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कोच फैक्टरी... सिर्फ मॉडल कोच पर ध्यान, पुनर्निर्माण बंद फिर भी सामान की सप्लाई जारी

एक वर्ष पहले
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जीएम आएंगे इसलिए रंग-रोगन से लेकर फव्वारे लगाने जैसे काम किए जा रहे। - Dainik Bhaskar
जीएम आएंगे इसलिए रंग-रोगन से लेकर फव्वारे लगाने जैसे काम किए जा रहे।
  • फैक्टरी परिसर में करोड़ों की नई मशीनों के उपयोग के लिए कोई प्लानिंग ही नहीं
  • कर्मचारियों की मजबूरी बिना काम स्टोर रूम और बिजली विभाग में काट रहे समय

भोपाल . निशातपुरा स्थित कोच फैक्टरी में अब पुराने डिब्बों के पुनर्निर्माण का काम बंद हो गया है। इसके बाद भी इस काम में आने वाले सामान की सप्लाई लगातार जारी है। करोड़ों रुपए का यह सामान जिसमें हेड स्टॉक असेम्बली और बॉडी बोल्स्टर शामिल हैं, फैक्टरी प्रांगण में यहां-वहां पड़ा देखा जा सकता है। उधर, अधिकारियों का कहना है कि कोच पुनर्निर्माण का काम बंद कर रहे हैं, जो सामान आ गया है उसका उपयोग किया जाएगा। जिस उद्देश्य से रेलवे ने निशातपुरा क्षेत्र में कोच फैक्टरी का निर्माण किया था, वह अब खत्म हो गया है। अब तक फैक्टरी में मिड लाइफ रिहेबलिटेशन (कोच की आधी जिंदगी) होने पर उसका फिर से पुर्ननिर्माण कर नए सिरे से तैयार कर ट्रेनों में लगा दिया जाता था, लेकिन अब फैक्टरी में यह काम बंद कर दिया गया और बचा हुआ अप्रैल से हो जाएगा। इसके बाद भी फैक्टरी प्रबंधन द्वारा उस सामान की खरीदी लगातार की जा रही है।

झाड़ियों के आसपास बिखरा है सामान

  • वर्तमान में पुराने कोच की ओवर हॉलिंग की जा रही है।
  • कर्मचारी बिना काम स्टोर, बिजली विभाग में समय काट रहे हैं।
  • हेड स्टॉक असेम्ब्ली, बॉडी बोल्स्टर और बफर प्लंजर जैसा सामान फैक्ट्ररी प्रांगण की झाड़ियों में रखा है।

ज्यादा बजट मिलने पर जोर.. फैक्टरी के अधिकारियों का ध्यान भी अब अपने मूल काम की जगह केवल मॉडल कोच बनाने की ओर है। जबकि इस काम को मूल काम यानी कोच के पुनर्निर्माण के साथ ही अतिरिक्त रूप से किया जाना चाहिए था, लेकिन ज्यादा बजट जल्दी मिल सके, उसके लिए उनका ध्यान केवल मॉडल कोच के निर्माण पर है।

जिन फैक्टरी में जरूरत है वहां भेजना चाहिए सामान



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