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82 साल के इस शख्स ने बंजर भूमि को कर दिया हराभरा, सालाना कमाते हैं इतना

dainikbhaskar.com | Last Modified - Nov 10, 2017, 07:27 PM IST

82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक अंबिका प्रसाद तिवारी ने बंजर भूमि को आबाद कर दिया है।
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    82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक अंबिका प्रसाद तिवारी ने बंजर भूमि को आबाद कर दिया है।
    भोपालमध्य प्रदेश के सागर-टीकमगढ़ मार्ग पर फार्म हाउस बनाकर रह रहे एक 82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक अंबिका प्रसाद तिवारी ने बंजर भूमि को आबाद कर दिया है। इससे ने सालाना अच्छा खासा मुनाफा कमा रहे हैं। यह जमीन उन्हें परिवार के बंटवारे में मिली थी। वह इस उम्र में भी अपने बगीचे के लिए खाद लेने मोपेड गाड़ी से टीकमगढ़ आते हैं।
    अब तक लगा चुके हैं 1 हजार से अधिक पौधे
    तिवारी अपने इस बागवान में 100 सागौन, 80 कटहल छोटे-बड़े मिलाकर, 150 अमरूद, 30 नीबू, 200 करोंद, 20 पेंदी बेर, 50 बासों के झाड़, 10 पेड़ मौसंबी, 100 पपीता, 20 अनार सहित तुलसी और अन्य औषधीय पौधे लगाए है। इसके अलावा फूलों की खेती भी करते हैं। जिससे उन्हें प्रतिदिन 250 से 300 रुपए का मुनाफा हो जाता है। इसके अलावा अमरूद, और कटहल से सबसे ज्यादा मुनाफा होता है। बारामासी कटहल और पपीते के पेड़ फलों से नीचे से ऊपर तक लदे हुए हैं।

    दिन में मात्र 3 घंटे की लेते हैं नींद
    पेड़-पौधों के प्रति लगाव इतना बढ़ गया कि इन्हें कोई नुकसान न पहुंचा दे इसलिए तिवारी 24 घंटे में सिर्फ तीन घंटे की नींद लेते हैं। बाकी के समय में पेड़-पौधों की निगरानी करते हैं। उन्होंने बताया कि इस साल सूखे के हालात निर्मित होते दिख रहे है। इसलिए पेड़-पौधों को बचाने के लिए अगर शासन स्तर तक जाना पड़ा तो जाऊंगा।
    कई जगह की नौकरी
    अपने नौकरी के दौरान अंबिका प्रसाद तिवारी नौगांव, बल्देवगढ़, बिजावर, जतारा, छतरपुर व टीकमगढ़ में पदस्थ रहे। 31 जुलाई 2001 को वह एक्सीलेंस स्कूल क्रमांक 1 से रिटायर्ड हुए। जिसके बाद उन्होंने अपना मन खेती किसानी की तरफ लगा दिया।
    बारामासी कहटल के लिए वन विभाग सागर ने लिखा तिवारी को पत्र
    14 अक्टूबर को वन विभाग सागर से उन्हें पत्र मिला जिसमें लिखा है कि 100 पौधे बारामासी कटहल के तैयार करके अनुसंधान एवं विस्तार वृत्त सागर को प्रदान करने की बात कही गई है। तिवारी का कहना है कि जितने कटहल के पौधे उनके बगीचे में उतने टीकमगढ़ जिले में किसी के पास नहीं। इसके अलावा बारामासी कटहल पूरे क्षेत्र में नहीं है।
    पर्यावरण से अधिक प्यार
    अंबिका प्रसाद तिवारी का पर्यावरण के प्रति ज्यादा लगाव हैं। उन्होंने बताया जिस तरह से पेड़ों को काटा जा रहा है। इसे देखकर लगता है वह दिन दूर नहीं जब लोगों को सांस लेने के लिए ऑक्सीजन का सिलेंडर लेना होगा। तिवारी का कहना है कि बागवानी के लिए जैविक खाद का उपयोग ज्यादा करते हैं।

    मुनाफे की कमाई लगा दी शिव मंदिर में
    2001 से बागवानी से हुए मुनाफे को तिवारी ने भगवान आशुतोष के मंदिर में लगा दिया है। इस मंदिर में भगवान शिव अपने परिवार के साथ विराजमान है। मंदिर बनाने और जयपुर से मूर्तियां लाने में वह करीब 15 लाख रुपए से ज्यादा खर्च कर चुके हैं। उनके इस फैसले पर उनके परिवार में किसी को भी दिक्कत नहीं है। तिवारी के दो बेटे और तीन बेटियां है। कुछ साल पहले उनकी जीवन संगनी का देहांत होने के बाद वह पूरे दिन भगवान भोलेनाथ की शरण में रहना पसंद करते हैं।
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    82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक अंबिका प्रसाद तिवारी।
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    खेती करते 82 वर्षीय रिटायर्ड शिक्षक अंबिका प्रसाद तिवारी।
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    बंजर जमीन को कर दिया बंजर।
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Web Title: Retired Teacher Has Done Hard Work On Waste Land
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