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रायसेन. ज्योतिरादित्य सिंधिया के समर्थन में सांची विधानसभा क्षेत्र से विधायक और प्रदेश सरकार में स्कूल शिक्षा मंत्री रहे डॉ. प्रभुराम चौधरी के कांग्रेस से इस्तीफे के बाद जिले के सियासी समीकरण भी बदल गए हैं। एक-एक करके कांग्रेस के पदाधिकारियों और कार्यकर्ताओं के इस्तीफों का सिलसिला शुरू हो गया है। मंगलवार को डॉ. चौधरी के कार्यालय में बड़ी संख्या में कांग्रेस पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता एकत्रित हुए और अपने-अपने इस्तीफे दिए।
शेजवार-चौधरी प्रतिद्वंदी, तालमेल बैठाना मुश्किल
सांची विधानसभा क्षेत्र में भाजपा के डॉ. गौरीशंकर शेजवार और कांग्रेस के डॉ. प्रभुराम चौधरी परंपरागत प्रतिद्वंद्वी रहे हैं। पिछले विधानसभा चुनाव में डॉ. शेजवार के पुत्र भाजपा के मुदित शेजवार को डॉ. चौधरी ने ही हराया था।इसके बाद कांग्रेस की प्रदेश सरकार में उन्हें स्कूल शिक्षा मंत्री बनाया गया था। वे जिले से एक मात्र मंत्री थे। उनके इस्तीफे के बाद अब जिले में कांग्रेस के एक मात्र विधायक उदयपुरा से देवेंद्र गड़रवास ही रह गए हैं। एक ओर डॉ. प्रभुराम चौधरी ने सिंधिया के साथ रहने की बात कही है वहीं, भाजपा नेता डॉ. गौरीशंकर शेजवार पार्टी हाईकमान के आदेश का पालन करने की बात कह रहे हैं। इस सब के बावजूद जमीनी स्थिति आसान नहीं रहने वाली है। दोनों नेता आपस में कैसे तालमेल बैठाएंगे, यह बड़ा सवाल खड़ा हो गया।
टकराव, चिंता और चुनौती साथ लाया बदलाव
माधव राव ने कराई थी राजनीतिक शुरुआत, बेटे के लिए छोड़ी चौधरी ने कांग्रेस
बेगमगंज के सुमेर गांव में 15 जुलाई 1958 को जन्मे प्रभुराम ने बीएससी और एमबीबीएस की डिग्री ली है। वे जब मेडिकल के फाइनल इयर में पढ़ाई कर रहे थे तब माधवराव सिंधिया ने पहली बार 1985 में डॉ प्रभुराम चौधरी को सांची विधानसभा से टिकट दिलाया था। इंदिरा लहर के चलते वे चुनाव भी जीत गए। तब उन्होंने डॉ गौरीशंकर शेजवार को यह चुनाव हराया था। तत्कालीन मुख्यमंत्री मोतीलाल वोरा की सरकार में डॉ. चौधरी को 1989 में 9 महीने के लिए संसदीय सचिव भी बनाया गया था। अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत माधवराव सिंधिया के साथ करने वाले डॉ. प्रभुराम चौधरी उनके निधन के बाद ज्योतिरादित्य सिंधिया के साथ बने रहे और अब कांग्रेस छोड़ दी।
कांग्रेस से कई नेताओं के इस्तीफे
सिंधिया और डॉ. चौधरी के समर्थन में रायसेन के नगर ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष ब्रजेश चतुर्वेदी, ग्रामीण ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष वीर सिंह पंवार, सांची ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष मनोज अग्रवाल, सांची युवा कांग्रेस जिला अध्यक्ष राज मीणा, दातारसिंह मीणा सहित करीब 500 से अधिक पार्टी कार्यकर्ताओं ने इस्तीफे दे दिए हैं। इतना ही विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए सांची जनपद अध्यक्ष एस. मुनियन ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। सांची विधानसभा क्षेत्र में डॉ. चाैधरी कांग्रेस के सबसे कद्दावर नेता माने जाते हैं। वहीं, अहिरवार समाज का भी बड़ा वोट बैंक भी परंपरागत ताैर पर डॉ. चौधरी के साथ रहता है।
युवा कांग्रेस ने फूंका सिंधिया का पुतला
जिले में सिंधिया का विरोध भी देखा गया। बुधवार शाम को शहर के सागर तिराहे पर युवा कांग्रेस ने ज्योतिरादित्य सिंधिया का पुतला जलाया। युवा कांग्रेस के प्रदेश सचिव तंतवार एवं जिला सचिव विकास शर्मा ने कहा का सिंधिया ने भाजपा में जाकर कांग्रेस का नुकसान किया है।
एक साल पहले कांग्रेस में गए मुनियन फिर भाजपा में लौटे
विधानसभा चुनाव के ठीक पहले भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आए सांची जनपद अध्यक्ष एस मुनियन ने भी कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया है। गैरतगंज ब्लॉक कांग्रेस अध्यक्ष लालजी ठाकुर से जब बात की गई तो उनका कहना था उन्होंने इस्तीफा नहीं दिया है।
क्या बोले नेता
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