भोपाल / गोदाम की आग बुझाने पहुंचे कपड़ा व्यापारी की दम घुटने से मौत



Cloth Merchant dies of knee in his warehouse
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Cloth Merchant dies of knee in his warehouse

  • कॉम्प्लेक्स की दुकानों तक पहुंची ट्रांसफार्मर में लगी आग
  • बाल्टी लेकर दूसरी मंजिल पर स्थित गोदाम की आग बुझाने गया था व्यापारी

Dainik Bhaskar

Apr 17, 2019, 01:48 PM IST

भोपाल. शकूर खां मस्जिद के पास लालवानी प्रेस रोड स्थित राम गणेश कॉम्प्लेक्स में मंगलवार शाम आग लग गई। इसमें कपड़ा व्यापारी संदीप जैन की दम घुटने से मौत हो गई। ये आग कॉम्प्लेक्स के सामने स्थित बिजली के ट्रांसफार्मर में लगी थी। वक्त रहते इस पर काबू नहीं पाया जा सका और आग ने कॉम्प्लेक्स की दुकानों को भी चपेट में ले लिया। दूसरी मंजिल पर गोदाम में लगी आग को बुझाने के लिए व्यापारी बाल्टी में पानी लेकर गए थे। तभी दम घुटने से उनकी मौत हो गई।

 

इस ट्रांसफार्मर में मंगलवार शाम करीब साढ़े चार बजे चिंगारी उठनी शुरू हुई थी। राम गणेश कांप्लेक्स में संदीप गारमेंट्स के संचालक ओम प्रकाश अग्रवाल ने बताया कि व्यापारियों ने घबराकर साढ़े चार बजे से ही बिजली कंपनी और फायर ब्रिगेड को कॉल करने शुरू कर दिए। जब तक बिजली कंपनी की टीम मौके पर पहुंची, तब तक आग भड़क चुकी थी। लपटें बीस फीट ऊपर तक उठ रही थीं।

 

मामला बिजली का था, इसलिए उस पर काबू पाना हम लोगों के लिए आसान नहीं था। हमारे पास फायर ब्रिगेड का इंतजार करने के सिवा कोई चारा नहीं बचा था। फायर ब्रिगेड का अमला आया, लेकिन तब तक आग ने कांप्लेक्स की दुकानों को चपेट में ले लिया। 

 

चार फीट नीचे कपड़ों में दबे थे : ट्रांसफार्मर की आग बुझाने के बाद फायर फाइटर्स आदिल सिद्दकी, अफरोज खान, शक्ति तिवारी और यासिर अली दूसरी मंजिल पर पहुंचे। आदिल ने बताया कि गोदाम में कपड़ों का ढेर पड़ा था। कपड़े हटाए तो करीब चार फीट नीचे संदीप बेसुध हालत में दबे मिले। उनके दोनों हाथ झुलस गए थे। कृत्रिम सांस दी, सीने पर पंपिंग भी की, लेकिन वे होश में नहीं आ सके। उन्हें पास के ही अस्पताल पहुंचाया गया, जहां डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टर ने अंदाजा लगाया है कि करीब दो घंटे पहले ही दम घुटने से उनकी मौत हो गई थी। 

 

बाल्टी लेकर आग बुझाने गए, लेकिन निकल नहीं पाए : टीआई शैलेंद्र शर्मा ने बताया कि कॉम्प्लेक्स में पुराना कबाड़खाना निवासी संदीप जैन (42) की रेडीमेड गारमेंट्स की दुकान है। दूसरी मंजिल पर उनका गोदाम है। लपटें संदीप के गोदाम तक पहुंच गई थीं। वह पानी की बाल्टी लेकर कर्मचारियों के साथ दूसरी मंजिल पर गए। यहां धुआं ज्यादा था। कुछ देर बाद कर्मचारी उतर आए, लेकिन संदीप वहीं रह गए। तीन घंटे बाद फायर फाइटर्स ने उन्हें निकाला तो उनकी मौत हो चुकी थी।

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