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रेप के बाद नाबालिग ने दिया बेटे को जन्म, पहले ठुकराया अब जागी ममता

रेप के बाद नाबालिग ने दिया बेटे को जन्म, पहले ठुकराया अब जागी ममता

Dainik Bhaskar

Nov 28, 2017, 01:50 PM IST
सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष सुधीर सीडब्ल्यूसी के अध्यक्ष सुधीर

भोपाल। ये कहानी मध्य प्रदेश के दमोह जिले उस किशोरी मां की है, जिसके साथ 16 साल की उम्र में दरिंदों ने रेप किया। बाद में किशोरी प्रेगनेंट हुई तो नाजायज औलाद को छिपाते घूमती रही। उसके मां-पिता ने समाज के डर से उसके आने वाले बच्चे को अपनाने से इनकार कर दिया। दमोह के जिला अस्पताल में गांव में आस पड़ोस में खुसर-फुसर होने लगी। बेटी के सामने कोई रास्ता न बचा तो उसने भी माता-पिता की हां में हां मिला दी और कहा कि वह बच्चे को छोड़ देगी। पर मां दिल कहां मानने वाला था। उसकी ममता जाग गई है और वह अपने नवजात बच्चे को रखने को तैयार हो गई है।


- इसके लिए उसने बकायदा पुलिस में जानकारी दी है, फिलहाल नवजात को बेहतर इलाज के लिए सागर मातृ शिशु गृह भेजा गया है। जहां उसका उपचार चल रहा है। हालांकि दुष्कर्म पीड़िता मां के सामने कुछ परेशानियां आ रही हैं। बाल कल्याण समिति को बच्चे को सागर भेजने से पहले नरसिंहगढ़ पुलिस और उसकी मां से संपर्क करना था, लेकिन उन्होंने ऐसा नहीं किया। नरसिंहगढ़ पुलिस को भी इस बात का पता नहीं चला कि बच्चा दमोह से सागर भेज दिया गया है। दमोह जिला अस्पताल के चौकी प्रभारी का कहना है कि बच्चे की मां उसे लेने को तैयार है।


सागर में चल रहा है इलाज
सोमवार को 3 बजे बाल कल्याण समिति के अध्यक्ष सुधीर विद्यार्थी सदस्यों के साथ एसएनसीयू वार्ड पहुंचे, जहां पर बच्चे को सागर पहुंचाने की प्रक्रिया पूरी कराई। इस दौरान एसएनसीयू में मौजूद नर्सों ने नवजात को देने पर आपत्ति की। नर्सों का कहना था कि पुलिस द्वारा किसी को भी नवजात देने से पहले उनसे संपर्क करने की बात कही गई है, क्योंकि बालक की मां अब उसे अपने साथ रखने को तैयार हो गई है। इस पर अध्यक्ष विद्यार्थी द्वारा अस्थाई रूप से शिशु गृह में रखे जाने की बात नर्स को बताई गई और पत्र दिया गया जिसमें नवजात को अस्थाई रूप से उसकी देखरेख के लिए दो माह तक के लिए शिशु गृह में रखा जाएगा।


शादीशुदा है आरोपी
किशोरी के साथ पथरिया थाना क्षेत्र के जीतू अहिरवार ने दुष्कर्म किया था। पुलिस ने आरोपी को गिरफ्तार कर जेल भेज दिया है। आरोपी शादीशुदा है। अक्टूबर में किशोरी को प्रसव के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसने बच्चे को जन्म दिया था। जबकि आरोपी के परिवार के लोग किशोरी को अपनाने और नवजात को ले जाने सामने नहीं आए थे। किशोरी के माता-पिता अपनी बेटी को तो घर ले गए, लेकिन बच्चे को अस्पताल में ही छोड़ गए।


पहले बच्चा लेने से कर दिया था इनकार
गौरतलब है कि पिछले महीने दुष्कर्म पीड़िता किशोरी को डिलेवरी के लिए जिला अस्पताल में भर्ती कराया गया था। जहां उसने कम वजन के शिशु को जन्म दिया था। कुछ दिन तक किशोरी जिला अस्पताल में भर्ती रही थी। हालत में सुधार होने पर माता-पिता के साथ घर चली गई थी।


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