ली। जिसके बाद 2013 में वो एक बार फिर मुख्यमंत्री का चुनाव जीतकर प्रदेश के मुखिया बनकर सामने आए।

दूसरी बार सीएम बनकर चौंकाया था
चौहान ने प्रदेश के मुख्यमंत्री के रूप में सबसे पहले 29 नवंबर 2005 में शपथ ली थी। उनके नेतृत्व में भाजपा ने वर्ष 2008 के विधानसभा चुनाव में मध्य प्रदेश में 230 सीटों में से 143 पर जीत हासिल कर सबको आश्चर्यचकित कर दिया था। इसके बाद चौहान वर्ष 2008 में दूसरी बार प्रदेश के मुख्यमंत्री बने थे। मध्य प्रदेश के बहुचर्चित व्यापमं घोटाले के आरोपों के बावजूद चौहान ने 2013 के विधानसभा चुनावों में जीत हासिल की। इसमें भाजपा ने 165 विधानसभा सीटों पर जीत दर्ज की थी, जिसके बाद 14 दिसंबर 2013 को तीसरी बार वे मुख्यमंत्री बने।

पार्टी में निभाईं कई महत्वपूर्ण जिम्मेदारियां

-1977-1978 में शिवराज 'अखिल भारतीय विधार्थी परिषद' के संगठन मंत्री बने और 1978 से 1980 तक 'अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद' के मध्य प्रदेश के संयुक्त मंत्री रहे। शिवराज सिंह चौहान 1980 से 1982 तक 'अखिल भारतीय विधार्थी परिषद' के प्रदेश महासचिव, 1982-1983 में परिषद की राष्ट्रीय कार्यकारणी के सदस्य, 1984-1985 में 'भारतीय जनता युवा मोर्चा', मध्य प्रदेश के संयुक्त सचिव, 1985 से 1988 तक महासचिव तथा 1988 से 1991 तक युवा मोर्चा के प्रदेश अध्यक्ष भी रहा। 1990 में पहली बार शिवराज बुधनी विधान सभा क्षेत्र से विधायक बने और 1991 में विदिशा संसदीय क्षेत्र से पहली बार सांसद चुने गए।

सीएम बनने से पहले चार बार रहे सांसद
-ग्यारहवीं लोक सभा में वर्ष 1996 में शिवराज सिंह विदिशा संसदीय क्षेत्र से पुन: सांसद चुने गए। सांसद के रूप में 1996-1997 में 'नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति', 'मानव संसाधन विकास विभाग' की परामर्शदात्री समिति तथा 'नगरीय एवं ग्रामीण विकास समिति' के सदस्य रहे। साल 1998 में शिवराज विदिशा संसदीय क्षेत्र से ही तीसरी बार बारहवीं लोक सभा के लिए सांसद चुने गए। शिवराज सिंह चौहान ने 1999 में विदिशा से ही चौथी बार तेरहवीं लोक सभा के लिये सांसद निर्वाचित हुए।

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बछड़े को दुलारते सीएम शिवराज।बछड़े को दुलारते सीएम शिवराज।
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