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भोपाल अपडेट

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Sushma Barange | Last Modified - Nov 16, 2017, 04:26 PM IST

भोपाल.मध्य प्रदेश की राजधानी में हुए गैंगरेप केस में रेलवे पुलिस (जीआरपी) ने गुरुवार को चार्जशीट दाखिल की। मामले की सुनवाई फास्ट ट्रैक कोर्ट में चल रही है। बताया जा रहा है कि सोमवार को आरोप तय होने के बाद इसी महीने सजा भी सुनाई जा सकती है। लीगल एक्सपर्ट्स की मानें तो आरोपियों को 10 साल से उम्रकैद तक की सजा हो सकती है। दूसरी ओर, भोपाल कोर्ट में वकीलों ने आरोपियों की पैरवी करने से इनकार कर दिया। बता दें कि 31 अक्टूबर की शाम एक स्टूडेंट से हबीबगंज स्टेशन के पास चार लोगों ने गैंगरेप किया था। आरोपी ज्यूडीशियल कस्टडी में है। पांच पुलिस अफसरों और दो डॉक्टर्स को सस्पेंड किया जा चुका है।

चार्जशीट में पुलिस ने क्या बताया

- हबीबगंज, जीआरपी थाना इंचार्ज हेमंत श्रीवास्तव ने बताया कि हमने मजिस्ट्रेट शालू सिरोही के कोर्ट में चार्जशीट पेश की। इसमें सबूत के तौर पर आरोपियों की डीएनए रिपोर्ट, विक्टिम के बयान, धूल में सने कपड़े, फॉरेंसिक रिपोर्ट और परिस्थितिजन्य सबूतों को शामिल किए हैं।

- गैंगरेप केस में आरोपी रमेश उर्फ राजू मेहरा, गोलू उर्फ बिहारी, अमर उर्फ गुल्टू और राजेश उर्फ चेतराम हैं। चारों आरोपी 22 नवंबर तक ज्यूडीशियल कस्टडी में हैं। उनके खिलाफ गैंगरेप, अपहरण, जान से मारने की कोशिश और सबूत मिटाने की धाराओं में केस दर्ज हुआ है।
- मामले की जांच कर रही एसआईटी के मुताबिक, आरोपियों के कपड़ों में लगी मिट्टी और वारदात वाली जगह की मिट्टी के सैंपल मैच हुए हैं। डीएनए रिपोर्ट में चारों आरोपियों के गैंगरेप में में शामिल होने की पुष्टि हुई है। इसके अलावा उनके कब्जे से लड़की का मोबाइल, कान की बालियां और घड़ी जब्त की गई।

हाईकोर्ट ने कहा था 'ट्रैजिडी ऑफ एरर्स'

- भोपाल गैंगरेप पर जबलपुर हाईकोर्ट ने 13 नवंबर को सुओ मोटो (स्वत: संज्ञान) लेते हुए सरकार को फटकार लगाई। पुलिस और डॉक्टर्स के रवैये को लापरवाही भरा बताते हुए हाईकोर्ट ने इसे ‘ट्रैजिडी ऑफ एरर्स’ (Tragedy of Errors) बताया था। इसके साथ ही हाईकोर्ट ने सरकार से दो हफ्ते में एक्शन टेकन रिपोर्ट पेश करने का ऑर्डर दिया।
- बता दें कि गैंगरेप के बाद विक्टिम को केस दर्ज कराने के लिए 24 घंटे तक बाद भटकना पड़ा था। खबर मीडिया में आई तो पुलिस ने एफआईआर दर्ज की। इसके बाद जब विक्टिम का सुल्तानिया लेडी हॉस्पिटल में मेडिकल कराया गया तो उसकी रिपोर्ट भी गलत दे दी गई।
- पहली मेडिकल रिपोर्ट में कहा गया कि विक्टिम ने सहमति से संबंध बनाए। मीडिया में रिपोर्ट लीक हो गई तो अगले दिन दूसरी रिपोर्ट तैयार की गई। इसमें कहा गया कि विक्टिम गैंगरेप का शिकार हुई।

क्या है भोपाल गैंगरेप केस?

- घटना 31 अक्टूबर शाम की है। कोचिंग सेंटर से लौट रही 19 साल की लड़की को चार बदमाशों ने स्टेशन के पास रोका। झाड़ियों में ले जाकर उसके साथ गैंगरेप किया। घटनास्थल से आरपीएफ चौकी (रेलवे पुलिस फोर्स) सिर्फ 100 मीटर दूर है।
- आरोपियों ने विक्टिम का मोबाइल फोन और कुछ ज्वैलरी भी लूटी। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों को लगा कि लड़की की मौत हो गई है तो वो उसे छोड़कर भाग गए। होश आने पर विक्टिम आरपीएफ थाने पहुंची। वहां से उसने पिता को घटना के बारे में जानकारी दी। उसके पिता आरपीएफ में ही हैं।
- तीन थानों एमपी नगर, हबीबगंज और जीआरपी हबीबगंज के बीच विक्टिम पिता के साथ भटकती रही, लेकिन पुलिस ने एफआईआर दर्ज नहीं की।
- ऊपर से दबाव आया तो पुलिस ने 24 घंटे बाद रिपोर्ट लिखी। इसमें तीन आरोपियों को पहले गिरफ्तार किया गया। चौथे आरोपी को पुलिस तीसरे दिन पकड़ सकी थी।
- पुलिस कार्रवाई में लापरवाही बरतने पर तीन थानों के प्रभारी, दो सब इंस्पेक्टर सस्पेंड हुए। भोपाल के एक सीएसपी, जीआरपी एसपी और भोपाल आईजी को हटाया गया है।

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