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मध्यप्रदेश / चैनल का दावा... सीएम और ओएसडी की बातचीत में बेनामी लेन-देन का जिक्र



Channel claim ... mentioning benami transactions in the conversation of CM and OSD
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Channel claim ... mentioning benami transactions in the conversation of CM and OSD

  • आयकर विभाग के दस्तावेजों में तुगलक रोड स्थित निवास पर फोन से हुई बातचीत का रिकाॅर्ड, दिल्ली पैसा भेजने की भी बात

Dainik Bhaskar

May 29, 2019, 05:26 AM IST

भोपाल.  लोकसभा चुनाव से पहले सीएम कमलनाथ के करीबियों पर मारे गए आयकर छापों में नया दावा किया गया है। तुगलक रोड स्थित निवास से हुए फोन की रिकॉर्डिंग और बातचीत के अंश मीडिया में बाहर आए हैं, जिसमें कथित तौर पर पैसों के कलेक्शन और ट्रांसफर के लेन-देन का जिक्र है। दावा किया जा रहा है कि रिकॉर्डेड बातचीत आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। कहा जा रहा है कि यह मुख्यमंत्री कमलनाथ और उनके ओएसडी प्रवीण कक्कड़ के बीच हुई बातचीत से जुड़ी है। उधर, कमलनाथ ने कहा कि इस खुलासे के सूत्र क्या हैं? दस्तावेज कहां से मिले? उन्होंने कहा कि भाजपा बस हमारे अच्छे कामों से ध्यान भटकाना चाहती है।

 

भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सब सामने आएगा- कमलनाथ
कमलनाथ ने बुधवार को एक प्रेस कॉन्फ्रेंस बुलाकर सभी आरोपों को दरकिनार कर दिया। उन्होंने कहा- दस्तावेज और अकाउंट जिनका जिक्र किया जा रहा है, वे कहां से मिले? िजन लोगों के यहां से मिले मैंने उनका चेहरा तक कभी नहीं देखा। उनका मुझसे क्या संबंध है। हम पिछली भाजपा सरकार में हुए कई मामलों के खुलासे करने वाले हैं। आने वाले दिनों में भाजपा के दिल-दिमाग में क्या है, सबके सामने होगा। इसीलिए भाजपा केवल ध्यान भटकाने की कोशिश कर रही है।
 

उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के दस्तावेज
रिकाॅर्डेड बातचीत को लेकर यह दावा भी किया गया है कि यह आयकर विभाग के पास मौजूद दस्तावेजों पर आधारित है। यह  इसके साथ ही लोकसभा चुनाव के दौरान उम्मीदवारों को करोड़ों की रकम भेजने के सबूत भी दस्तावेजों में हैं। खबर जारी करने वाले निजी टीवी चैनल टाइम्स नाऊ ने मुख्यमंत्री और उनके ओएसडी के बीच हुई बातचीत को ट्वीट भी किया है। 


कांग्रेस प्रत्याशियों को करोड़ों भेजे

 

  • आयकर विभाग की जांच और उसके दस्तावेजों के आधार मीडिया रिपोर्ट में यह दावा भी किया गया है कि लोकसभा चुनाव में 11 प्रत्याशियों को 25 लाख रुपए से लेकर 50 लाख रुपए तक मोटी रकम भेजी गई। सीबीआई के पास चुनाव आयोग की ओर से डीओपीटी को भेजे गए दस्तावेज पहुंचे हैं, जिनमें यह जिक्र है। जिन लोगों पर अप्रैल 2019 में आयकर छापा पड़ा था, उन्होंने ही इसे जुटाया था। आरके मिगलानी, प्रवीण कक्कड़ और ललित कुमार छजलानी के नामों का उल्लेख दस्तावेजों में है। इसमें आरोप है कि यह पैसा मप्र के उम्मीदवारों के पास आए हैं। इनमें कमलनाथ के पांच करीबी सहयोगी हैं। डायरी में एकाउंट और बयानों के साथ वाॅट्सएप चैटिंग के आधार पर पैसे के ट्रांसफर को पकड़ा गया है।
  • जांच रिपोर्ट का हवाला देकर यह भी कहा गया है कि पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजय सिंह इस सूची में शीर्ष पर हैं। जिन्हें चुनाव का फंड मिला है जो करीब 90 लाख रुपए है। जिन प्रत्याशियों के पास पैसा पहुंचने की बात कही गई है, उनमें मीनाक्षी नटराजन, कमल मरावी, अजय सिंह, प्रमिला सिंह, देवाशीष जरारिया, शैलेंद्र दीवान, कविता सिंह व प्रताप सिंह लोधी शामिल हैं। इन सभी ने हालांकि मीडिया रिपोर्ट के हवाले से आई जानकारी पर या तो टिप्पणी नहीं की या फिर इसे गलत बताया। मिगलानी का भी कहना है कि रिपोर्ट में किनके नाम हैं मैं उन्हें नहीं जानता।
  • आयकर दस्तावेजों में अलग-अलग विभागों से आए फंड का भी उल्लेख है। परिवहन से 54.45 करोड़, आबकारी से 36.62 करोड़, माइनिंग से 5.50 करोड़, पीडब्ल्यूडी से 5.20 करोड़ और सिंचाई विभाग से 4 करोड़ रुपए कलेक्शन किया गया। चेलानी की तरफ से एआईसीसी को 17 करोड़ रुपए भेजे जाने का भी उल्लेख मीडिया रिपोर्ट्स में किया गया है। चेलानी के कंप्यूटर से जानकारी सामने आई है। 

