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भोपाल

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Sumit Pandey | Last Modified - Nov 28, 2017, 09:31 PM IST

भोपाल।एक मुस्लिम विद्वान, जो श्रीमद् भागवत गीता का प्रवचन करते हैं। वेदों का पाठ करते हैं अौर चाणक्य नीति के श्लोक सुनाते हैं। सुनने में यह थोड़ा अटपटा लग सकता है, लेकिन पूरी तरह से सच है। सूफी चिंतक प्रोफेसर अजहर हाशमी हिन्दू धर्मग्रंथों के पाठ से जीवन जीने की कला सिखाते हैं। वह गीता, वेद और उपनिषदों से उदाहरण से अपनी बात को एक-एक सूत्र में पिरोते हैं और फिर जीवन की गुत्थियों सुलझाने की जुगत बताते हैं।

-गीता में कर्म की प्रधानता को वह अपनी जिंदगी में हासिल की गई प्रमुख सीख मानते हैं। इसके बाद वह ज्ञान को रखते हैं। उन्हें गीता के 18 अध्याय ही नहीं उसके किस खंड, पेज पर कौन सा श्लोक है। ये भी याद है। चाणक्य नीति का प्रोफेसर हाशमी ने एक-एक सूत्र पढ़ रखा है। वह वेदों से श्लोक का पाठ इतनी आसानी से करते हैं, कि सुनने वाला हैरान रह जाए।

-प्रोफेसर हाशमी मंगलवार को भोपाल के मानस भवन में गीता जयंती पर श्रीमद् भागवत गीता पर प्रवचन देने आए थे। इस दौरान DainikBhaskar.com से चर्चा में प्रोफेसर हाशमी कहते हैं कि इल्म (ज्ञान) हासिल करने की पाबंदी कुरान भी नहीं देता है। कुरान, वेदों की तरह की अपौरुषेय है। मतलब इसे लिखा नहीं गया ऋचाओं के माध्यम से सुना गया और फिर पीढ़ी दर पीढ़ी एक-दूसरे को मिलता रहा।

-असल में, प्रोफेसर हाशमी सूफीज्म से प्रभावित हैं, लेकिन किसी सिलसिले (सूफी परंपरा) में नहीं बंधे हैं। उनके गुरु उनके पिता खुर्शीद हाशमी हैं। यही वजह रही कि हिंदू धर्मग्रंथों वेद, पुराण, गीता, रामचरित मानस पढ़ने और आत्मसात करने का सिलसिला घर से ही शुरू हुआ था।

सुनने की तमीज सिखाती है गीता
वह कहते हैं कि श्रीकृष्ण सबसे बड़े संपादक थे और संजय इलेक्ट्रॉनिक मीडिया के पत्रकार थे। और संपादकों का काम होता है अच्छी हैडिंग लगाना। श्रीकृष्ण ने पूरी बात कह दी, फिर कर्म, ज्ञान और भक्ति हेडिंग लगा दी। फिर रिपोर्ट को पूरा पढ़ते रहिए। यह पत्रकारों के लिए भी सीख देते हैं। वह कहते हैं कि पत्रकार को अच्छा सुनने वाला होना चाहिए। उन्होंने कहाकि गीता सुनने की तमीज सिखाती है।

घर में सर्वधर्म समभाव का माहौल

-रतलाम निवासी प्रोफेसर हाशमी के पिता खुर्शीद हाशमी खुद संतों जैसा जीवन जीते हैं। उनके घर की मेज पर मानस भी मिलेगी तो कुरान भी, गीता मिलेगी तो बाइबिल भी रखी होगी। यही वजह रही कि घर में धार्मिक कट्टरता नहीं आ सकी। प्रोफेसर हाशमी कहते हैं, गीता तीन मुख्य बिंदुओं पर आधारित है। कर्म, भक्ति और ज्ञान। यही गीता का सार है। कर्म, गीता के प्रथम अध्याय से छठवें अध्याय तक। भक्ति, सातवें से 12वें अध्याय तक और ज्ञान 13वें से 18वें अध्याय में समाहित है। इसमें कर्म की प्रधानता रही है। क्योंकि वह मानते हैं कि कर्म से ही सारी प्राप्तियां हैं।

सिखाती नंदन वन की तरह खिल जाएगा
दुर्वासा और विश्वामित्र की कथाओं के माध्यम से प्रोफेसर हाशमी ने कहा कि क्रोध रंगत बदल देता है। क्रोध कामना से आता है, कामना पूरी नहीं हुई तो क्रोध आता है। क्रोध से सम्मोहन बढ़ता है और सम्मोहन सब नष्ट कर देता है। बेहतर जीवन के लिए क्रोध पर नियंत्रण जरूरी है। चाणक्य नीति क्रोध को चांडाल माना गया है। तृषा को वैतरिणी और विद्या यानि ज्ञान को कामधेनु गाय माना गया है। वह कहते हैं कि अगर इसमें संतोष मिल जाए तो जीवन नंदन वन की तरह खिल जाता है।

बेटियां पावन दुआएं हैं...
प्रोफेसर अजहर हाशमी अध्यात्म के साथ ही कविताएं भी लिखते हैं। उनकी कविता 'बेटियां पावन दुआएं हैं' को मध्य प्रदेश सरकार ने स्कूल पाठ्यक्रम में शामिल किया है। मप्र सरकार ने बेटी है तो कल है, थीम पर आधारित अभियान को इस कविता के बाद ही शुरू किया।

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Web Title: muslim skolr ne khaa- tmij sikhaati hai gaitaa, krisn sabse bdee editr
(News in Hindi from Dainik Bhaskar)

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