योजना / छात्रों की क्षमताओं को परखेंगे शिक्षक तकनीक के प्रयोग से पढ़ाई बनाएंगे रुचिकर

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 04:32 PM IST



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  • सीबीएसई स्कूलों में प्राचार्य बनेंगे शैक्षणिक प्रतिनिधि

भोपाल। केन्द्रीय माध्यमिक शिक्षा मंडल (सीबीएसई) पढ़ाने के नए तरीकों और शिक्षा की नई तकनीकों का प्रयोग कर हमेशा ही बच्चों को बेहतर शिक्षा देने के प्रयास करता है। इसी दिशा में सेंट्रल बोर्ड अ़ॉफ सेकंडरी एजुकेशन यानी सीबीएसई ने अब सभी संबद्ध स्कूलों के प्राचार्यों को अध्यापन प्रतिनिधि के तौर पर काम करने को कहा है। 

 

सीबीएसई की अध्यक्ष अनीता करवल ने हाल ही एक सर्कुलर जारी किया। इसमें सभी सीबीएसई स्कूलों को अपनी वार्षिक शैक्षणिक योजना बनाने को कहा है। साथ ही स्कूल के प्राचार्यों की जिम्मेदारी भी तय की है कि वे इस शैक्षणिक योजना को सफलता पूर्वक लागू करवाएं और यह कितना कारगर साबित हुआ इसका समय-समय पर आंकलन करें। इसका मकसद बच्चों को क्वालिटी एजुकेशन देने के साथ ही उनके व्यक्तित्व का संपूर्ण विकास करना है। 

 

यह होंगी शैक्षिक प्रतिनिधि की जिम्मेदारी 

  1. हर कक्षा और उनमें बच्चों की जरूरतों के अनुसार अलग पढ़ाई की योजना तैयार की जाए। शैक्षिक प्रतिनिधि की भूमिका निभा रहे प्राचार्य इस योजना को लागू करवाने में शिक्षकों की मदद करें। ताकि, शिक्षक और छात्र दोनों अपना सर्वोत्तम प्रदर्शन कर पाएं। 
  2.  स्कूल में होने वाली सभी गतिविधियों के केन्द्र में छात्रों को कुछ नया सिखाया जाए। सालभर की शैक्षणिक योजना को इस हिसाब से कैलेंडर में शामिल किया जाए, जिसमें शैक्षणिक क्षमता या फिर जीवन मूल्यों की बात छात्रों से हो। 
  3.  शैक्षिक प्रतिनिधियों का विशेष ध्यान इस दिशा में हो कि पढ़ाई के तरीकों को उन्नत बनाया जाए। इसके लिए शिक्षा में कला, खेल, कम्यूनिकेशन टेक्नोलॉजी का संयुक्त रूप से इस्तेमाल कर कुछ नया तरीका भी ढूंढ सकते हैं। 
  4.  शैक्षिक प्रतिनिधि के तौर पर प्राचार्य की यह भूमिका भी होगी कि छात्रों के लिए पढ़ाई बिलकुल भी बोझिल न हो। बच्चों में पढ़ाई के दौरान हर रोज कुछ नया सीखने की जिज्ञासा का विकास होना चाहिए। अनुभव आधारित शिक्षा के तरीकों को भी कक्षाओं में अपनाया जाए। 
  5.  पाठ्य आधारित योजना बनाने के साथ इलेक्ट्रानिक आधारित पठन-पाठन की सामग्री समेत एनसीईआरटी द्वारा तैयार गणित और विज्ञान की किट का इस्तेमाल कर सकते हैं। अपने स्कूल को ध्यान में रखकर ऐसे संसाधन एकत्रित करें, जिससे पढ़ाने और सीखने में मदद मिल सके। 
  6.  यह सुनिश्चित करें कि शिक्षकों काे स्कूल के भीतर भी समय-समय पर प्रशिक्षण मिले, ताकि शिक्षक अपनी विशेषता को पहचान सकें और उसके आधार पर कक्षा में रचनात्मकता काे बढ़ावा दें। 

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