 

कथित बातचीत के अंश

 

सीएम- जो मैंने कहा था कि भेज दीजिए इसको...या दिल्ली वाले को...हां, क्या नाम था प्रकाश?...वो अभी भेजा नहीं आपने।
ओएसडी- सर, प्रकाश से बात हो गई थी हिमांशु की। तो बोल रहा था कि मैं ले जाऊंगा। 
 

सीएम- लेकिन तीन दिन में हिमांशु को भेजा नहीं आपने?
ओएसडी- नहीं सर, अभी हिमांशु के पास ही पड़ा है। अभी ट्रांसफर रुका है तो...आज चला जाएगा। सोमवार को। बाकी कल हिमांशु की प्रकाश से बात हो गई थी। प्रकाश ने कल के लिए बोला। अभी हिमांशु से बात हुई। उसने बोला..1.30 बजे प्रकाश आ रहे हैं।
 

सीएम- आप भेज दीजिए हिमांशु को।
ओएसडी- कल 10 भेजू या 5 भेजूं।
 

सीएम - 10 भेज दीजिए।
ओएसडी - ठीक है सर, कल 10 भेज देता हूं। 
 

सीएम - अभी तो पिछले 5-7 दिनों में तो नहीं भेजना न? हिमांशु को कुछ कहा
ओएसडी - नहीं सर, पिछले 10-12 दिन पहले मैंने भेजा है। 
 

सीएम - ठीक है, कल हिमांशु को बोलना तुम्हें लेटेस्ट स्टेटमेंट भेज दे। 
ओएसडी - दूसरी बात हुई मोहित से, जेवी वाले डिपार्टमेंट का है कोई...वो वाला भी दो दिन में आ जाएगा। मोहित से बात हुई थी कि कल करवा दूंगा। हिमांशु का नंबर भेज रहा हूं। 
सीएम - ठीक है। 
 

ओएसडी - कल कुछ स्टेटमेंट भेज रहे हो। 
सीएम - हिमांशु वाला, करेक्ट..
सीएम - प्रवीण मैं सौरभ के साथ बैठा हूं जो कटनी से विधायक थे। कह रहे हैं कि माइनिंग वाले और ट्रांसपोर्ट वाले बीजेपी की मदद कर रहे हैं। मैंने सौरभ को कहा है कि वो नाम दे देगा, जिन्हें आपको टाइट करना है।
ओएसडी - बिलकुल सर।
 

सीएम - ये माइनिंग और ट्रांसपोर्ट वाले को कह दो कि अगर चुनाव वहां से हारेंगे तो आप अपना बोरिया बिस्तर बांध लेना?
ओएसडी - बिलकुल सौ फीसदी सर।
 

सीएम - कटनी में एेसा नहीं चलेगा। सौरभ से कहूंगा कि वो तुम्हें कोआर्डिनेट कर ले...इतना कह देना कि माइनिंग-ट्रांसपोर्ट के कारण हारते हैं। रिजल्ट लेकर आएं नहीं तो सामान पैक कर लें। 
ओएसडी - मैसेज डाल दिया है कि 8 हुए हैं सर, उसके पास उतना ही है, बाकी हवाले वाले 2-3 दिनों से बंद हैं। अपने पास नेवेन्यू कंपनी का रेड्डी साब की तरफ से जो आएगा, जैसे भेजेंगे करा देंगें। आठ का आज करा देंगे।

 

गाजियाबाद में कमलनाथ के बेटे को हॉस्टल बनाने के लिए दी गई जमीन का आवंटन रद्द

कमलनाथ के बेटे नकुल की संस्था इंस्टीट्यूट ऑफ मैनेजमेंट टेक्नोलॉजी (आईएमटी) को गाजियाबाद में हॉस्टल के लिए दी गई 10 हजार 841 वर्ग मीटर जमीन का आवंटन रद्द कर दिया गया है। नकुल संस्था के अध्यक्ष हैं। गाजियाबाद के भाजपा पार्षद राजेंद्र त्यागी ने राजनगर सेक्टर 20 में आईएमटी परिसर के अंदर जमीन पर अवैध कब्जे का आरोप लगाया था। गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष कंचन वर्मा ने जांच समिति के फैसले पर मुहर लगाकर आवंटन रद्द किया। साथ ही प्रवर्तन अनुभाग को जमीन का कब्जा वापस लेने और हॉस्टल को तोड़ने के निर्देश जारी किए। मंगलवार को इस बारे में आईएमटी प्रबंधन को नोटिस जारी कर दिया गया।गाजियाबाद विकास प्राधिकरण के सचिव, संतोष कुमार पांडेय ने कहा- "आईएमटी गाजियाबाद द्वारा किए गए अवैध निर्माण की जांच के बाद कुल 11 हजार 503 वर्ग फुट जमीन का आवंटन निरस्त कर दिया गया है। इस जमीन पर किया गया अवैध निर्माण हटाने के लिए आईएमटी प्रबंधन को 15 दिन का समय दिया गया है। यदि इस अवधि में उसने अवैध निर्माण खुद नहीं तोड़ा तो प्रशासन कार्रवाई कर इसे जमीदोज करेगा।"

 

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