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हाईकोर्ट ने डीएमई को लगाई फटकार, १० दिन बाद मांगी पूरी रिपोर्ट

हाईकोर्ट ने डीएमई को लगाई फटकार, १० दिन बाद मांगी पूरी रिपोर्ट

Danik Bhaskar | Nov 29, 2017, 06:42 PM IST

भोपाल। मध्यप्रदेश सरकार ने भी मान लिया है कि प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटों पर हुए एडमिशन में धांधली की गई है। इस मामले में प्रदेश के डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने बुधवार को हाईकोर्ट जबलपुर में अपनी रिपोर्ट पेश की। रिपोर्ट में डीएमई ने माना है कि नीट : 2017 में फर्जीवाड़ा किया गया। हालांकि हाईकोर्ट ने रिपोर्ट को संतोषजनक नहीं माना है।

प्रदेश के निजी मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे में हुए 114 में से 107 दाखिले रद्द कर दिए हैं। सुनवाई के दौरान डीएमई की ओर से मॉपअप राउंड की काउंसिलिंग यानि आखिरी काउंसिलिंग में हुए फर्जीवाड़े पर भी रिपोर्ट पेश की गई। इसे हाईकोर्ट ने संतोषजनक नहीं माना। हाईकोर्ट ने डीएमई को आदेश दिए हैं कि वो निजी मेडिकल कॉलेजों में मॉप अप राउंड की काउंसिलिंग में हुए 94 दाखिलों की फिर से जांच करें और अपनी विस्तृत रिपोर्ट हाईकोर्ट में पेश करें। हाईकोर्ट ने इसके लिए डीएमई को 10 दिन की मोहलत दी है और मामले पर अगली सुनवाई के लिए 11 दिसंबर की तारीख तय कर दी है।

-बता दें कि जबलपुर हाईकोर्ट में दायर जनहित याचिका में आरोप लगाया गया था कि निजी कॉलेजों में एनआरआई कोटे और मॉप अप राउंड की एमबीबीएस सीट्स भरने में बड़ा फर्जीवाड़ा किया गया | जिसमें ना सिर्फ पैसों के दम पर प्रदेश के बाहरी छात्रों को दाखिले दिए गए बल्कि ऐसे छात्रों को भी एनआरआई कोटे में दाखिले दे दिए गए जिन्होंने कभी विदेश का मुंह तक नहीं देखा। फिलहाल प्रदेश के डायरेक्टर मेडिकल एजुकेशन ने एनआरआई कोटे के 107 दाखिले रद्द कर दिए हैं जबकि हाईकोर्ट ने उनसे, मॉप अप राउंड की काउंसलिंग में हुए फर्जीवाड़े पर विस्तृत जांच रिपोर्ट मांगी है। हाईकोर्ट ने मामले पर प्रदेश के सभी निजी मेडिकल कॉलेजों से भी जवाब मांगा है।


डीएमई निरस्त कर चुकी है एनआरआई कोटे की सीटें
पीपुल्स, चिरायु और एलएन, समेत प्रदेश के सात मेडिकल कॉलेजों में एनआरआई कोटे की सीटों पर हुए 107 अपात्र उम्मीदवारों के एडमिशन मंगलवार को संचालक चिकित्सा शिक्षा (डीएमई) ने निरस्त कर चुकी है। यह कार्रवाई विभाग की 7 कमेटियों की रिपोर्ट पर हुई है। डीएमई ने कार्रवाई की रिपोर्ट को हाईकोर्ट को भेज दी है। वहां बुधवार को सुनवाई होगी। विभाग के एक अफसर के मुताबिक कॉलेज संचालकों को उम्मीदवारों की फीस एक सप्ताह में लौटाने के आदेश दिए हैं। डीएमई ने निरस्त एडमिशन की लिस्ट मेडिकल काउंसिल ऑफ इंडिया और मध्यप्रदेश मेडिकल यूनिवर्सिटी को भेज दी है।

अपात्र स्टूडेंट्स पर दर्ज हो सकता है धोखाधड़ी का केस
- आरटीआई एक्टिविस्ट डॉ. आनंद राय ने बताया कि स्टूडेंट्स ने राज्य सरकार के काउंसलिंग पोर्टल पर रजिस्ट्रेशन एनअारआई की श्रेणी में कराया था।
- मेडिकल कॉलेजों की एडमिशन कमेटी ने भी नियमों को दरकिनार कर अपात्रों को पात्र किया था। इसके लिए स्टूडेंट और अफसरों के खिलाफ धोखाधड़ी का केस दर्ज हो सकता है।

हाईकोर्ट के निर्देश पर हुई जांच, तब सामने आया मामला
- सुप्रीम कोर्ट ने निजी मेडिकल कॉलेजों में एमबीबीएस की कुल सीटों में से 15 %सीटें एनआरआई के लिए आरक्षित की हैं।
- इन पर काउंसलिंग का अधिकार निजी मेडिकल कॉलेजों की एडमिशन कमेटी को दिया था। इसका फायदा कॉलेजों ने उठाया। मामला सामने आने पर हाईकोर्ट ने जांच का आदेश दिया।